जयपुर, राजस्थान की राजधानी जयपुर आज भारतीय सेना के अदम्य साहस और आधुनिक सैन्य शक्ति का साक्षी बनी। जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित 78वें सेना दिवस परेड की दूसरी फुल ड्रेस रिहर्सल में जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों पर पहली बार सैन्य छावनी से बाहर आयोजित हो रहे इस भव्य समारोह ने जयपुर को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दी है।
प्रमुख आकर्षण और सामरिक प्रदर्शन
रिहर्सल के दौरान भारतीय सेना ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की शक्ति का प्रदर्शन किया। आसमान में जहाँ अपाचे और प्रचंड हेलिकॉप्टरों की गूंज सुनाई दी, वहीं ज़मीन पर स्वदेशी टैंकों और मिसाइल प्रणालियों ने अपनी ताकत दिखाई।
- ऑपरेशन सिंदूर की झांकी: ब्रह्मोस मिसाइल और उच्च तकनीक वाले रोबोटिक डॉग्स ने आधुनिक युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया।
- हथियार प्रणाली: हेलिकॉप्टर से संचालित होने वाली ‘हेलिना’ एंटी-टैंक मिसाइल और 155 राउंड फायर करने वाले एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम का जीवंत अभ्यास हुआ।
- ड्रोन शक्ति: 4000 मीटर की ऊँचाई तक उड़ान भरने वाले अत्याधुनिक ड्रोन्स ने भविष्य के युद्ध की दिशा को रेखांकित किया।
भैरव बटालियन का पदार्पण
परेड का मुख्य आकर्षण जनवरी 2026 में गठित ‘भैरव बटालियन’ रही। यह एक नई स्पेशल फोर्स है जिसे हाइब्रिड और ड्रोन-आधारित ऑपरेशंस के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें 1 लाख से अधिक प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर शामिल हैं, जो देश की सामरिक क्षमताओं में एक क्रांतिकारी बदलाव है।
स्वदेशी नस्लों का दम
सेना की कार्यक्षमता में पशुओं के योगदान को दर्शाते हुए मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पिपराई, और राजपालयम जैसी स्वदेशी डॉग ब्रीड्स ने अपना हुनर दिखाया। विशेष रूप से चश्मा पहने ‘मुधोल हाउंड’ की आक्रामकता और फुर्ती ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
साहसिक करतब
मोटर साइकिल सवार जांबाजों ने एक टायर पर सवारी, पिरामिड निर्माण और राष्ट्रीय प्रतीकों (अशोक स्तंभ व कमल) की आकृतियां बनाकर दर्शकों में देशभक्ति का जोश भर दिया।
“मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार यह आयोजन जनभागीदारी और राष्ट्रभक्ति का सशक्त प्रतीक है। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और दिव्यांगों के लिए विशेष प्रबंध सुनिश्चित किए हैं।”
