जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर आधारित पेयजल परियोजनाओं के कार्यों को शुरू होने में अभी ओर देरी होगी। जलदाय विभाग की फायनेंस कमेटी ने विभाग द्वारा निविदाओं में अधिक से अधिक फर्मों (बोलीदाताओं) की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से पात्रता और प्री-क्वालिफिकेशन (PQ) मानदंडों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे समिति ने फिलहाल स्थगित (Defer) कर दिया है। समिति ने प्रस्ताव में से वित्तीय सुदृढ़ता से जुड़े एक महत्वपूर्ण नियम को हटाए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता (विशेष परियोजना) को इस पर फिर से विचार करने के निर्देश दिए हैं।
क्या था नियमों में ढील देने का प्रस्ताव?

PHED के मुख्य अभियंता (SP) द्वारा फायनेंस कमेटी के समक्ष रखे गए प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि HAM आधारित निविदाओं में और अधिक बोलीदाताओं को आकर्षित करने के लिए नियमों में कुछ ढील और संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। इसके तहत:
-नेटवर्थ: बोली लगाने वाली कंपनी की न्यूनतम नेटवर्थ पिछले वित्तीय वर्ष में परियोजना की अनुमानित लागत की कम से कम 20% होनी चाहिए। जॉइंट वेंचर (JV) की स्थिति में प्रत्येक सदस्य की नेटवर्थ पॉजिटिव होनी चाहिए और SPV में कम से कम 26% इक्विटी होनी अनिवार्य की गई है।
-तकनीकी और कार्य अनुभव: पिछले 7 वर्षों में सरकारी विभागों या PSU के लिए BOT, BOOT या PPP मॉडल पर किए गए कार्यों को शामिल करने और अनुभव के दायरे में मामूली बदलाव का प्रस्ताव था।
-ब्लैकलिस्टिंग पर रोक: बोली लगाने वाली फर्म केंद्र, राजस्थान या किसी भी अन्य राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित या ब्लैकलिस्टेड नहीं होनी चाहिए।
फायनेंस कमेटी ने क्यों रोक दिया प्रस्ताव?:-
विस्तृत चर्चा के दौरान फायनेंस कमेटी के ध्यान में आया कि नए प्रस्तावित नियमों में से ‘वित्तीय संसाधनों’ (Financial Resources) से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण क्लॉज हटा दिया गया है। पुराने नियमों के मुताबिक, परियोजना को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए कंसेशनेयर (ठेकेदार/फर्म) के योगदान के लिए कुल आवश्यक वित्तीय संसाधन, अनुमानित परियोजना लागत का 60 प्रतिशत होना अनिवार्य था। समिति का स्पष्ट मानना है कि हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) जैसी बड़ी और जटिल परियोजनाओं में ठेकेदार की आर्थिक मजबूती को जांचने के लिए यह क्लॉज बेहद जरूरी है। इसके बिना परियोजना के बीच में अटकने का जोखिम बढ़ सकता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए फायनेंस कमेटी ने इस एजेंडे को स्थगित करते हुए PHED के मुख्य अभियंता (SP) को निर्देश दिए हैं कि वे वित्तीय संसाधनों से जुड़े इस क्लॉज की दोबारा समीक्षा करें और आवश्यक सुधारों के साथ प्रस्ताव को अगली बैठकों में प्रस्तुत करें। इस निर्णय के बाद अब प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत HAM मॉडल पर होने वाले आगामी टेंडरों की प्रक्रिया में अभी और देरी होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now