जयपुर: राजस्थान के उदयपुर से जुड़े चर्चित दो करोड़ रुपए के रिश्वत प्रकरण में राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए एसओजी (SOG) के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी को निलंबित कर दिया है। यह निलंबन भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। बता दें कि एएसपी मुकेश सोनी पर उदयपुर के 272 भूखंडों से जुड़े भूमि घोटाले के आरोपियों को राहत देने के एवज में दो करोड़ रुपए की भारी-भरकम रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है।
क्या है पूरा मामला?
एसीबी (ACB) ने 26 सितंबर को इस मामले में कथित बिचौलिये सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को दो करोड़ रुपए लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके अगले ही दिन, यानी 27 सितंबर को एसीबी ने एएसपी मुकेश सोनी को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया था।

जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
- तीन बार बदला मिलने का समय: एसीबी की जांच में सामने आया कि 23 सितंबर को रानी रोड पर मुलाकात के लिए एएसपी मुकेश सोनी ने तीन बार समय बदला था (पहले सुबह 10 बजे, फिर दोपहर 1 बजे और अंत में शाम 5 बजे)। तय समय के डेढ़ घंटे बाद वह शाम 6:30 बजे पहुंचे थे।
- मोबाइल पर लिखकर की थी बात: महाकालेश्वर मंदिर के पास कार में हुई मुलाकात के दौरान सोनी ने रिश्वत की रकम को लेकर खुलकर बोलने के बजाय अपने मोबाइल की स्क्रीन पर टाइप कर बातचीत की थी। उन्होंने स्क्रीन पर लिखा था— “सज्जन जो कहे, वो कर लेना और इसके बाद 30 तक चार्जशीट पेश करूंगा।”
- डिजिटल सत्यापन: शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने तीन दिनों तक डिजिटल रिकॉर्डिंग के जरिए रिश्वत की मांग का सफलतापूर्वक सत्यापन किया था, जिसमें दो करोड़ रुपए मांगे जाने की पुष्टि हुई थी।
41 भूखंडों की फाइलें और अन्य खुलासे

छापेमारी और जांच के दौरान एसीबी को मुकेश सोनी के कार्यालय से नगर निगम से संबंधित 41 भूखंडों की संदिग्ध फाइलें भी बरामद हुईं। इन फाइलों में कई दस्तावेजों पर यूडीए (UDA) की सील और हस्ताक्षर मिले हैं। एसीबी अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि ये दस्तावेज वास्तविक थे या फिर फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे, क्योंकि कुछ मामलों में मूल फाइलों के नंबर बदले जाने की बात भी सामने आई है।
मूल मामला वर्ष 2022 का है, जो उदयपुर के 272 प्लॉटों से जुड़ा है। इसमें फर्जी दस्तावेज तैयार कर नामांतरण कराने और भूखंड बेचने का आरोप है। इसी मामले में एफआर (Final Report) लगाने और जब्त सामान वापस दिलाने के नाम पर दो करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई थी।