-फर्जी सर्टिफिकेट मामले में घिरे L-1 ठेकेदार KCC को BEC ने की थी बाहर करने की सिफारिश, फिर भी आलाधिकारी कंपनी को बचाने का कर रहे हैं प्रयास
-टेंडर में L-2 फर्म यादव कंस्ट्रक्शन पर भी गंभीर आरोप, फिर भी नियमों को ताक पर रखकर टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं अधिकारी
-मामले में वित्त समिति ने अफसरों को लगाई फटकार, EPC को दोबारा समीक्षा करने और नया एजेंडा लाने के दिए निर्देश
जयपुर। शहर के खोनागोरियान और आस-पास के क्षेत्रों की प्यास बुझाने के नाम पर पीएचईडी (PHED) में चल रहा ‘खेल’ अब बेनकाब होने लगा है। मैसर्स गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ‘जोखिम एवं लागत’ (Risk & Cost) पर बीसलपुर जल आपूर्ति परियोजना (फेज-II) के तहत वितरण प्रणाली के 53.28 करोड़ के शेष कार्य की निविदा में भारी विसंगतियां और फर्जीवाड़ा सामने आया है। वित्त समिति (FC) की उच्च स्तरीय बैठक में इस एजेंडे पर तीखी बहस के बाद, समिति ने इस पूरी खरीद प्रक्रिया की पुष्टि करने से साफ इनकार कर दिया है और एजेंडा नोट को वापस लौटाते हुए अधिकार प्राप्त खरीद समिति (EPC) को इस पर फिर से विचार करने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन ढाई महिने से ज्यादा का समय गुजर जाने के बाद भी अधिकारी इस मामले को लटकाकर बैठे और दागी फर्मों को विभागीय कार्रवाई से बचाने में जुटे हैं। अधिकारियों के इसी खेल की वजह से यह प्रकरण अभी तक फायनेंस कमेटी को नहीं भेजा गया।

फर्जी सर्टिफिकेट का खेल, क्या L-1 ठेकेदार पर गिरेगी गाज?:-
‘Expose Now’ को मिले आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इस टेंडर में सबसे कम दर (L-1) डालने वाली फर्म मैसर्स कैलाश चंद चौधरी (KCC), जयपुर ने 48.10 करोड़ की बोली लगाई थी, जो सरकारी लागत से 9.71% कम थी। लेकिन, 11 सितंबर 2025 को हुई बोली मूल्यांकन समिति (BEC) की जांच में बड़ा धमाका हुआ। जांच में पाया गया कि इस ठेकेदार ने अमृत 2.0 और जेजेएम (JJM) के टेंडर्स में फर्जी और भ्रामक अनुभव प्रमाण पत्र पेश किए थे। BEC ने इसे RTPP अधिनियम, 2012 की धारा 11(3) के तहत ‘सत्यनिष्ठा संहिता’ (Code of Integrity) का सीधा उल्लंघन मानते हुए इस दागी ठेकेदार को वर्तमान बोली से बाहर करने (Disqualify) की सिफारिश की थी, लेकिन फिर भी विभाग के आलाधिकारियों द्वारा फर्म पर पूरी मेहरबानी की जा रही है।
L-2 फर्म पर भी ‘दाग’, फिर भी मेहरबानी का दौर:-
हैरानी की बात यह है कि मुख्य अभियंता की समिति ने L-1 (KCC) को बाहर का रास्ता दिखाते हुए मैसर्स यादव कंस्ट्रक्शन कंपनी (L-2) के साथ L-1 की दरों पर बातचीत (Negotiations) करने की सिफारिश कर डाली। जबकि सच्चाई यह है कि यादव कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ भी दूदू सर्कल के तहत 108 गांवों की बीसलपुर योजना में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जमा करने की गंभीर शिकायत लंबित है। हालांकि, विभाग ने यह तकनीकी बहाना बनाकर उसे क्लीन चिट देने की कोशिश की कि इस फर्जी सर्टिफिकेट का उपयोग वर्तमान बोली के अनिवार्य दस्तावेजों में नहीं, बल्कि ‘हाथ में चल रहे कार्यों की सूची’ (FIN-3) में किया गया है। विभाग की इस ‘मेहरबानी’ पर भी अब सवाल उठ रहे हैं।

टेंडर प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार, अफसरों की लापरवाही पर ‘माफी’ का मरहम:-
यह पूरा प्रोजेक्ट अफसरों की सुस्ती और लचर कार्यप्रणाली के कारण 16 महिने लेट हो चुका है। RTPP नियमों के तहत तय समय सीमा में टेंडर फाइनल नहीं हो पाने के कारण विभाग को RTPP नियम, 2013 के नियम 40(2) का सहारा लेकर ‘प्रक्रियात्मक देरी’ को माफ (Condone) करना पड़ा है। ठेकेदारों की आपसी खींचतान और वैधता (Validity) बढ़ाने के विवाद के बीच सिर्फ दो ठेकेदारों (KCC और यादव कंस्ट्रक्शन) ने ही अपनी बोली की वैधता को 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया, जबकि अन्य रेस से बाहर हो गए।
वित्त समिति का हंटर, EPC को दोबारा समीक्षा के आदेश:-
मामले की गंभीरता और वित्तीय नियमों में हो रही हेराफेरी को देखते हुए वित्त समिति (FC) ने इस एजेंडे को पास करने के बजाय विभाग को वापस लौटा दिया है। समिति ने सख्त निर्देश दिए हैं कि अधिकार प्राप्त खरीद समिति (EPC) इस पूरे मामले और दोनों दागी कंपनियों के रोल पर फिर से गहराई से विचार-विमर्श करे। इसके बाद ही EPC की नई सिफारिशों के साथ एक फ्रेश एजेंडा नोट वित्त समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। एफसी के इस निर्णय के बाद पीएचईडी अधिकारियों को दोनों फर्मों को बचाने के खेल पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि अभी भी ईपीसी और बीईसी द्वारा इस मामले को जानबूझकर इसलिए लटाया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार से इन दोनों फर्मों को आरटीपीपी नियमों तथा टेंडर नियमों का उल्लंघन करने के कारण होने वाली डीबार/ब्लैकलिस्ट करने तथा करोड़ों की ईएमडी जप्त करने की कार्रवाई से बचाया जा सके।

अब देखना यह है कि क्या खोनागोरियान की जनताको पेयजल उपलब्ध कराने की इस योजना का रास्ता साफ हो पाएगा या फिर 53 करोड़ का प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now