जयपुर में 800 करोड़ का कथित महाघोटाला: सरकारी नाले और तालाब पर बसा दी सड़क, PMO ने मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

जयपुर। गुलाबी नगरी के जगतपुरा इलाके में करीब 800 करोड़ रुपये के एक महाघोटाले का मामला सामने आया है। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) पर आरोप है कि उसने राजस्व रिकॉर्ड में “गैर मुमकिन नाला” और “गैर मुमकिन तालाब” के रूप में दर्ज सरकारी भूमि पर न केवल सड़क निर्माण होने दिया, बल्कि रसूखदारों को पट्टे भी जारी कर दिए।

‘ExposeNow’ में इस खबर के प्रकाशित होने के बाद सामाजिक संस्था मिरर फाउंडेशन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

ज वि प्रा नक्शा जिसमें 60 फिट रोड पर पट्टे जारी कर दिए

PMO की सक्रियता के बावजूद लीपापोती का आरोप

मिरर फाउंडेशन की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राजस्थान के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि, मिरर फाउंडेशन के अध्यक्ष एच.एस. फौजदार का आरोप है कि नगरीय विकास विभाग ने तथ्यों को छिपाते हुए केवल औपचारिक जवाब देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया है। संस्था का दावा है कि उनके पास इस घोटाले से जुड़े पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं।

गैर मुमकिन नाला दर्शाया गया है

नाले की जमीन पर पट्टे और सड़क में हेरफेर

शिकायत के अनुसार, जगतपुरा के ग्राम महल स्थित खसरा नंबर 192/3.13 राजस्व रिकॉर्ड में “गैर मुमकिन नाला” दर्ज है।

  • नियमों का उल्लंघन: जविप्रा की ट्रस्टीशिप वाली इस सार्वजनिक भूमि पर नियम विरुद्ध पट्टे जारी किए गए।
  • नक्शे में बदलाव: मास्टर डेवलपमेंट प्लान (MDP-2025) में यहाँ 60 फीट की सेक्टर रोड स्वीकृत थी, लेकिन भू-माफिया को फायदा पहुँचाने के लिए इसे बदलकर प्राकृतिक नाले को ढकते हुए मात्र 30 फीट की सड़क बना दी गई।
तालाब के ऊपर से अवैध सड़क का निर्माण

तालाब और इकोलॉजिकल जोन पर संकट

घोटाले की जद में खसरा नंबर 202 भी है, जो “गैर मुमकिन तालाब” के रूप में दर्ज है।

  • अतिक्रमण: सेंट्रल स्पाइन योजना के जी-ब्लॉक में स्थित इस तालाब की करीब 5346 वर्गमीटर भूमि पर कब्जा कर सड़क निर्माण का कार्य जारी है।
  • पर्यावरण को खतरा: यह पूरा क्षेत्र इकोलॉजिकल जोन G-1 में आता है, जो नील गाय और अन्य पशु-पक्षियों का विचरण क्षेत्र है। यहाँ किसी भी प्रकार का निर्माण प्राकृतिक जल स्रोतों और पर्यावरण कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
खसरा 202 में गैर मुमकिन तलाई

मिरर फाउंडेशन की मांग

संस्था ने मांग की है कि इस 800 करोड़ के घोटाले की निष्पक्ष जांच हो, अवैध निर्माणों पर तुरंत रोक लगे और उन अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए जिन्होंने सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपने की अनुमति दी।

“हमने PMO में शिकायत की थी, लेकिन विभाग तथ्यों को छिपा रहा है। हमारे पास हर अवैध निर्माण और गलत पट्टे के सबूत हैं।”एच.एस. फौजदार, अध्यक्ष, मिरर फाउंडेशन जयपुर

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