EXPOSE NOW: दशकों का इंतजार खत्म! राजस्थान समेत 6 राज्यों की प्यास बुझाएगा 236 मीटर ऊंचा ‘किशाऊ बांध’

नई दिल्ली/जयपुर। देश के जल संकट को दूर करने और हरित ऊर्जा (Green Energy) को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी (यमुना की सहायक नदी) पर प्रस्तावित किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना (Kishau Multi-Purpose Project) को लेकर आज एक बड़ी और सकारात्मक घोषणा हुई है, जिससे सालों से अटके इस महाप्रोजेक्ट के जल्द शुरू होने की उम्मीदें जग गई हैं। यह सिर्फ एक बांध नहीं, बल्कि उत्तर भारत के 6 राज्यों— हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान की तकदीर बदलने वाला ‘मेगा प्रोजेक्ट’ है।

प्रोजेक्ट की बड़ी बातें, आंकड़ों की नजर में महाकाय बांध:-

राजस्थान के लिए ‘वरदान’, मरुधरा की बुझेगी प्यास:-

यमुना नदी बेसिन का अहम हिस्सेदार होने के नाते इस परियोजना से राजस्थान को बहुत बड़ा और सीधा फायदा होने जा रहा है। राजस्थान सरकार लंबे समय से इस प्रोजेक्ट को गति देने की मांग कर रही थी, और आज की घोषणा राजस्थान के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है:

-पेयजल सुरक्षा (Drinking Water): यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को इस परियोजना से 201 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का हिस्सा मिलेगा। सालाना मिलने वाले इस शुद्ध पेयजल से राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों और बड़े शहरों में पानी की किल्लत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

-खेती को नया जीवन (Irrigation): कुल सिंचाई क्षमता में से एक बड़ा हिस्सा राजस्थान के खाते में आएगा। इससे राज्य के सीमावर्ती और जल संकट से जूझ रहे कृषि क्षेत्रों को भरपूर पानी मिलेगा, जिससे फसल पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आय दोगुनी होगी।

-आपदा से राहत और औद्योगिक विकास: सालाना मिलने वाले 500-600 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी से उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, मॉनसून के दौरान बाढ़ नियंत्रण (Flood Control) होने से निचले इलाकों में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

क्यों अटकी थी परियोजना और अब क्या बदलेगा?

किशाऊ परियोजना कोई नई नहीं है, यह कई दशकों से फाइलों और चर्चाओं में घूम रही थी। पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) मिलने के बावजूद यह प्रोजेक्ट तीन बड़े रोड़ों की वजह से जमीन पर नहीं उतर पा रहा था:

-प्रभावित लोगों का पुनर्वास (Rehabilitation)

-राज्यों के बीच लागत का बंटवारा (Cost Sharing)

-6 राज्यों के बीच अंतरराज्यीय सहमति

आज की इस बड़ी घोषणा ने इन सभी गतिरोधों को तोड़ दिया है। केंद्र सरकार की मध्यस्थता और लाभार्थी राज्यों की आपसी सहमति के बाद अब निर्माण कार्य की राह साफ हो गई है। यह प्रोजेक्ट न केवल दिल्ली की प्यास बुझाएगा और हरियाणा-यूपी को बाढ़ से बचाएगा, बल्कि राजस्थान की मरुधरा को भी संवारेगा। निर्माण कार्य शुरू होने की इस खबर से उत्तर भारत के विकास को एक नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

Share This Article
Leave a Comment