वसीयत के नाम पर घूसखोरी: हनुमानगढ़ में पटवारी रंगे हाथों पकड़ा गया, 15 हजार की मांग पर 12 हजार में हुआ था सौदा

राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की हनुमानगढ़ इकाई ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत नोहर तहसील में बड़ी कार्रवाई की है। ब्यूरो की टीम ने शनिवार को जबरासर पटवार मंडल के पटवारी प्रदीप कुमार को 12,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

पूरा मामला: वसीयत के बदले मांगी घूस

परिवादी ज्ञानी सिंह ने ACB कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके दादा की वसीयत के आधार पर उसके पिता और चाचा के नाम जमीन का इंतकाल दर्ज करने के लिए पटवारी प्रदीप कुमार 15,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा है । शिकायत में बताया गया कि परिवादी के पिता और चाचा वृद्ध एवं अनपढ़ हैं, जिसका फायदा उठाकर पटवारी ने इस जायज काम के लिए घूस मांगी।

ACB का जाल और सत्यापन

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एसीबी) सुधा पालावत के निर्देशन में शिकायत का गोपनीय सत्यापन करवाया गया।

  • 7 अप्रैल 2026: सत्यापन के दौरान आरोपी पटवारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई।
  • 8 अप्रैल 2026: जाल बिछाया गया और परिवादी को पाउडर लगे नोट देकर पटवारी के पास भेजा गया।

खिलौने के डिब्बे से बरामद हुई रिश्वत की राशि

कार्रवाई के दौरान पटवारी प्रदीप कुमार परिवादी को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर बाजार ले गया और वहाँ 12,000 रुपये की रिश्वत लेकर अपने घर चला गया । जब ACB टीम ने पटवार घर में उसे दबोचा, तो उसने पहले पैसे लेने से इनकार कर दिया । गहन पूछताछ के बाद आरोपी ने बताया कि उसने पैसे अपने घर पर रखे हैं।

ACB टीम जब उसे लेकर उसके वार्ड नंबर 22 स्थित निवास पर पहुंची, तो उसके बेडरूम की अलमारी में रखे एक खिलौने (रिचार्जेबल फैन) के डिब्बे के अंदर से रिश्वत के 12,000 रुपये बरामद किए गए।

वैज्ञानिक साक्ष्य और कानूनी कार्रवाई

एसीबी टीम ने जब आरोपी के हाथों और उसकी पैंट की जेब का रासायनिक धोवन लिया, तो घोल का रंग गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण है । आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले की विस्तृत जांच अब पुलिस निरीक्षक राजेंद्र कुमार को सौंपी गई है।

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