सीकर | राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में हुए करोड़ों रुपये के भारी फर्जीवाड़े में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की गहराई से की गई पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि सीकर के तीन सरकारी डॉक्टरों ने महज 22 महीने के भीतर बिना मरीजों को देखे 4000 से ज्यादा एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन की पर्चियां काट दीं। इस महाघोटाले की तह तक जाने के लिए अब एसओजी ने जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से आधिकारिक रूप से मदद मांगी है।
22 महीने में 5700 से ज्यादा फर्जी जांचें
एसओजी की जांच के अनुसार, सीकर के कल्याण (एसके) अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल, फिजिशियन डॉ. गजराज सिंह और खिरवा सीएचसी के डॉ. राकेश चौधरी इस पूरे फर्जीवाड़े के मुख्य सूत्रधार हैं। इन तीन डॉक्टरों ने मिलकर 4000 से अधिक मरीजों के नाम पर महंगी जांचें लिख दीं। अगर इसमें जांच के घेरे में आए अन्य डॉक्टरों का भी आंकड़ा मिला लिया जाए, तो यह संख्या 5700 के पार पहुंच जाती है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि निजी क्लीनिकों में भर्ती मरीजों की जांचें क्लीनिक के डॉक्टर की पर्ची पर न होकर इन आरोपी सरकारी डॉक्टरों की पर्ची पर होती थीं, ताकि आरजीएचएस के तहत डायग्नोस्टिक सेंटर से मोटा क्लेम और कमीशन उठाया जा सके। एसओजी ने पिछले माह ही इन डॉक्टरों सहित कुल पांच चिकित्सकों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
करोड़ों के क्लेम और डायग्नोस्टिक सेंटर की भूमिका
इस सुनियोजित फर्जीवाड़े में डॉ. विजय एंड बी लाल डायग्नोस्टिक सेंटर की भूमिका पर भी एसओजी ने अपना शिकंजा कसा है। जब्त किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, अकेले डॉ. केके अग्रवाल ने 1 मई 2023 से 30 अप्रैल 2025 के बीच 1644 मरीजों को एमआरआई और सीटी स्कैन लिखे, जिसके एवज में डायग्नोस्टिक सेंटर को सरकार की तरफ से 1.30 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान हुआ। वहीं, डॉ. राकेश चौधरी ने 1209 मरीजों की फर्जी जांच पर्ची से 66 लाख रुपये के बिल उठाए और डॉ. गजराज ने भी एक हजार से ज्यादा एमआरआई जांचें करवाईं।
बिना डॉक्टर को दिखाए बन गए 18 हजार के बिल
एसओजी ने मरीजों के जो पुख्ता उदाहरण जुटाए हैं, वे इस संगठित लूट की पूरी कहानी बयां करते हैं। चेजारों का मोहल्ला निवासी सोनकी देवी 8 दिसंबर 2023 को बेहोश हुई थीं और परिजन उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल ले गए। लेकिन हैरत की बात यह रही कि उनकी रीढ़ की हड्डी, सिर, पीठ और कमर की एमआरआई का 18,225 रुपये का बिल डॉ. केके अग्रवाल की पर्ची पर सबमिट किया गया, जबकि हकीकत में मरीज ने कभी डॉ. अग्रवाल से कोई परामर्श ही नहीं लिया था। इसी तरह खंडेला की मूली देवी के नाम पर भी इसी डायग्नोस्टिक सेंटर से 18,225 रुपये का फर्जी बिल उठाया गया, जबकि उन्होंने भी डॉ. अग्रवाल से कोई चेकअप नहीं कराया था।
एसओजी की कार्रवाई और एसएमएस के विशेषज्ञों की भूमिका
एसओजी के एसपी लोकेन्द्र सिंह दादरवाल ने स्पष्ट किया है कि फर्जीवाड़े से जुड़े तमाम पुख्ता दस्तावेज और सबूत एकत्र कर लिए गए हैं। आरोपी डॉक्टरों द्वारा लिखी गई पर्चियों की हैंडराइटिंग का मिलान भी किया जा चुका है। अब एसओजी ने पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर एसएमएस अस्पताल के मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स और सर्जरी विभाग के सीनियर प्रोफेसरों की टीम मांगी है। यह विशेषज्ञ टीम यह तय करेगी कि जिन मरीजों के नाम पर आरजीएचएस से क्लेम उठाए गए, क्या उनकी बीमारी के हिसाब से उन्हें वास्तव में इन महंगी जांचों (एमआरआई और सीटी स्कैन) की कोई चिकित्सीय आवश्यकता थी भी या नहीं।
