23 साल पुराने ज़मीन घोटाले का जयपुर ACB मुख्यालय से बड़ा खुलासा: पाकिस्तान गए शख्स की 140 बीघा ज़मीन हड़पने वाली सरपंच और साथी गिरफ्तार

Expose Now एक्सक्लूसिव:

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत जयपुर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) मुख्यालय ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। बीकानेर के पुगल क्षेत्र में दो दशक पहले अंजाम दिए गए एक सनसनीखेज ज़मीन घोटाले में एसीबी ने तत्कालीन सरपंच, वार्ड पंच और मुख्य लाभार्थी को गिरफ्तार किया है।

सत्ता और रसूख का ‘फर्जीवाड़ा’

राजधानी स्थित एसीबी मुख्यालय की निगरानी में हुई इस जांच में सामने आया कि मामला देश के बंटवारे के वक्त पाकिस्तान जा चुके रहीम बख्श की पैतृक संपत्ति से जुड़ा है। पुगल के नूरसर गांव में स्थित करीब 140 बीघा 15 बिस्वा ज़मीन पर भू-माफियाओं और जनप्रतिनिधियों की गिद्ध दृष्टि थी। राजस्व रिकॉर्ड में रहीम के पाकिस्तान जाने की स्पष्ट एंट्री होने के बावजूद, साल 2001 में इस बेशकीमती ज़मीन को खुर्द-बुर्द करने का खेल शुरू हुआ।

साजिश की परतें, मुर्दे का फर्जी वारिस

जांच में खुलासा हुआ कि तत्कालीन सरपंच केशर देवी, वार्ड पंच बागे खां और लाभार्थी बरकत अली ने मिलकर राजस्व अधिकारियों के साथ सांठगांठ की और रहीम बख्श का एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किया गया। इसके बाद जन्नत खातून नामक महिला को कागजों में रहीम की पोती बताकर उसे कानूनी वारिस घोषित कर दिया गया। इस पूरे खेल में पटवारी और तहसीलदार की मिलीभगत से महज़ कुछ ही समय में ज़मीन का म्यूटेशन (नामांतरण) फर्जी वारिस के नाम चढ़ा दिया गया।

जांच में क्यों लगे 23 साल?


जयपुर मुख्यालय के अनुसार, इस मामले की शिकायत 2003 में ही दर्ज कर ली गई थी। लेकिन रसूखदारों द्वारा कोर्ट से ‘स्टे’ लेने और सरकारी महकमों से अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) मिलने में हुई देरी के कारण आरोपी दो दशकों तक बचते रहे। इस दौरान मामले के 9 आरोपियों में से 3 की मृत्यु भी हो चुकी है।

अब तक की कार्रवाई


एसीबी ने अब कड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन सरपंच केशर देवी सहित तीन मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। ब्यूरो अब उन तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों (SDM और तहसीलदार) की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रहा है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर इस अवैध नामांतरण को मंज़ूरी दी थी।

Share This Article
Leave a Comment