करधनी में पत्नि और बेटियों के हत्याकांड पर बड़ा खुलासा, क्यों हैवान पति राहुल ने उजाड़ दिया अपना परिवार?

जिस घर में बेटियों के सपने पल रहे थे, वहीं तड़के बिछ गईं चार लाशें, पत्नी और तीन मासूम बेटियों की हत्या का आरोपी राहुल फरार, मकान बेचने को लेकर चल रहा था विवाद

जयपुर। राजधानी जयपुर के करधनी थाना इलाके की गोविंद वाटिका में शुक्रवार की सुबह जब सूरज निकल रहा था, तब एक घर के भीतर ऐसा खौफनाक मंजर सामने आया, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। जिस घर में कभी बेटियों की हंसी गूंजती थी, उसी घर में चार जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थीं। कमरे में पत्नी गीता और तीन बेटियों नंदिनी, राधिका व गिरिशा के शव पड़े थे। आरोप है कि परिवार के मुखिया राहुल झा ने ही इस वीभत्स हत्याकांड को अंजाम दिया और वारदात के बाद फरार हो गया।

प्राथमिक पुलिस जांच में इस सामूहिक हत्याकांड के पीछे आर्थिक तंगी, शेयर बाजार में भारी नुकसान, कर्ज और पति-पत्नी के बीच चल रहे गृहक्लेश की बात सामने आ रही है। एडिशनल डीसीपी राजेश गुप्ता के अनुसार राहुल ने कई लोगों से पैसे उधार ले रखे थे। गोविंद वाटिका स्थित मकान उसकी पत्नी गीता के नाम था और राहुल पिछले कुछ समय से इस मकान को बेचने की कोशिश में था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चलने की आशंका है।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और फरार राहुल की तलाश में कई टीमें जुटाई गई हैं।

बेटियों के सपनों वाला घर बना मौत का घर

राहुल की बेटियां अपने भविष्य को लेकर सपने देख रही थीं। बड़ी बेटी नंदिनी पढ़ाई के साथ घर के काम में मां का हाथ बंटाती थी। गीता ने भी परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए घर में ब्यूटी पार्लर शुरू किया था। राधिका और गिरिशा पढ़ाई कर रही थीं। परिवार की कोशिश थी कि आर्थिक परेशानियों के बावजूद बेटियों की पढ़ाई और उनका भविष्य प्रभावित न हो।

लेकिन परिवार के भीतर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता गया। शेयर बाजार में नुकसान के बाद राहुल पर कर्ज का बोझ बढ़ने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह परिचितों से लगातार पैसों की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा था। एक पड़ोसी से भी उसने 50 हजार रुपए मांगे थे, लेकिन पड़ोसी करीब 25 हजार रुपए की ही मदद कर सका।

किसी ने शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि पैसों को लेकर परेशान दिख रहा राहुल कुछ ही समय बाद अपने ही परिवार के लिए मौत का कारण बन जाएगा।

तड़के 4 से 5 बजे के बीच मचा मौत का तांडव

एफएसएल की प्रारंभिक जांच के अनुसार वारदात तड़के करीब 4 से 5 बजे के बीच होने की आशंका है। पुलिस को आशंका है कि राहुल ने पहले पत्नी और बेटियों को किसी नशीले पदार्थ के जरिए बेहोश किया और इसके बाद भारी सीमेंट की ईंट से उनके सिर और चेहरे पर वार किए।

वार इतने भयावह थे कि चारों के चेहरे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। घर के भीतर का दृश्य देखकर मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी और एफएसएल टीम भी सकते में रह गई। हालांकि नशीला पदार्थ दिए जाने और हत्या के पूरे तरीके की पुष्टि विस्तृत जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

वारदात के बाद घर में पसरा सन्नाटा इस बात की गवाही दे रहा था कि कुछ घंटे पहले तक यहां एक पूरा परिवार मौजूद था। लेकिन सुबह होते-होते एक मां और उसकी तीन बेटियों की जिंदगी खत्म हो चुकी थी।

बुजुर्ग दादा के सामने उजड़ गया पूरा परिवार

इस दर्दनाक हत्याकांड का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि घर में राहुल के 85 वर्षीय पिता लक्ष्मीनाथ झा भी रहते थे। बिजली विभाग से सेवानिवृत्त लक्ष्मीनाथ ने अपने जीवन में बहुत कुछ देखा, लेकिन शायद उन्हें कभी यह कल्पना नहीं रही होगी कि जिस घर में वह अपने पोते-पोतियों के साथ जीवन के आखिरी पड़ाव में सुकून तलाश रहे हैं, वहीं उनके सामने परिवार की चार जिंदगियां उजड़ जाएंगी।

परिवार के अनुसार लक्ष्मीनाथ पहले झोटवाड़ा के संजय नगर स्थित मकान में अपने दोनों बेटों संजय और राहुल के साथ रहते थे। पत्नी की मृत्यु के बाद वह मकान बेच दिया गया। इसके बाद राहुल ने वर्ष 2021 में गोविंद वाटिका में मकान खरीदा था।

मकान की बनावट भी ऐसी थी कि परिवार के सदस्य अलग-अलग हिस्सों में रहते थे। ग्राउंड फ्लोर पर बेटियों के कमरे थे और हॉल में बुजुर्ग लक्ष्मीनाथ रहते थे। ऊपर की मंजिल पर राहुल और गीता रहते थे। राहुल का बड़ा भाई संजय अलग मकान में अपने परिवार के साथ रहने लगा था।

चाची और चचेरी बहनों की मौत ने सिमरन को तोड़ दिया
घटना की सूचना मिलते ही परिवार के लोग गोविंद वाटिका पहुंचने लगे। राहुल की भतीजी सिमरन जब मौके पर पहुंची तो घर के भीतर का मंजर देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिन चाची गीता और चचेरी बहनों के साथ वह हंसती-बोलती थी, वे अब इस दुनिया में नहीं थीं।

सिमरन ने अपने बुजुर्ग दादा लक्ष्मीनाथ को संभालने की कोशिश की, लेकिन खुद भी फूट-फूटकर रोती रही। कुछ देर बाद उसके पिता संजय और भाई भी मौके पर पहुंचे। चार मौतों की खबर सुनकर परिवार में कोहराम मच गया।

परिजनों की चीख-पुकार और घर के बाहर जुटती भीड़ के बीच हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा था—आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक पिता अपने ही बच्चों का हत्यारा बन गया?

मकान बेचने को लेकर था विवाद!

पुलिस की प्रारंभिक जांच में मकान को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि राहुल आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव में मकान बेचने की कोशिश कर रहा था। चूंकि मकान गीता के नाम था, इसलिए इसको लेकर दोनों के बीच मतभेद होने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि पुलिस अभी हत्या की अंतिम वजह को लेकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। आर्थिक परेशानी, कर्ज, शेयर बाजार में नुकसान और पारिवारिक विवाद—इन सभी पहलुओं को जोड़कर जांच की जा रही है।

कर्ज बढ़ता गया और टूटता गया परिवार

पुलिस सूत्रों के मुताबिक राहुल पर कई लोगों का पैसा बकाया था। शेयर बाजार में हुए नुकसान ने उसकी आर्थिक स्थिति को और खराब कर दिया था। वह लगातार पैसों की व्यवस्था करने में लगा हुआ था। लेकिन कर्ज और पारिवारिक तनाव ने उसकी मानसिक स्थिति पर कितना असर डाला, इसकी भी जांच की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर परिवार आर्थिक संकट में था तो क्या किसी को इसकी भनक नहीं लगी? पड़ोसी से पैसे मांगने तक की बात सामने आई, लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि घर के भीतर तनाव किस खतरनाक मोड़ तक पहुंच चुका है।

अब हर जवाब राहुल से मिलेगा

फिलहाल इस खौफनाक हत्याकांड की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी राहुल ही है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। उसके पकड़े जाने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि वारदात की पूरी योजना क्या थी, हत्या से पहले घर में क्या हुआ, मकान बेचने को लेकर कितना विवाद था और आखिर किस मानसिक स्थिति में उसने इतना बड़ा कदम उठाया।

एक ओर पुलिस घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, एफएसएल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कड़ियां जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार अपने चार सदस्यों को खोने के सदमे में है।

जिस घर में कभी बेटियों के भविष्य की बातें होती थीं, उसी घर में अब मातम पसरा है। आर्थिक तंगी और पारिवारिक कलह का यह खूनी अंत चार जिंदगियां निगल गया। पीछे रह गए हैं सवाल, सन्नाटा और उन सपनों की यादें, जिन्हें नंदिनी, राधिका और गिरिशा शायद अभी जीना शुरू ही कर रही थीं।


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