भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) उदयपुर ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पुलिस उप अधीक्षक (वृत्त नगर पूर्व) कार्यालय की स्पेशल टीम के भ्रष्ट कारनामों का भंडाफोड़ किया । टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने एक गैराज संचालक को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर मंथली (मासिक रिश्वत) वसूलने का दबाव बनाया । एसीबी ने 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए कांस्टेबल नागेन्द्र सिंह राणावत को गिरफ्तार कर लिया । इस मामले में एक एएसआई, एक हेड कांस्टेबल और एक अन्य कांस्टेबल फरार हो गए ।
सादी वर्दी, सरकारी गाड़ी और खौफ
एकलिंगपुरा मेन रोड पर आर.के. कार केयर नाम से गैराज चलाने वाले महेन्द्र डांगी ने 27 फरवरी 2026 को एसीबी में शिकायत दी । परिवादी ने बताया कि 22 फरवरी 2026 को सादी वर्दी में तीन-चार पुलिसकर्मी एक सरकारी बोलेरो गाड़ी से उसके गैराज पर पहुंचे । उन्होंने चोरी की गाड़ियां काटने और गैराज में नाबालिगों से काम करवाने का आरोप लगाकर उसे बुरी तरह डराया । पुलिसकर्मियों ने गैराज सीज करने की धमकी दी और बचाव के लिए 50 हजार रुपये मंथली की मांग रखी, जो बाद में 20 हजार रुपये पर तय हुई ।
मोबाइल की दुकान पर बिछा जाल
एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद 11 मार्च 2026 को ट्रैप की योजना बनाई । आरोपी कांस्टेबल नागेन्द्र सिंह ने परिवादी को रिश्वत की रकम लेकर परशुराम चौराहे के पास स्थित सिया मोबाइल की दुकान पर बुलाया । आरोपी कांस्टेबल ने परिवादी से यह रकम सीधे अपने हाथ में न लेकर दुकान के अंदर बने केबिन की टेबल पर रखवा दी ।
दुकानदार की जेब से निकली रकम
परिवादी का इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने मौके पर दबिश दी । केबिन की टेबल पर रकम नहीं मिलने पर दुकान संचालक प्रफुल मेनारिया से पूछताछ हुई । दुकानदार ने बताया कि नागेन्द्र सिंह एक टैबलेट खरीदना चाहता था और उसी ने यह 20 हजार रुपये टेबल से उठाने को कहा । दुकानदार की पैंट की पिछली जेब से एसीबी ने रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली । एसीबी ने कांस्टेबल नागेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया, जबकि स्पेशल टीम के अन्य सदस्य एएसआई शक्ति सिंह, हेड कांस्टेबल अर्जुन सिंह और कांस्टेबल अनिल मीणा मौके से फरार हो गए, जिनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही थी ।
