जालोर वासियों के लिए इस मानसून सीजन से पहले एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शहर के रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित करीब 50 साल पुराने पुल का स्ट्रक्चर अब पूरी तरह बदल चुका है। इस नए पुल के निर्माण से मानसून के दौरान सुंदेलाव तालाब में पानी की आवक बढ़ने पर होने वाले जलभराव की समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा। अब भारी बारिश में भी रेलवे स्टेशन जाने वाला मुख्य मार्ग अवरुद्ध नहीं होगा।
ऊंचाई और चौड़ाई दोनों में भारी इजाफा
पुराने पुल की तुलना में नए पुल की क्षमता को लगभग दो गुना से ज्यादा बढ़ा दिया गया है।
- चौड़ाई: पहले यह पुल महज 7 मीटर चौड़ा था, जिसे अब बढ़ाकर 17 मीटर कर दिया गया है।
- ऊंचाई: पुराने पुल की ऊंचाई सिर्फ 3 फीट थी, जो पानी के तेज बहाव में डूब जाता था। अब इसे 7 फीट ऊंचा कर दिया गया है।
100% काम पूरा, एप्रोच रोड का काम अंतिम चरण में
प्रोजेक्ट के तहत मुख्य पुल का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। अब केवल दोनों छोरों पर एप्रोच रोड बनाने का कार्य शेष है, जिसे आगामी तीन सप्ताह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जलदाय विभाग द्वारा पाइपलाइन वॉल्व शिफ्टिंग का काम होते ही सड़क को पुल से जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद नेहरू उद्यान से लेकर कॉलेज तिराहा तक का ट्रैफिक सुगम हो जाएगा।
इतिहास दोहराने से रोकेगा यह पुल
जालोर में 1973, 1990, 2006, 2023 और पिछले साल 2025 में अतिवृष्टि के दौरान रेलवे स्टेशन का संपर्क शहर से कट गया था। जवाई नदी का पानी नहरी क्षेत्र के जरिए इस रास्ते पर जमा हो जाता था। लेकिन अब फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत इस पुल के अपग्रेड होने से आपात स्थिति में भी आवाजाही चालू रहेगी।
पुराने पुल की उपेक्षा पर उठे सवाल
एक तरफ मुख्य मार्ग पर शानदार पुल बनकर तैयार है, वहीं दूसरी ओर हेड पोस्ट ऑफिस रोड से रेलवे स्टेशन जाने वाले 1973 के पुराने पुल की हालत जर्जर बनी हुई है। मोहल्लेवासियों और स्थानीय राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि इस दूसरे पुल को भी जल्द अपग्रेड किया जाए ताकि शहर के अन्य हिस्सों का संपर्क भी सुरक्षित रह सके।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य इस मानसून से पहले जनता को यह पुल समर्पित करने का है ताकि भारी बारिश में राहगीरों को कोई असुविधा न हो।
