2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका! 34 साल से पढ़ा रहे गुरुजी को भी अब देनी होगी परीक्षा

सीकर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे करीब 60 हजार तृतीय श्रेणी (थर्ड ग्रेड) शिक्षकों पर नौकरी छिनने का बड़ा संकट मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया है।

इस फैसले का सीधा असर उन शिक्षकों पर पड़ेगा जिनकी नियुक्ति साल 2010 में TET नियम लागू होने से पहले हुई थी। शीर्ष अदालत के आदेशानुसार, इन शिक्षकों को अब 31 अगस्त 2028 तक हर हाल में यह पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। ऐसा न करने पर उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है।

34 साल बाद फिर से परीक्षा देने की मजबूरी

देश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 लागू होने के बाद, 23 अगस्त 2010 से देशभर में शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य कर दिया गया था। उस समय जिन शिक्षकों की नियुक्ति बिना TET के हुई थी, उनके सामने अब बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद:

  • कई ऐसे शिक्षक भी परीक्षा के दायरे में आ गए हैं, जिन्हें नौकरी करते हुए 32 से 34 साल हो चुके हैं।
  • अगर किसी शिक्षक की नियुक्ति 1994 के आसपास 21 वर्ष की आयु में हुई थी और 2028 में उसकी उम्र 55 वर्ष से कम है, तो उसे परीक्षा देनी ही होगी।
  • तीन दशक से अधिक समय तक पढ़ाने के बाद, आज के कठिन प्रतियोगिता दौर में फिर से पढ़ाई कर परीक्षा पास करना इन शिक्षकों के लिए एक पहाड़ जैसी चुनौती बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई मोहलत, किन्हें मिली है छूट?

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में फैसला सुनाते हुए सेवा जारी रखने और पदोन्नति के लिए दो साल के भीतर TET पास करने का निर्देश दिया था। शिक्षकों द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करने के बाद, अदालत ने TET की अनिवार्यता को तो बरकरार रखा, लेकिन परीक्षा पास करने की मोहलत एक साल बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है।

किसे मिलेगी छूट? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं सेवारत शिक्षकों को TET से छूट मिलेगी, जिनकी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) में पांच साल से कम का समय बचा है।

आंकड़ों में समझें: प्रदेश के कितने शिक्षक होंगे प्रभावित

प्रदेश के प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

  • कुल थर्ड ग्रेड शिक्षक: लगभग 2.40 लाख कार्यरत हैं।
  • सुरक्षित शिक्षक: 2012 से 2023 के बीच रीट (REET) पात्रता के आधार पर करीब 1.91 लाख शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इनमें से पदोन्नति आदि के बाद बचे लगभग 1.45 लाख शिक्षक TET पास होने के कारण सुरक्षित हैं।
  • प्रभावित शिक्षक: साल 2012 से पहले नियुक्त हुए करीब 60 हजार शिक्षक अब सीधे तौर पर इस संकट की जद में आ गए हैं। (वर्तमान में विभाग में थर्ड ग्रेड के लगभग 35 हजार पद खाली भी हैं।)

शिक्षक संगठनों में भारी रोष, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षक संगठनों में हड़कंप और रोष का माहौल है। राष्ट्रीय शिक्षक संघ और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जैसे संगठनों ने केंद्र सरकार से इस मामले में उचित विधायी कदम उठाने की मांग की है।

संघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र शर्मा, महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता और महासचिव प्रो. गीता भट्ट का कहना है कि प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों, अधिसूचनाओं और सक्षम प्राधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही हुई थीं। इसलिए सरकार को हस्तक्षेप कर इन पुराने शिक्षकों को राहत दिलानी चाहिए।

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