जयपुर: महिला पर्यवेक्षक (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा-2018 समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं के परिणाम में कथित फर्जीवाड़े के मामले में राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। SOG ने संतोष कुमारी मीणा (37) को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी पर OMR शीट की स्कैनिंग प्रक्रिया में कथित हेरफेर कर मूल उत्तर पुस्तिका में प्राप्त कम अंकों को बढ़वाने और चयन सूची में स्थान हासिल करने का आरोप है।
SOG के मुताबिक संतोष कुमारी मीणा ग्राम रामसिंहपुरा, पोस्ट बूरथल, थाना कानोता, तहसील बस्सी, जयपुर की निवासी है और वर्तमान में तिरुपति बालाजी नगर, एयरपोर्ट के पास, सांगानेर, जयपुर में रह रही थी।
OMR स्कैनिंग प्रक्रिया में कथित मिलीभगत
ADG SOG राजस्थान विशाल बंसल के अनुसार जांच में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में OMR शीट की स्कैनिंग और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ी कंपनी राभव लिमिटेड के कर्मचारियों तथा अन्य लोगों की कथित मिलीभगत सामने आई है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि OMR शीट की स्कैनिंग और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया का फायदा उठाकर कुछ अभ्यर्थियों के अंकों में कथित तौर पर बदलाव कराया गया। इस पूरे मामले में कर्मचारी चयन बोर्ड से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों और स्कैनिंग प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
कई आरोपियों की भूमिका पहले ही सामने आ चुकी
SOG की जांच में कर्मचारी चयन बोर्ड के तत्कालीन एनालिस्ट कम प्रोग्रामर संजय माथुर, प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल और अभ्यर्थी पूनम माथुर सहित कई लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।
जांच के दौरान इन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। SOG अब मामले में सामने आए दस्तावेजों, OMR शीट, स्कैनिंग रिकॉर्ड और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है।
परिचित अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए रकम लेने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारी चयन बोर्ड से जुड़े तत्कालीन प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल ने कथित तौर पर अपने परिचित अभ्यर्थियों को चयनित कराने के लिए OMR स्कैनिंग प्रक्रिया से जुड़े लोगों का इस्तेमाल किया।
SOG के अनुसार प्रवीण गंगवाल ने OMR स्कैनिंग कंपनी के कर्मचारियों विनोद कुमार गौड़ और शादान खान के जरिए अन्य अभ्यर्थियों के परिणाम में कथित कूटरचना करवाई।
जांच एजेंसी को इस प्रक्रिया के बदले लाखों रुपये के लेन-देन से जुड़े तथ्य भी मिलने की बात सामने आई है। अब SOG यह पता लगाने में जुटी है कि किन अभ्यर्थियों के परिणाम में कथित तौर पर बदलाव किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में कितनी रकम का लेन-देन हुआ।
संतोष कुमारी की OMR शीट में कथित तौर पर बढ़ाए गए अंक
SOG की जांच में संतोष कुमारी मीणा की मूल OMR शीट को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार मूल OMR शीट में संतोष कुमारी के कम अंक आए थे।
आरोप है कि OMR स्कैनिंग प्रक्रिया में कथित मिलीभगत के जरिए उत्तर पुस्तिका में हेरफेर कर उसके अंक बढ़ाए गए। इसके बाद बढ़े हुए अंकों के आधार पर संतोष कुमारी को महिला पर्यवेक्षक भर्ती की चयन सूची में स्थान मिल गया।
SOG ने जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर संतोष कुमारी मीणा को मामले में आरोपी बनाया और उसे गिरफ्तार कर लिया।
3 दिन की पुलिस रिमांड
संतोष कुमारी मीणा को SOG थाना जयपुर में दर्ज मुकदमे में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से SOG को 3 दिन का पुलिस रिमांड मिला है।
रिमांड के दौरान जांच एजेंसी आरोपी से OMR में कथित हेरफेर कराने वाले लोगों, स्कैनिंग कंपनी के कर्मचारियों से संपर्क, चयन सूची में स्थान हासिल करने की प्रक्रिया और कथित रकम के लेन-देन को लेकर पूछताछ कर रही है।
पहले 6 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
SOG के अनुसार संतोष कुमारी मीणा की गिरफ्तारी से पहले इस प्रकरण में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी अब OMR स्कैनिंग से लेकर परीक्षा परिणाम तैयार करने और चयन सूची जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है।
जांच का दायरा उन लोगों तक भी बढ़ाया जा रहा है, जिनकी भूमिका कथित तौर पर OMR शीट में बदलाव, स्कैनिंग प्रक्रिया में हेरफेर या अभ्यर्थियों को चयनित कराने में रही हो सकती है।
अन्य अभ्यर्थियों और आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
SOG की पूछताछ और जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों के आधार पर इस मामले में अन्य अभ्यर्थियों और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। जांच एजेंसी विशेष रूप से यह पता लगाने में जुटी है कि OMR में कथित हेरफेर का फायदा कितने अभ्यर्थियों को मिला और इसके लिए किस स्तर पर संपर्क तथा आर्थिक लेन-देन हुआ।
महिला पर्यवेक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 से जुड़े इस प्रकरण में OMR शीट की स्कैनिंग और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद अब जांच एजेंसी की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है।