जयपुर फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद जमीन घोटाले का खुलासा, कय्यूम-याकूब की करोड़ों की संपत्तियां जांच के घेरे में

अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के बाद खुल रही हैं नई परतें

जयपुर। खोह नागोरियान क्षेत्र में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना के बाद जांच एजेंसियों को अब जमीन और संपत्तियों से जुड़े बड़े खेल के संकेत मिले हैं। हादसे में आठ लोगों की मौत के बाद पुलिस और प्रशासन ने जब आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों की पड़ताल शुरू की, तो कई संपत्तियों और जमीन सौदों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कय्यूम और याकूब की संपत्तियों की पड़ताल तेज

जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री संचालकों और उनसे जुड़े लोगों के पास जयपुर के विभिन्न क्षेत्रों में जमीन और गोदाम मौजूद हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों का अधिग्रहण किस प्रकार किया गया और क्या इनमें किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा शामिल है। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।

ब्लास्ट के बाद सामने आया अवैध नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि खोह नागोरियान और आसपास के इलाकों में लंबे समय से अवैध रूप से पटाखा निर्माण और बारूद भंडारण का नेटवर्क संचालित हो रहा था। हादसे के बाद पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी कर अवैध गोदामों और फैक्ट्रियों को सील किया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क और इससे जुड़े आर्थिक स्रोतों की कड़ियां जोड़ रही हैं।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अवैध गतिविधियां लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन संबंधित विभागों और स्थानीय पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

करोड़ों की जमीनों और लेनदेन की होगी जांच

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां अब आरोपियों से जुड़े भूमि सौदों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच करेंगी। यदि जांच में अवैध संपत्ति या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का मानना है कि फैक्ट्री विस्फोट की जांच केवल हादसे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे जुड़े पूरे आर्थिक नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

हादसे ने उठाए सुरक्षा और निगरानी पर सवाल

आठ लोगों की जान लेने वाले इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिहायशी इलाकों में अवैध और खतरनाक गतिविधियां किस प्रकार संचालित हो रही थीं। प्रशासन ने शहरभर में अवैध फैक्ट्रियों, गोदामों और विस्फोटक सामग्री के भंडारण के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

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