राजस्थान की राजनीति में आने वाले वर्षों में एक बड़ी हलचल देखने को मिलेगी। महिला आरक्षण कानून के लागू होने और आगामी परिसीमन के बाद राजस्थान विधानसभा में महिलाओं की उपस्थिति कम से कम 33 प्रतिशत होना अनिवार्य हो जाएगा। वर्तमान गणित के अनुसार, 200 सीटों वाली विधानसभा में कम से कम 66 महिला विधायकों का सदन में पहुंचना अब तय माना जा रहा है।
सीटों की संख्या में होगा भारी इजाफा
वर्तमान में राजस्थान में 200 विधानसभा और 25 लोकसभा सीटें हैं। विशेषज्ञों और प्रशासनिक अनुमानों के अनुसार, नए परिसीमन के बाद सीटों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है:
- विधानसभा सीटें: 200 से बढ़कर 266 होने की संभावना है।
- लोकसभा सीटें: 25 से बढ़कर 33 हो सकती हैं (8 सीटों का इजाफा)।
यदि विधानसभा की कुल सीटें 266 होती हैं, तो 33% आरक्षण के हिसाब से महिला विधायकों की संख्या और भी बढ़ सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट फॉर्मूला परिसीमन आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही तय होगा।
इतिहास के झरोखे से: 1952 से अब तक का सफर
राजस्थान विधानसभा का इतिहास महिला प्रतिनिधित्व के मामले में काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
- 1952 (पहली विधानसभा): शुरुआत में एक भी महिला विधायक नहीं थी। बाद में उपचुनाव के जरिए 2 महिलाएं सदन पहुंचीं।
- 2003: राजस्थान को वसुंधरा राजे के रूप में पहली महिला मुख्यमंत्री और सुमित्रा सिंह के रूप में पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष मिलीं।
- 2008: राजस्थान के इतिहास में सबसे ज्यादा 29 महिला विधायक इसी साल चुनी गई थीं, जो अब तक का रिकॉर्ड है।
- वर्तमान स्थिति: 200 विधायकों में से केवल 21 महिलाएं (10 भाजपा, 9 कांग्रेस, 2 निर्दलीय) हैं, जो कुल संख्या का मात्र 10.5% है।
विकास कार्यों के लिए बढ़ेगा बजट
सीटों की संख्या बढ़ने का सीधा असर प्रदेश के विकास और सरकारी खजाने पर भी पड़ेगा:
- विधायक कोष: वर्तमान में 200 विधायकों को सालाना 5-5 करोड़ रुपए (कुल 1000 करोड़) मिलते हैं। सीटें बढ़कर 266 होने पर यह बजट 1350 करोड़ रुपए सालाना हो जाएगा।
- वेतन-भत्ते: अतिरिक्त 66 विधायकों के बढ़ने से सरकार पर हर साल करीब 12.50 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
लोकसभा में भी बढ़ेगी ताकत
लोकसभा में राजस्थान की सीटों की संख्या 33 होने से केंद्र में राज्य की आवाज और मजबूत होगी। वर्तमान में 25 में से केवल 3 महिला सांसद (1 कांग्रेस, 2 भाजपा) प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, लेकिन आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा में भी राजस्थान से कम से कम 11 महिला सांसदों का जाना अनिवार्य हो जाएगा।
महिला आरक्षण के इस कदम से न केवल आधी आबादी को नीति निर्धारण में बराबर का हक मिलेगा, बल्कि यह राजस्थान के समावेशी विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
