भीलवाड़ा जिले की अंटाली तहसील में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़े घूसकांड का पर्दाफाश किया। एक कृषि फर्म की लीज डीड (पंजीयन) करवाने के नाम पर ई-मित्र संचालक के मार्फत 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस पूरे खेल में अंटाली के तहसीलदार और पंजीयन शाखा के वरिष्ठ सहायक (बाबू) की भी सीधी संलिप्तता सामने आई। एसीबी टीम ने ई-मित्र संचालक सहित तहसीलदार और बाबू को भी गिरफ्तार कर लिया।
पपीतावाला एग्रो और 87 हजार की डिमांड
नागौर निवासी परिवादी कमलेश ने अपनी ‘पपीतावाला एग्रो एलएलपी’ फर्म के लिए अंटाली के जवानपुरा में 2.04 हैक्टेयर जमीन लीज पर ली थी। इस जमीन के पंजीयन के लिए जब परिवादी अंटाली तहसील पहुंचा, तो वहां पंजीयन बाबू हनुमान सहाय मीना ने उसे बाहर ई-मित्र संचालक हेमराज खटीक के पास भेज दिया। ई-मित्र संचालक ने तहसीलदार गणेश कच्छावा के नाम पर 40 हजार रुपये और एक एयर कंडीशनर (एसी), तथा बाबू के लिए 10 हजार रुपये सहित भारी-भरकम रिश्वत की मांग रख दी। काफी मिन्नतों के बाद सौदा 75 हजार रुपये के आस-पास तय हुआ, जिसमें से 15 हजार रुपये परिवादी ने ई-मित्र संचालक को ‘फोन-पे’ के माध्यम से अग्रिम चुका दिए।
दराज से निकली 60 हजार की गड्डी
परिवादी की शिकायत पर अजमेर एसीबी इंटेलिजेंस ने 12 मार्च 2026 को ट्रैप की योजना बनाई। परिवादी 60 हजार रुपये लेकर अंटाली स्थित साहू कंप्यूटर्स (ई-मित्र) पर पहुंचा। ई-मित्र संचालक हेमराज खटीक ने रिश्वत की यह रकम लेकर अपनी टेबल की बीच वाली दराज में रख ली। परिवादी का इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने दुकान में दबिश दी और हेमराज खटीक को धर दबोचा। हाथ धुलाई के दौरान पानी का रंग गुलाबी हो गया और दराज से 60 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद कर ली गई।
फोन कॉल से फंसा तहसीलदार और बाबू
ट्रैप के तुरंत बाद एसीबी ने ई-मित्र संचालक के फोन से तहसीलदार गणेश कच्छावा और बाबू हनुमान मीना को कॉल करवाया। ऑपरेटर ने तहसीलदार को बताया कि ‘पेमेंट आ गया है’, जिस पर तहसीलदार ने उसे घूमते हुए अपने पास आने की सहमति दे दी। इसी तरह बाबू ने भी फोन पर लीज डीड साइन होने और पेमेंट आने की पुष्टि की। इन अकाट्य सबूतों के आधार पर एसीबी ने बिना देर किए अंटाली तहसील कार्यालय में दबिश देकर तहसीलदार गणेश कच्छावा और वरिष्ठ सहायक हनुमान सहाय मीना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया। मामले की अग्रिम जांच एसीबी भीलवाड़ा-द्वितीय के उप अधीक्षक पुलिस नरपत सिंह को सौंपी गई।
