कलेक्टर अक्षय गोदारा के कड़े तेवर: करौली नगर परिषद में पट्टों में देरी और बेवजह ऑब्जेक्शन लगाने पर कर्मचारियों पर एक्शन

करौली। आमजन के कार्यों में पारदर्शिता और राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। मंगलवार को जिला कलेक्टर ने नगर परिषद करौली का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परिषद की विभिन्न शाखाओं के कामकाज और लंबे समय से लंबित चल रहे प्रकरणों की बारीकी से समीक्षा की।

आवेदकों से सीधा संवाद और खुली लापरवाही

निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने पट्टा जारी करने, भवन निर्माण स्वीकृति, भवन अनुज्ञा (Building Permission) और अन्य प्रशासनिक पत्रावलियों के निस्तारण की वर्तमान स्थिति का अवलोकन किया। व्यवस्थाओं को परखने के लिए उन्होंने वहां मौजूद 5 से 7 पट्टा आवेदकों से सीधे बातचीत की और उनसे पट्टा जारी न होने के कारणों की जानकारी ली। आवेदकों ने कलेक्टर के सामने शिकायत दर्ज कराई कि परिषद के स्तर पर उनके कार्यों में अनावश्यक देरी की जा रही है और समय पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। आमजन की इस परेशानी को जिला कलेक्टर ने बेहद गंभीरता से लिया और मौके पर ही त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

लापरवाह कार्मिकों पर कड़ा एक्शन

समीक्षा के दौरान परिषद की कार्यप्रणाली में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें:

  • पट्टा प्रकरणों को बिना किसी ठोस कारण के लंबे समय तक लंबित रखना।
  • नामांतरण (Mutation) नहीं खोलना।
  • फाइलों पर बार-बार अनावश्यक और गैर-जरूरी ऑब्जेक्शन (Axe Objections) लगाना।
  • संबंधित पट्टाधारकों को समय पर वस्तुस्थिति की सूचना उपलब्ध नहीं कराना।

इन खामियों पर जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इस संबंध में लापरवाही बरतने वाले दोषी कार्मिकों के विरुद्ध तुरंत अनुशासनात्मक कार्यवाही (Disciplinary Action) प्रारंभ करने के निर्देश जारी किए। इसके साथ ही, उन्होंने नगर परिषद आयुक्त प्रेमराज मीणा को निर्देशित किया कि लापरवाही करने वाले संबंधित कार्मिक को तुरंत पट्टा व नामांतरण शाखा से हटाकर किसी अन्य गैर-महत्वपूर्ण शाखा में स्थानांतरित किया जाए।

पारदर्शिता और ऑनलाइन सेवाओं पर जोर

जिला कलेक्टर ने नगर परिषद के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि जनहित से जुड़े जितने भी कार्य हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। किसी भी फाइल को बेवजह दबाकर या लंबित न रखा जाए। उन्होंने परिषद के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप हर नागरिक को सुगम और समयबद्ध नगरीय सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। इस काम में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस औचक निरीक्षण के दौरान नगर परिषद आयुक्त प्रेमराज मीणा सहित परिषद के विभिन्न शाखाओं के प्रभारी और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

Share This Article
Leave a Comment