बीकानेर: जिले में यह पहला मौका है जब पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सरकारी महकमे (राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल) ने सरकार के ही दूसरे उपक्रम (रीको लिमिटेड) के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है. करणी औद्योगिक क्षेत्र (विस्तार) में बिना वैध सम्मति (सीटीई/सीटीओ) और बिना सीईटीपी के अवैध रूप से हो रहे संचालन को लेकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड बीकानेर के क्षेत्रीय अधिकारी राजकुमार मीना ने विशिष्ट पीसीपीएनडीटी न्यायालय में रीको और उसके इकाई प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद शर्मा के खिलाफ परिवाद पेश कर दिया है.
रीको की लापरवाही के मुख्य बिंदु:
- 14 साल से बिना रिन्यूअल चल रहा क्षेत्र: रीको ने वर्ष 2012 में करणी औद्योगिक क्षेत्र (विस्तार) की स्थापना के लिए 17 जनवरी 2012 को स्थापना सम्मति (कंसेंट टू एस्टेब्लिश) प्राप्त की थी, जिसकी वैधता 30 दिसंबर 2014 को समाप्त हो गई थी, लेकिन इसके बाद आज तक रीको ने रिन्यूअल के लिए आवेदन ही नहीं किया.
- शर्तो और एनजीटी के आदेशों की अनदेखी: अप्रैल 2017 को एसईआईएए से मिली पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) में साफ शर्त थी कि औद्योगिक क्षेत्र चालू करने से पहले कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित करना, 33% ग्रीन कवर विकसित करना और सीजीडब्लूए से भू-जल दोहन की एनओसी लेना अनिवार्य होगा, लेकिन इनमें से एक भी शर्त पूरी नहीं की गई.
- एनजीटी के आदेश की भी अवहेलना: एनजीटी भोपाल की सेंट्रल बेंच ने 6 नवंबर 2025 को सख्त आदेश देते हुए रीको को 6 महीने में सीईटीपी चालू करने और पॉल्यूशन बोर्ड से सीटीओ लेने के निर्देश दिए थे, जो समयावधि भी बीत चुकी है.
- नाले का पानी खुले में फेंका: रीको ने 157 में से 148 प्लॉट 64 इकाइयों को आवंटित कर दिए, लेकिन वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट का कोई इंतजाम नहीं किया. औद्योगिक व घरेलू दूषित पानी खुले में जमा होकर बड़े गड्ढे बना रहा है.
- पर्यावरण बजट खर्च नहीं किया: रीको को प्रोजेक्ट चालू करने से पहले पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) के तहत 42.77 करोड़ रुपए खर्च करने थे, जिसे बिना खर्च किए ही औद्योगिक क्षेत्र को विकसित घोषित कर दिया गया.
कानूनी कार्रवाई और धाराएं
यह परिवाद जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 25 व 26 के उल्लंघन तथा संशोधित अधिनियम 2024 की धारा 45(ई) के तहत दायर किया गया है. पॉल्यूशन बोर्ड के मुख्यालय के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने 30 जून 2026 को रीको बीकानेर के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दाखिल करने की विधिवत मंजूरी दी थी. धारा 45(ई) के तहत उल्लंघन की स्थिति में रीको के जिम्मेदार अधिकारियों (इकाई प्रभारी) पर आपराधिक मामला और कारावास व जुर्माने की सजा का प्रावधान है.