राजस्थान के सिरोही जिले में भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसकी पटकथा किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। एक गरीब मजदूर को प्रशासनिक जाल में फंसाकर 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगना, जांच एजेंसी को चकमा देने के लिए रिश्वत की रकम बेटे को थमाना, और फिर पकड़े जाने के डर से पैसों को निर्माणाधीन प्लॉट की मिट्टी में गाड़ देना—यह सब कुछ सिरोही के अनादरा ग्राम पंचायत में हुआ ।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) राजस्थान ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अनादरा ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी (VDO) लक्ष्मीलाल और उनके 31 वर्षीय बेटे अखिलेश कुमार को 1,00,000 रुपये की रिश्वत के मामले में रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है ।
मजदूर की मजबूरी और प्रशासनिक ब्लैकमेलिंग
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत आमला खेड़ा के निवासी लखमा राम से हुई। लखमा राम एक गरीब खेतिहर मजदूर है। उसने अपनी पत्नी के नाम से खरीदे गए भूखंडों पर चारदीवारी और शौचालय बनाने के लिए पंचायत से NOC मांगा था । VDO लक्ष्मीलाल ने काम करने के बजाय लखमा राम को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और आरोप लगाया कि नींव खोदते समय पंचायत की सीसी (CC) सड़क टूट गई है । मुकदमा दर्ज न करने और NOC जारी करने के एवज में सीधे 1 लाख रुपये की भारी-भरकम घूस मांगी गई।
ACB का मास्टरस्ट्रोक: ‘डमी करेंसी’ से बिछाया जाल
एक गरीब मजदूर 1 लाख रुपये नकद कैसे लाता? शिकायतकर्ता लखमा राम ने बमुश्किल 10,000 रुपये (500-500 के 20 असली नोट) का जुगाड़ किया । बाकी के 90,000 रुपये के लिए ACB ने 500-500 के 180 ‘डमी नोट’ (मनोरंजन वाले नोट) मिला दिए । सभी 200 नोटों पर विशेष रासायनिक पाउडर (फिनोफ्थेलिन) लगाया गया और ट्रैप की योजना बनाई गई।
क्लाइमेक्स: 4 मार्च की वह शाम और एक ‘फिल्मी’ चेज़
4 मार्च 2026 की शाम 5:35 बजे, VDO ने लखमा राम को अनादरा में बुलाया। जैसे ही लखमा राम ने रिश्वत की प्लास्टिक की थैली लक्ष्मीलाल को दी, शातिर VDO ने वह थैली अपने पास नहीं रखी। उसने वहां पहले से मौजूद अपने बेटे अखिलेश कुमार को वह थैली थमाई और तुरंत वहां से भगा दिया । ACB टीम ने लक्ष्मीलाल को मौके पर दबोच लिया, लेकिन उसने साफ मुकरते हुए कहा कि उसने कोई पैसे नहीं लिए हैं।
गड्ढे में दबा भ्रष्टाचार और मटमैले पानी की गवाही
ACB टीम ने बिना वक्त गंवाए लक्ष्मीलाल के बेटे अखिलेश का पीछा किया। कड़ाई से पूछताछ करने पर अखिलेश टूट गया और उसने कबूला कि पीछे आ रही गाड़ियों से डरकर उसने थैली से पैसे निकाले, गिने और पास ही एक निर्माणाधीन प्लॉट में गड्ढा खोदकर थैली को मिट्टी में गाड़ दिया है ।
ACB टीम उसे लेकर मौके पर पहुंची। अखिलेश ने खुद मिट्टी हटाई और सफेद प्लास्टिक की थैली निकाली, जिसमें 1 लाख रुपये जस के तस पड़े थे । जब फोरेंसिक जांच के लिए अखिलेश के हाथ सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाए गए, तो उसका दाहिना हाथ गुलाबी और बायां हाथ मटमैला (जिससे उसने मिट्टी खोदी थी) हो गया ।
बाप-बेटे दोनों सलाखों के पीछे
ACB ने इसे सिर्फ घूसखोरी का मामला नहीं माना, बल्कि नए कानून ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS), 2023 की धारा 61(2)(a) के तहत इसे एक आपराधिक षड्यंत्र करार दिया है । भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और BNS के तहत पिता लक्ष्मीलाल और पुत्र अखिलेश, दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है ।
