-शिक्षा के नाम पर खूनी व्यापार: नीट-जेईई में टॉप रैंक और चयन के बड़े दावों के पीछे दबी हैं 70 मासूमों की चीखें, सफलता के करोड़ों के विज्ञापनों का खौफनाक सच
-सपनों के शहर में मौत का जाल: सिर्फ एलन ही नहीं, फिजीक्स वाला, अनएकडमी और मोशन जैसे बड़े संस्थानों में भी मानसिक दबाव और डर के चलते टूट रही होनहार बच्चों की सांसें
-फाइलों में कैद बच्चों की जान: 70 मौतों के बावजूद सरकार सो रही गहरी नींद, कानून बन गया लेकिन ‘अधिसूचना’ जारी होने के इंतजार में कोचिंग माफियाओं को मिली खुली छूट
-‘Expose Now’ का बड़ा सवाल: क्या बच्चों की जान से ज्यादा कीमती है कोचिंग संस्थानों का बिजनेस? सरकार की लेटलतीफी बेनकाब, आखिर कब होगी इन मौत के सौदागरों पर कार्रवाई?
कोटा/जयपुर। कोटा, जिसे भारत की ‘कोचिंग कैपिटल’ और मेडिकल-इंजीनियरिंग के सपनों का मक्का कहा जाता है, आज वह अनगिनत मासूम बच्चों के सपनों की सबसे खौफनाक कब्रगाह बन चुका है। ‘Expose Now’ की इस खास इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में उस भयानक सच्चाई का पर्दाफाश किया जा रहा है, जिसे बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स, सफलता के करोड़ों के विज्ञापनों और टॉप रैंकर्स की चमकती तस्वीरों के पीछे बड़ी चालाकी से छिपा दिया जाता है। ये पूरे देश में सबसे ज्यादा नीट (NEET) और जेईई (JEE) में सिलेक्शन और टॉप रैंक देने का दंभ भरने वाले कोचिंग संस्थानों की एक ऐसी काली सच्चाई है, जो किसी भी माता-पिता की रूह कंपाने के लिए काफी है।
‘Expose Now’ के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार, पिछले 4 सालों में, यानी जनवरी 2022 से लेकर दिसंबर 2025 तक, कोटा के कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले 70 होनहार बच्चों ने मौत को गले लगा लिया है। लेकिन इसमें सबसे चौंकाने वाला, सबसे खौफनाक आंकड़ा देश के सबसे बड़े कोचिंग संस्थान ‘एलन’ (Allen Coaching) का है। इन 70 मौतों में से अकेले 46 बच्चों की मौत का सीधा नाता एलन कोचिंग से है।
मौत के आंकड़ों में ‘एलन कोचिंग’ सबसे आगे:-
बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने की मशीन बन चुके इन कोचिंग संस्थानों में इंसानियत और संवेदनाओं की अब कोई जगह नहीं बची है। जब कोई बच्चा नीट या जेईई में टॉप करता है, तो एलन कोचिंग उस बच्चे की तस्वीर को पूरे देश में अखबारों के पहले पन्ने पर छापकर अपनी आक्रामक ब्रांडिंग करते हैं। लेकिन क्या कभी किसी अखबार के पन्ने पर उन 46 बच्चों की तस्वीरें छापी गईं, जिन्होंने दबाव, अवसाद और असफलता के डर से इसी एलन कोचिंग के हॉस्टलों और पीजी कमरों में फंदे से लटककर अपनी जान दे दी? आंकड़ों की गवाही बताती है कि वर्ष 2022 में 14, 2023 में 19, 2024 में 8 और 2025 में 5 बच्चों ने अकेले एलन में पढ़ते हुए आत्महत्या की है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, यह 46 परिवारों के उजड़ने, 46 मांओं की कोख सूनी होने और 46 पिताओं के बुढ़ापे का सहारा छिन जाने की बेहद दर्दनाक दास्तान है। कोचिंग का यह क्रूर सिस्टम बच्चों को इस कदर मानसिक प्रताड़ना के दलदल में धकेल देता है कि उन्हें मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आता है।
‘फिजीक्स वाला’ व ‘अनएकडमी’ जैसे कोचिंग संस्थान भी नहीं है पीछे:-
मौतों का यह डरावना सिलसिला सिर्फ एलन तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के इस व्यापार में शामिल अन्य बड़े नाम भी बच्चों के इस डिप्रेशन और मौत के लिए बराबर के हिस्सेदार हैं। रिकॉर्ड बताते हैं कि इस अंधी दौड़ में ‘फिजीक्स वाला’ (Physics Wallah) में अध्ययनरत 11 बच्चों ने जान दी है, वहीं ‘अनएकडमी’ (Unacademy) के 7 बच्चों ने, ‘मोशन’ (Motion) के 4 बच्चों ने, और सर्वम व आकाश कोचिंग संस्थान के 1-1 बच्चे ने अपनी जिंदगी समाप्त कर ली। ये आंकड़े साफ चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि इन कोचिंग सेंटरों की चारदीवारी के अंदर चल क्या रहा है। बच्चों को इंसानों की तरह नहीं, बल्कि रोबोट और सफलता के टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
सफलता के दबाव में टूटती बच्चों की सांसें:-
लगातार 14-14 घंटे की पढ़ाई, हर हफ्ते होने वाले खौफनाक टेस्ट, बैच शफलिंग का डर, और कम नंबर आने पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाना—ये वो अदृश्य हथियार हैं जिनसे कोचिंग संस्थान बच्चों का मानसिक कत्ल कर रहे हैं। जिस उम्र में बच्चों को सही मार्गदर्शन, मनोवैज्ञानिक सपोर्ट और परिवार के प्यार की जरूरत होती है, उस उम्र में उन्हें एक ऐसे ‘प्रेशर कुकर’ में डाल दिया जाता है, जहां उनका दम घुटना तय है। कहने को तो इन संस्थानों ने अपने यहां मनोवैज्ञानिक और काउंसलर रखे हुए हैं, लेकिन असलियत में वो सिर्फ सरकारी कागजों का पेट भरने के लिए हैं। जब एलन जैसी बड़ी संस्था में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं, तो यह सीधे तौर पर उनके सिस्टम, उनके एकेडमिक स्ट्रक्चर और उनके प्रबंधन की घोर विफलता और असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
कानून बना, लेकिन ‘अधिसूचना’ के नाम पर सरकारी ढिलाई:-
इतनी मौतों के बाद भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिस्टम और सरकार क्या कर रही है? ‘Expose Now’ की इन्वेस्टिगेशन में सिस्टम की वो लापरवाही और मिलीभगत सामने आई है, जो इन मौतों से भी ज्यादा शर्मनाक है। जब लगातार बच्चों की लाशें कोटा से उनके घरों को लौट रही थीं, तो दबाव में आकर सरकार ने एक कानून तो बना दिया। ‘राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2025’ को विधि विभाग द्वारा 24 सितंबर 2025 को अधिसूचित किया गया और 26 सितंबर 2025 को इसे राजपत्र में प्रकाशित भी कर दिया गया। लेकिन यहां सरकार और तंत्र का एक ऐसा क्रूर मजाक सामने आता है जो सीधे तौर पर उसकी मंशा पर सवाल खड़े करता है। कानून तो पास हो गया, लेकिन इसे जमीन पर लागू करने के लिए जो जरूरी ‘नियम’ (Rules) चाहिए होते हैं, वे आज तक लागू नहीं हो पाए हैं।
कार्रवाई के नाम पर सरकार का खोखला तर्क:-
सरकार का संवेदनहीन तर्क है कि ‘राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) नियम-2026’ का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है, लेकिन यह वर्तमान में विधि विभाग में समीक्षा (Scrutiny) के लिए प्रक्रियाधीन है। जब नियम ही नहीं बने, तो कानून किस काम का? सरकार साफ शब्दों में अपना पल्ला झाड़ते हुए कह रही है कि जब ये नियम अधिसूचित (Notified) हो जाएंगे, उसके बाद ही इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत इन कोचिंग संस्थानों के संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसका सीधा सा मतलब यह है कि जब तक सरकारी बाबू अपनी फाइलों पर हस्ताक्षर करके नियम लागू नहीं करते, तब तक कोचिंग माफियाओं को बच्चों की जान से खेलने और मौतों पर मुनाफा कमाने का खुला लाइसेंस मिला हुआ है! क्या 4 सालों में 70 बच्चों की मौतें सरकार को जगाने के लिए काफी नहीं थीं? क्या सरकार अभी और मौतों का इंतजार कर रही है ताकि उनकी फाइलें विधि विभाग के ठंडे बस्ते से बाहर आ सकें?
विज्ञापनों के झांसे में आकर माता-पिता अपने बच्चों को मौत के कुएं में न धकेले:-
देश के कोने-कोने से किसान, मजदूर, और मध्यम वर्गीय परिवार अपनी जिंदगी भर की पूंजी लगाकर, कर्ज लेकर अपने कलेजे के टुकड़ों को कोटा भेजते हैं। वो सोचते हैं कि एलन जैसे बड़े ब्रांड उनके बच्चों का भविष्य संवार देंगे। लेकिन जब उन्हीं संस्थानों से बच्चे की सफलता की खबर की बजाय उसकी आत्महत्या की खबर आती है, तो पूरा परिवार जीते जी राख हो जाता है। इन 70 परिवारों का दर्द कोई भी कानून, कोई भी नियम या कोई भी मुआवजा कम नहीं कर सकता। और सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि इन कोचिंग माफियाओं के खिलाफ कभी कोई सख्त आपराधिक मामला दर्ज नहीं होता। इन्हें बच्चों को आत्महत्या के लिए उकसाने का सीधा आरोपी क्यों नहीं बनाया जाता? क्या इनकी पहुंच कानून, पुलिस और सरकार से भी ऊपर हो गई है?
यह इन्वेस्टिगेशन सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है उन तमाम माता-पिता के लिए जो विज्ञापनों के झांसे में आकर अपने बच्चों को इस मौत के कुएं में धकेल रहे हैं। नीट या जेईई पास करना जिंदगी का आखिरी पड़ाव नहीं है, और न ही एलन या कोई अन्य कोचिंग संस्थान सफलता की एकमात्र चाबी है। ‘Expose Now’ सरकार से कड़े शब्दों में यह मांग करता है कि वे अपनी फाइलों के मकड़जाल से बाहर आएं। नियमों का जो ड्राफ्ट विधि विभाग में धूल फांक रहा है, उसे तुरंत लागू किया जाए और जिन कोचिंग संस्थानों, विशेषकर एलन, में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं, उनके संचालकों पर तत्काल प्रभाव से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। बच्चों का खून अब और नहीं बहना चाहिए।
क्या टॉप रैंक्स की भूख में बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं बची?
कोटा का यह डरावना सच अब किसी से छिपा नहीं है। 4 साल, 70 मौतें और आधी से ज्यादा मौतें सिर्फ एक कोचिंग सेंटर—’एलन’ के नाम। यह सिर्फ आत्महत्या का मामला नहीं, बल्कि एक ऐसे भ्रष्ट और क्रूर सिस्टम द्वारा की गई ‘संस्थागत हत्या’ (Institutional Murder) का मामला है, जो पैसों और रैंक्स के लिए पूरी तरह अंधा हो चुका है। सरकार का यह रवैया, जो नियमों को अटकाकर बैठी है, इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि शिक्षा का यह माफिया कितना ताकतवर है। लेकिन अब वक्त आ गया है कि शिक्षा के इस काले और खूनी बाजार पर हमेशा के लिए ताला लगे और इसके दोषियों को उनके किए की सजा मिले। ‘Expose Now’ बच्चों के अधिकारों, उनके मानसिक स्वास्थ्य और उनकी जिंदगी की रक्षा के लिए इस मुद्दे को तब तक उठाता रहेगा, जब तक सरकार की नींद नहीं टूटती और इन कोचिंग माफियाओं पर असली शिकंजा नहीं कसा जाता। एक भी बच्चे की जान, दुनिया की किसी भी टॉप रैंक और करोड़ों के कोचिंग बिजनेस से कई गुना ज्यादा कीमती है।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now