भिवाड़ी। पुलिस जिला भिवाड़ी में अब उन लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं जो अपनी निजी रंजिश निकालने के लिए पुलिस का सहारा लेकर झूठे मुकदमे दर्ज करवाते हैं। एसपी बृजेश उपाध्याय (IPS) के निर्देश पर भिवाड़ी पुलिस ने झूठे मामलों को उजागर करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के तहत कई गंभीर आरोपों को पुलिस जांच में पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठा पाया गया है।
शादी का झांसा और मारपीट के दावे निकले झूठे
पुलिस की निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित जांच में यह खुलासा हुआ है कि शादी का झांसा देकर संबंध बनाने, मारपीट और लज्जा भंग जैसे गंभीर आरोपों वाले कई प्रकरण केवल पुलिस को गुमराह करने के लिए दर्ज कराए गए थे। अनुसंधान अधिकारियों ने न केवल इन मामलों को बंद किया, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 217/248 के तहत उन परिवादियों के खिलाफ न्यायालय में इस्तगासे भी पेश किए, जिन्होंने पुलिस को झूठी सूचना दी थी।
न्यायालय का कड़ा रुख, लगाया जुर्माना
न्यायालय ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के गहन विश्लेषण के बाद झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले परिवादियों को दोषी माना है। विभिन्न मामलों में दोषियों पर 1000 रुपये और 500-500 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। एसपी बृजेश उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआत है; कानून का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस की आमजन से अपील
भिवाड़ी पुलिस का मानना है कि झूठे मुकदमे न केवल पुलिस संसाधनों की भारी बर्बादी करते हैं, बल्कि इससे उन वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है जो वास्तव में अपराध का शिकार हुए हैं। एसपी ने आमजन से अपील की है कि वे केवल सत्य तथ्यों के आधार पर ही शिकायतें दर्ज कराएं। पुलिस का यह विशेष अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा, ताकि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।
