टावर के नाम पर 48.58 लाख की ठगी: 75 लाख के एडवांस का दिया था लालच, प्रतापगढ़ साइबर पुलिस ने कोलकाता से दबोचा शातिर ठग

जयपुर। प्रतापगढ़ जिले की साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर ठगी के खिलाफ एक ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मोबाइल टावर लगाने और 75 लाख रुपये एडवांस देने का लालच देकर एक ग्रामीण से 48.58 लाख रुपये ठगने वाले मुख्य आरोपी को पुलिस ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है।

जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा और साइबर थानाधिकारी मदन लाल गहलोत के कड़े मार्गदर्शन में इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

यूं बिछाया था ठगी का जाल

एसपी बी. आदित्य ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 28 अप्रैल 2026 को मोखमपुरा निवासी 34 वर्षीय भूपेंद्र सिंह ने साइबर थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 1 सितंबर 2025 को उसके मोबाइल पर एक अज्ञात कॉल आया था। कॉलर ने खुद को मुंबई निवासी ‘एसके सान्याल’ बताया और कहा कि वह भारती एयरटेल कंपनी का अधिकारी है।

शातिर ठग ने भूपेंद्र को झांसा दिया कि कंपनी ने मोबाइल टावर लगाने के लिए उसकी जमीन की लोकेशन को पास कर दिया है। इसके एवज में कंपनी उसे 75 लाख रुपये एडवांस देगी और टावर लगाने का सारा खर्च भी कंपनी ही उठाएगी। भारी-भरकम एडवांस राशि का सुनकर पीड़ित ठगों के जाल में फंस गया।

फर्जी दस्तावेजों के नाम पर वसूले 48.58 लाख रुपये

पीड़ित को विश्वास में लेने के बाद ठगों ने पैसों की मांग शुरू कर दी। उन्होंने डबल्युएचओ (WHO) सर्टिफिकेट बनवाने, सरकारी एनओसी, प्रदूषण विभाग की मंजूरी, फायर एग्रीमेंट, स्टाम्प ड्यूटी, नोटरी और वकीलों की फीस जैसे तमाम फर्जी कारण बताकर पीड़ित से अलग-अलग किश्तों में कुल 48 लाख 58 हजार 303 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो टावर लगा और न ही पैसे वापस मिले, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस की शरण ली।

तकनीकी विश्लेषण से कोलकाता पहुंची पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी बी. आदित्य के निर्देश पर अनुसंधान अधिकारी व पुलिस निरीक्षक हरिसिंह के नेतृत्व में एक विशेष साइबर टीम का गठन किया गया। टीम ने सबसे पहले ठगी की राशि जिन बैंक खातों में गई थी, उन्हें तुरंत फ्रीज करवाया। इसके बाद बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल नंबरों की गहन तकनीकी जांच की गई।

सटीक तकनीकी इनपुट और लोकेशन के आधार पर प्रतापगढ़ साइबर पुलिस की एक टीम पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के लिए रवाना हुई। वहां स्थानीय पुलिस की मदद से चितपुर थाना क्षेत्र में दबिश देकर पुलिस ने मुख्य आरोपी अमन कुर्मी उर्फ ऋषि (23) पुत्र चंदन कुर्मी को धर दबोचा।

20 हजार रुपये के लिए बेचा था बैंक खाता

पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी अमन कुर्मी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने कुबूल किया कि वह एक सुनियोजित और संगठित साइबर ठग गिरोह का मोहरा है। उसने महज 20 हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता अपने साथी बुद्धादित्य मुखर्जी और अन्य अपराधियों को दे दिया था। परिवादी भूपेंद्र सिंह से ठगे गए रुपयों में से 8 लाख रुपये सीधे इसी आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे।

पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि आरोपी अमन कुर्मी आपराधिक प्रवृत्ति का है और उसके खिलाफ कोलकाता के चितपुर थाने में पहले से ही प्रकरण दर्ज है। फिलहाल प्रतापगढ़ पुलिस आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है, जिसमें गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की अन्य वारदातों के खुलासे होने की पूरी संभावना है।

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