जैसलमेर डाइट में बड़ा ‘खेल’! नियम ताक पर रखकर फर्जीवाड़े की कोशिश? CDEO ने प्रधानाचार्य को थमाया नोटिस

By Admin

जैसलमेर: राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करने वाला एक बड़ा प्रशासनिक स्कैंडल सामने आया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने वाले और शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) जैसलमेर में नियमों को ताक पर रखकर कई गंभीर अनियमितताएं किए जाने के आरोप लगे हैं। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (CDEO) लालचंद नहलिया ने डाइट प्रधानाचार्य की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है और कई गंभीर बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।

जैसलमेर डाइट में बड़ा ‘खेल’!

छुट्टी पर होने के बावजूद ‘भौतिक’ उपस्थिति का बड़ा विवाद

जैसलमेर CDEO द्वारा जारी किए गए नोटिस में सबसे चौंकाने वाला खुलासा प्रधानाचार्य की उपस्थिति को लेकर हुआ है। विभागीय दस्तावेजों और आरोपों के अनुसार, डाइट प्रधानाचार्य जिस अवधि में ‘परिवर्तित अवकाश’ (Commuted Leave) पर थे और आधिकारिक रूप से मुख्यालय से बाहर थे, उसी दौरान उन्होंने शोध कार्यों के लिए भौतिक रूप से (Physical Signature) हस्ताक्षर कर अपनी ड्यूटी लगा दी थी। सवाल यह खड़ा हो गया है कि कोई अधिकारी भौतिक रूप से अनुपस्थित रहकर भी कागजों पर हस्ताक्षर कैसे कर सकता है? यह सीधे तौर पर फर्जीवाड़े और पद के दुरुपयोग की ओर इशारा कर रहा है।

समय यात्रा और बैकडेटेड एंट्री का सनसनीखेज मामला

जांच के घेरे में दूसरा बड़ा बिंदु बैकडेट में आदेश जारी करने और ट्रेनिंग दिखाने का है। ‘Expose Now’ की पड़ताल के अनुसार, कुल 34 कार्मिकों के ऑनलाइन आदेश जनवरी माह में जनरेट हुए थे। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इनमें से 3 शोधार्थियों की प्रशिक्षण अवधि को दिसंबर माह में दर्ज कर दिया गया है। शिक्षा जगत में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब आदेश ही जनवरी में जारी हुए, तो एक महीने पहले ट्रेनिंग कैसे शुरू हो गई? इसे ‘समय यात्रा’ (Time Travel) जैसा प्रशासनिक घालमेल माना जा रहा है।

अस्तित्वहीन प्रभाग में ड्यूटी और पद का दुरुपयोग

नियमों के उल्लंघन की कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। डाइट प्रशासन ने एक ऐसी शिक्षिका की ड्यूटी ‘हिंदुस्तान स्काउट एवं गाइड’ प्रभाग में लगा दी है, जिसका डाइट में कोई अस्तित्व ही नहीं होता है। डाइट में इस नाम का कोई भी विभाग (Department) नहीं होने के बावजूद वहां नियुक्ति देना नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। इसके अलावा, शोध कार्य में लगाए गए अन्य कुछ कार्मिकों की प्रशिक्षण पूर्व की अवधि में भी भारी हेरफेर और संदिग्ध प्रविष्टियां पाई गई हैं, जो किसी बड़े षड्यंत्र की ओर संकेत करती हैं।

CDEO की सख्ती और भविष्य की बड़ी कार्रवाई

मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी लालचंद नहलिया ने इन सभी बिंदुओं को प्रशासनिक कदाचार मानते हुए डाइट प्रधानाचार्य से तत्काल जवाब मांगा है। विभाग में यह चर्चा आम है कि अगर इन गंभीर सवालों के संतोषजनक और प्रमाणिक जवाब नहीं मिलते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ी गाज गिरनी तय है। स्थानीय लोग और विभाग के अन्य कर्मचारी अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यह केवल कागजी लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ा वित्तीय भ्रष्टाचार छिपा हुआ है? ‘Expose Now’ की टीम इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।

Share This Article
Leave a Comment