जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मई को देश के नाम संबोधन में ईंधन संकट और संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील के बाद राजस्थान सरकार पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री की इस मुहिम को धरातल पर उतारते हुए अपने सुरक्षा काफिले में वाहनों की संख्या को सीमित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। बुधवार सुबह जब मुख्यमंत्री का काफिला निकला, तो उसमें तामझाम के बजाय केवल पांच गाड़ियां नजर आईं। सीएम ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा के नाम पर अब सड़कों पर गाड़ियों का अनावश्यक जमावड़ा नहीं दिखेगा।
अधिकारियों को कड़े निर्देश: वर्चुअल मीटिंग्स पर जोर
मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद राज्य के मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों (SP) और विभागीय अधिकारियों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके तहत अब किसी भी दौरे या सरकारी कार्यक्रम में न्यूनतम वाहनों का उपयोग करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने वाहनों की लॉग-बुक का नियमित ऑडिट करें। इसके साथ ही, अब एक शहर से दूसरे शहर की अनावश्यक यात्राओं के बजाय वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न केवल अधिकारियों के समय की बचत होगी, बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले ईंधन और रखरखाव के वित्तीय भार में भी बड़ी कमी आएगी।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा कदम
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान सरकार का यह कदम आर्थिक और पर्यावरणीय, दोनों मोर्चों पर गेम-चेंजर साबित होगा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और एनर्जी क्राइसिस को देखते हुए यह ‘संसाधन संयम’ राजकोष के लिए संजीवनी का काम करेगा। इसके साथ ही, सरकारी बेड़े में कटौती से कार्बन फुटप्रिंट कम होगा, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सहायक है।
जनता के लिए एक बड़ा संदेश
मुख्यमंत्री का यह सहज उपलब्ध अंदाज और सादगीपूर्ण कार्यशैली प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता का संचार कर रही है। जब शासन के शीर्ष पर बैठे लोग संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी दिखाएंगे, तो आम जनता में भी पीएम मोदी की अपील (सोना न खरीदना और पेट्रोल बचाना) के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। सादगी का यह संदेश राजस्थान की नई कार्यशैली को परिभाषित कर रहा है, जहाँ जनता की सेवा के लिए प्रोटोकॉल का दिखावा नहीं, बल्कि कर्मठता को प्राथमिकता दी जा रही है।
