जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) में हुए एक बहुत बड़े टेंडर घोटाले का पर्दाफाश किया है । यह मामला करोड़ों रुपये की बंदरबांट और नियमों को ताक पर रखकर चहेती फर्मों को फायदा पहुँचाने से जुड़ा है, जहाँ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचाया गया । एसीबी ने इस मामले में जेवीवीएनएल के अधिकारियों और संबंधित फर्मों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और साजिश रचने की धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है ।
फर्जी प्रमाण पत्र और धरोहर राशि का खेल
एसीबी की जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 में टोंक और बूंदी जिले में विद्युत वितरण ढांचे से जुड़े कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे । इसमें भाग लेने वाली एक फर्म, मैसर्स एबी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने टेंडर पाने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र पेश किए थे । जब विभाग को इस धोखाधड़ी का पता चला, तो नियमानुसार फर्म की धरोहर राशि (EMD) जब्त की जानी चाहिए थी और उसे काली सूची में डाला जाना चाहिए था । लेकिन विभागीय कमेटी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए फर्म को उसकी धरोहर राशि वापस लौटा दी ।
अकेली फर्म और 237 करोड़ 27 लाख की अनियमितता
मामला यहीं नहीं रुका, जुलाई 2023 में राजस्थान के कई जिलों में 33/11 KV के जीएसएस (GSS) निर्माण के लिए टेंडर निकाले गए, जिनमें केवल एक ही फर्म, मैसर्स आरसी एंटरप्राइजेज ने भाग लिया । जांच में पाया गया कि इस फर्म को फायदा पहुँचाने के लिए अधिकारियों ने मिलीभगत की । जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के चलते कुल 237 करोड़ 27 लाख (237 Crore 27 Lakh) रुपये की अधिक राशि के कार्यादेश जारी कर दिए गए ।
एजी ऑडिट में खुलासा और कार्यादेश निरस्त
इस घोटाले की पुष्टि एजी ऑडिट (AG Audit) की रिपोर्ट में भी हुई है, जिसमें 226 करोड़ 91 लाख (226 Crore 91 Lakh) रुपये का अतिरिक्त व्यय होना पाया गया । मामले की गंभीरता को देखते हुए अप्रैल 2025 में सीएलपीसी (CLPC) की बैठक में फर्म द्वारा अपनाए गए भ्रष्ट आचरण और अधिकारियों के साथ मिलीभगत को जिम्मेदार माना गया । इसके बाद फर्म के कार्यादेश निरस्त कर दिए गए और उसे 3 साल के लिए किसी भी सरकारी खरीद प्रक्रिया में भाग लेने से डिबार (काली सूची में डालना) कर दिया गया ।
अधिकारियों पर गिरा गाज
एसीबी ने इस भ्रष्टाचार और साजिश में शामिल रामनिवास कुमावत, अनिल गुप्ता और अन्य संबंधित अधिकारियों व फर्मों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है । ब्यूरो अब इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि इस करोड़ों के लेनदेन में किन-किन उच्च पदों पर बैठे लोगों के हाथ काले हुए हैं ।
