जयपुर: राजस्थान की जीवन रेखा मानी जाने वाली अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्त रवैया अपनाया है। शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित वन एवं पर्यावरण और खान विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम ने स्पष्ट कर दिया कि अरावली प्रदेश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है और इसके मूल स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अवैध खनन को जड़ से खत्म करने के लिए तत्काल प्रभाव से एक विशेष संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस, वन और खान विभाग मिलकर करेंगे कार्रवाई मुख्यमंत्री ने बैठक में जोर देकर कहा कि अरावली जिलों में अवैध खनन पर पूर्ण अंकुश लगाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए उन्होंने वन एवं पर्यावरण, खान तथा पुलिस विभाग को आपसी समन्वय स्थापित कर एक विशेष संयुक्त अभियान (Special Joint Campaign) चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से साफ कहा कि इस संबंध में कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बड़ा फैसला: अरावली में अब नई माइनिंग लीज नहीं एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ऐलान किया कि राज्य सरकार द्वारा अरावली क्षेत्र में अब किसी भी प्रकार के नए खनन की अनुमति (New Mining Lease) नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार ने भी निर्देश जारी किए हैं, जो पूरे अरावली भू-भाग पर समान रूप से लागू होंगे। इस फैसले से पर्वत श्रृंखला के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने और अनियमित खनन पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
‘हरित अरावली’ के लिए 250 करोड़ का प्लान अरावली को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। सीएम ने बताया कि अरावली पर्वतमाला के लिए ‘हरित अरावली विकास परियोजना’ तैयार की गई है, जिसका बजट 250 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत अरावली क्षेत्र के जिलों में 32 हजार हेक्टेयर भूमि पर सघन वृक्षारोपण (Intensive Plantation) किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि सरकार माइनिंग लीज जारी करने में सुप्रीम कोर्ट और सीईसी (CEC) द्वारा समय-समय पर जारी गाइडलाइंस और पर्यावरण सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कर रही है।
