बड़ा खुलासा: एसपी अमित तोलानी के ‘फिल्मी एनकाउंटर’ की खुली पोल! कुख्यात तस्कर बाबू सिंधी का ऑडियो वायरल, सरेंडर की ‘सेटिंग’ का शक

नीमच, मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और तत्कालीन नीमच एसपी अमित कुमार तोलानी (जो वर्तमान में राजगढ़ एसपी हैं) के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फरवरी 2024 के चर्चित ‘बाबू सिंधी गिरफ्तारी कांड’ को लेकर एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस रिकॉर्डिंग ने पुलिस की उस ‘फिल्मी कहानी’ को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिसमें तस्कर को जंगलों से खदेड़कर पकड़ने का दावा किया गया था।

क्या है वायरल ऑडियो में?

वायरल ऑडियो में कुख्यात तस्कर बाबू उर्फ जयकुमार सिंधी अपने मित्र सुनील टोपी से बातचीत करता सुनाई दे रहा है। रिकॉर्डिंग में बाबू सिंधी स्पष्ट कह रहा है कि— “एसपी साहब से बातचीत हो गई है, मैं सरेंडर कर देता हूं, बदले में पुलिस मेरी पत्नी और बच्चों को छोड़ देगी।” यह बातचीत उस समय की है जब बाबू सिंधी फरार चल रहा था। यह ऑडियो संकेत दे रहा है कि जिसे पुलिस ने ‘बहादुरी से पकड़ा’ बताया था, वह दरअसल एक सोची-समझी ‘डील’ का हिस्सा हो सकता है।

पुलिस की ‘फिल्मी कहानी’ बनाम हकीकत

8 फरवरी 2024 को तत्कालीन एसपी अमित तोलानी ने दावा किया था कि पुलिस टीम ने बाबू सिंधी को चीताखेड़ा के जंगलों में घेराबंदी कर पकड़ा। पुलिस के अनुसार, बाबू सिंधी पहाड़ी से कूदकर भागने की कोशिश कर रहा था, जिससे उसके पैर में चोट आई और उसे जिला अस्पताल ले जाया गया।

लेकिन अब वायरल ऑडियो इस पूरी कहानी पर संदेह पैदा कर रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि:

  1. अगर पुलिस ने उसे जंगलों से पकड़ा, तो ऑडियो में ‘एसपी से सेटिंग’ और ‘सरेंडर’ की बात क्यों हो रही है?
  2. क्या बाबू सिंधी के पैर में लगी चोट वास्तव में भागने से लगी थी या कहानी का हिस्सा थी?

सुनील टोपी को क्यों बचाया गया?

रिपोर्ट के अनुसार, जिस सुनील टोपी से बाबू सिंधी फरार रहते हुए लगातार संपर्क में था और जो अब भी जेल में उससे मिल रहा है, उसे पुलिस ने आरोपी क्यों नहीं बनाया? चर्चा है कि अशोक अरोरा गंगानगर गोलीकांड मामले में पुलिस ने मोटी लेन-देन कर कई प्रभावशाली लोगों को बचा लिया।

कॉल डिटेल जांचने की मांग

अब इस मामले में नए सिरे से जांच की मांग उठ रही है। मांग की जा रही है कि:

  • 4 फरवरी से 8 फरवरी 2024 के बीच तत्कालीन एसपी अमित तोलानी की कॉल डिटेल निकाली जाए।
  • बाबू सिंधी द्वारा उपयोग की गई फर्जी सिम और पुलिसकर्मियों के बीच हुई बातचीत की जांच हो।

अगर उच्च स्तरीय जांच होती है, तो नीमच के इस बहुचर्चित गोलीकांड और गिरफ्तारी के पीछे के “तगड़े खेल” की पोल खुलना तय है।

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