स्टेनोग्राफर नहीं मिला तो जज को हाथ से लिखने पड़े 159 फैसले! ढाई महीने तक बिना स्टेनो काम करने को मजबूर हुए लेबर कोर्ट जज दिनेश गुप्ता

जयपुर: न्यायिक व्यवस्था में संसाधनों की कमी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला राजधानी जयपुर से सामने आया है। जयपुर स्थित लेबर कोर्ट के न्यायाधीश दिनेश गुप्ता को स्टेनोग्राफर नहीं मिलने के कारण पिछले ढाई महीने में 159 फैसले अपने हाथों से लिखने पड़े। स्थिति इतनी बदतर हो गई कि बुधवार को उनके कार्यकाल के अंतिम दिन (अंतिम कार्यदिवस) उन्हें दूसरे कोर्ट से स्टेनोग्राफर उधार बुलाना पड़ा।

जज दिनेश गुप्ता ने बुधवार को अपने कार्यकाल के अंतिम दिन यह सनसनीखेज खुलासा किया। जानकारी के मुताबिक, उनके स्टेनोग्राफर (जो सेवानिवृत्ति के बाद 2 साल से काम कर रहे थे) ने बकाया भुगतान न मिलने के कारण 13 अगस्त से ही कोर्ट आना छोड़ दिया था। इसके चलते जज को खुद ही सारे फैसले हाथ से लिखने पड़े और अंततः उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दस्तक

जज दिनेश गुप्ता ने अपना कार्यकाल दो साल और बढ़वाने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगा रखी है। इस मामले पर सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई है कि राजस्थान हाईकोर्ट सहित देश के लगभग सभी हाईकोर्ट न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने पर सहमति दे चुके हैं।

लगभग आधे राज्यों की सरकारें सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का आदेश जारी कर चुकी हैं (इनमें सात राज्य बता चुके हैं कि उन्होंने आयु 62 वर्ष कर दी है, साथ ही केरल सहित 6-7 अन्य राज्यों में भी यह आयु 62 वर्ष किए जाने की जानकारी मिली है), लेकिन राजस्थान सहित कई राज्य सेवाकाल बढ़ाने से इनकार कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सेवाकाल बढ़ाने से इनकार करने वाले इन राज्यों को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया है। इस मामले पर अब 5 अक्टूबर को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।

विवादों और बड़े फैसलों से रहा है जज दिनेश गुप्ता का नाता

जज दिनेश गुप्ता अपने सख्त और बेबाक फैसलों के चलते अक्सर सुर्खियों में रहे हैं:

  • 26/11 आतंकी हमला: 26/11 के आतंकी हमले के मामले में तत्कालीन रक्षा मंत्री और कई अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति से अनुमति मांगी थी।
  • JDA मामले में IAS पर आरोप: JDA (जयपुर विकास प्राधिकरण) में विधि निदेशक रहते हुए उन्होंने प्राधिकरण आयुक्त रहे एक IAS अधिकारी (रवि जैन) के खिलाफ प्रमाण सहित गंभीर आरोप लगाए थे।
  • 3 IAS को जेल भेजने का आदेश: वाणिज्यिक न्यायालय में जज रहते हुए उन्होंने अवमानना के एक मामले में तीन IAS अधिकारियों को जेल भेजने का आदेश दिया था, जिस पर बाद में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
  • अडानी-अंबानी समूह पर कार्रवाई: वाणिज्यिक न्यायालय में जज रहते हुए उन्होंने अडानी और अंबानी समूह के खिलाफ सख्त आदेश दिए थे। एक मामले में उन्होंने शराब कारोबार में भारी अनियमितता उजागर करते हुए मुख्य सचिव को जांच करने का आदेश भी दिया था।

तबादले और अधिकारों की लड़ाई: कई बार पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

अडानी मामले में आदेश देने के बाद दिनेश गुप्ता को ब्यावर का जिला जज बनाया गया और कुछ ही दिन बाद उनका दूरस्थ जिले में तबादला कर दिया गया। इसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट प्रशासन को उनके तबादले पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया।

इसके बाद जब उन्हें जयपुर में लेबर जज बनाया गया और उनसे कनिष्ठ (जूनियर) जज को उनका रिपोर्टिंग अधिकारी बना दिया गया, तब वे फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। हाल ही में स्टेनोग्राफर न मिलने पर और वरिष्ठता व सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने के लिए भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।


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