-Expose Now का बड़ा खुलासा: ‘हाई-टेक’ के नाम पर सरकारी पढ़ाई से परेशान हुए बच्चें, एक साल में 20% तक घट गया नामांकन
-सिस्टम की 3 कड़वी सच्चाई: अफसरों की उदासीनता, रेंगता हुआ बुनियादी ढांचा और प्राइवेट स्कूलों से हारी सरकारी व्यवस्था
-बड़ा सवाल: शाला दर्पण के डेटा और गैर-शैक्षणिक कामों में उलझे शिक्षक, आखिर कैसे सुधरेगा सरकारी स्कूलों का स्तर?
जयपुर। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को ‘स्मार्ट’ और ‘MODEL’ बनाने के सरकारी दावों की हवा निकल गई है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत जिन ‘पीएम श्री’ (PM SHRI) स्कूलों के दम पर प्रदेश का भविष्य बदलने का ढिंढोरा पीटा जा रहा था, वे आज प्रशासनिक लापरवाही और कागजी दावों की भेंट चढ़ चुके हैं। Expose Now की इस विशेष रिपोर्ट में जो जमीनी हकीकत सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है—प्रदेश के 55 ‘पीएम श्री’ स्कूलों में पिछले सत्र के मुकाबले 9,576 बच्चों का नामांकन घट गया है।
गत सत्र में जहां इन स्कूलों में कुल 50,116 बच्चे पढ़ रहे थे, वह इस सत्र (2026-27) में सिकुड़कर महज 40,540 रह गए हैं। शिक्षा विभाग ने इस बार अप्रैल से ही नया सत्र शुरू कर अपनी पीठ थपथपाई थी, लेकिन जब डेढ़ महीने बाद समीक्षा रिपोर्ट सामने आई, तो आला अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
नामांकन घटने के 3 बड़े कारण: क्यों फेल हुआ ‘पीएम श्री’ का मॉडल?
हमारी पड़ताल और विभागीय दस्तावेजों की समीक्षा में नामांकन घटने के तीन सबसे मुख्य कारण सामने आए हैं:
-संस्था प्रधानों की घोर लापरवाही: सरकार ने प्रवेशोत्सव अभियान तो चलाया, लेकिन कई स्कूलों के संस्था प्रधानों (प्रिंसिपल्स) ने इसे गंभीरता से लिया ही नहीं। अधिकारियों के आदेश केवल फाइलों में दबे रहे, जिसका खामियाजा नामांकन में भारी गिरावट के रूप में भुगतना पड़ा।
-बुनियादी ढांचे की कछुआ चाल: कागजों पर इन स्कूलों को ‘हाई-टेक’ और आधुनिक बनाने का बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार था। लेकिन बजट आवंटन में देरी और प्रशासनिक सुस्ती के कारण आज भी ये स्कूल डिजिटल लैब, कंप्यूटर और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तरस रहे हैं।
-निजी स्कूलों की कड़ी प्रतिस्पर्धा: जब अभिभावकों ने देखा कि ‘पीएम श्री’ का बड़ा बोर्ड लगाने के बाद भी समय पर सरकारी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो उनका मोहभंग हो गया। वे अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए उन्हें वापस प्राइवेट स्कूलों की तरफ भेजने को मजबूर हो गए।
“शिक्षक पढ़ाएं या डेटा भरें? अफसरों की वजह से जमीन पर हवा हुए आदेश”:-
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी ने इस बदहाली की मुख्य जड़ पर चोट करते हुए बताया कि विभाग के अधिकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए कागजी आदेश तो जारी करते हैं, लेकिन ये जमीनी स्तर पर हवा हो जाते हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि अधिकारी शिक्षकों को कई तरह के गैर-शैक्षणिक कार्यों (Non-teaching duties) में व्यस्त रखते हैं। शाला दर्पण पोर्टल पर डेटा फीडिंग और तरह-तरह की अनावश्यक योजनाओं की जानकारियां जुटाने में ही संस्था प्रधान और शिक्षक उलझे रहते हैं। जब तक शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाने का पर्याप्त समय नहीं मिलेगा, तब तक अभिभावक सरकारी स्कूलों की तरफ आकर्षित नहीं होंगे।
नामांकन में भारी गिरावट वाले प्रदेश के ‘टॉप 5’ पीएम श्री स्कूल:-
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन मुख्य स्कूलों से बच्चों का सबसे बड़ा पलायन देखने को मिला है।पीएमश्री राउमावि बाड़ी, में सबसे ज्यादा शिक्षा की स्थिति खराब थी, जिसकी वजह से यहां एक साथ 433 बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। इस स्कूल में छात्रों की संख्या अब 2379 से घटकर 1946 रह गई है।
-इसी प्रकार पीएमश्री राउमावि बयाना, भरतपुर का नामांकन 2,091 से गिरकर 1,677 पर आ गया, कुल 414 बच्चों ने स्कूल छोड़ा।
-पीएमश्री श्रीरामकरण जोशी राउमावि, दौसा: इस मॉडल स्कूल में छात्र संख्या 1,148 से घटकर 754 रह गई, यानी 394 बच्चों की भारी गिरावट।
-पीएमश्री राउमावि चौ. हाउसिंग बोर्ड, जोधपुर: यहां 957 से घटकर छात्र संख्या 630 पर सिमट गई, कुल 327 बच्चों का मोहभंग हुआ।
पीएमश्री राउमावि सार्दुल, बीकानेर: यहां भी 1,032 से घटकर महज 718 बच्चे रह गए, यानी 314 बच्चों की कमी दर्ज की गई।
राजधानी भी फिसड्डी: जयपुर जिले के वो ‘टॉप 4’ ब्लॉक जहां हुआ बंटाधार:-
जयपुर के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के पीएम श्री स्कूलों का प्रदर्शन सबसे ज्यादा निराशाजनक रहा है:
-तूंगा: यहां 180 बच्चों की कमी हुई है (नामांकन 796 से घटकर 616 रह गया)।
-जमवारामगढ़: यहां 173 बच्चों की गिरावट देखी गई (नामांकन 993 से घटकर 820 रह गया)।
-फागी: यहां भी 173 बच्चों ने स्कूल का साथ छोड़ा (नामांकन 922 से घटकर 749 रह गया)।
-बगरू (बालिका स्कूल): बेटियों की शिक्षा के बड़े दावों के बीच यहाँ 102 बच्चियों की कमी आई (नामांकन 732 से घटकर 630 रह गया)।
बड़ा सवाल: प्रदेश में वर्तमान में कुल 639 पीएम श्री स्कूल संचालित हैं। यह भारी गिरावट तो सिर्फ 55 स्कूलों की बानगी है; अगर सभी 639 स्कूलों का बारीकी से निष्पक्ष ऑडिट किया जाए, तो गिरावट का यह आंकड़ा बेहद खौफनाक हो सकता है। क्या सरकार केवल स्कूलों का नाम बदलकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेगी या इन स्कूलों को असल मायने में ‘धरातल पर स्मार्ट’ बनाएगी?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now