जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) की तकनीकी लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे बूंदी जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) को उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम से बड़ी राहत मिली है। फोरम ने बिजली निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए पीएचईडी पर थोपे गए 27.27 लाख रुपये के डिमांड सरचार्ज और लेट पेमेंट सरचार्ज (LPS) को पूरी तरह माफ कर दिया है। इसके साथ ही मूल बकाया राशि जमा करने की शर्त पर शेष बची लेट फीस में भी 50 फीसदी की अतिरिक्त छूट प्रदान की गई है।
क्या था पूरा मामला?
मामला बूंदी जिले के तालेड़ा क्षेत्र का है। वहां जलदाय विभाग की पेयजल आपूर्ति के लिए स्थापित 11 केवी अंडरग्राउंड केबल अचानक खराब हो गई थी। क्षेत्र में जलापूर्ति बाधित न हो, इसके लिए बिजली निगम के तकनीकी अमले ने पास के दूसरे फीडर से एक अस्थायी कनेक्शन जोड़ दिया।
इस दौरान ग्रिड सब-स्टेशन (GSS) पर दोनों कनेक्शनों का कुल विद्युत भार (लोड) एक ही मीटर में दर्ज होने लगा। इससे मीटर में मैक्सिमम डिमांड (MDI) स्वतः ही स्वीकृत लोड से काफी अधिक दर्ज हो गई।
4 महीने में थोप दिया 27.27 लाख का अतिरिक्त बोझ
बिजली निगम के अधिकारियों ने वास्तविक स्थिति और अपने स्तर पर की गई अस्थायी व्यवस्था को नजरअंदाज करते हुए स्वचालित बिलिंग प्रणाली के तहत पीएचईडी पर भारी पेनल्टी लगा दी। अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच के चार महीनों में जलदाय विभाग के बिल में:
- डिमांड सरचार्ज: 16.55 लाख रुपये से अधिक
- लेट पेमेंट सरचार्ज (LPS): 10.72 लाख रुपये
इस तरह कुल 27.27 लाख रुपये की अतिरिक्त पेनल्टी जलदाय विभाग के बिल में जोड़ दी गई। जलदाय विभाग द्वारा बार-बार आपत्ति जताने के बावजूद स्थानीय स्तर पर बिल दुरुस्त नहीं किया गया, जिसके बाद यह प्रकरण राज्य स्तरीय फोरम के समक्ष पहुंचा।
फोरम ने JVVNL को ठहराया जिम्मेदार, दी बड़ी राहत
राजस्थान में दो प्रमुख सरकारी विभागों के बीच उपजे इस विवाद की सुनवाई ‘कॉरपोरेट लेवल कंज्यूमर ग्रीवेंस रिड्रेसल फोरम’ (CLCGRF) में हुई। फोरम की अध्यक्षता कर रहीं राजस्थान डिस्कॉम्स की चेयरमैन आरती डोगरा ने पूरे मामले की समीक्षा के बाद माना कि लोड बढ़ना किसी उपभोक्ता की मनमानी नहीं, बल्कि स्वयं बिजली निगम की तकनीकी व्यवस्था और केबल खराबी का परिणाम था।
अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त करते हुए फोरम ने आदेश दिया कि:
- पीएचईडी पर आरोपित पूरा 16.55 लाख रुपये का डिमांड सरचार्ज तत्काल प्रभाव से शून्य (रद्द) किया जाए।
- इस डिमांड सरचार्ज पर लगाया गया 10.72 लाख रुपये का लेट पेमेंट सरचार्ज भी पूरी तरह निरस्त रहेगा।
- यदि पीएचईडी अपनी वास्तविक खपत की मूल बकाया राशि समय पर जमा कराता है, तो अन्य शेष बची लेट फीस में 50 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाएगी।
इस फैसले से सरकारी राजस्व के अनुचित हस्तांतरण पर रोक लगी है और फील्ड स्तर पर तकनीकी खामियों का बिल उपभोक्ताओं पर थोपने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का स्पष्ट संदेश दिया गया है।