जयपुर। जयपुर में एक बड़े इंटरनेशनल साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। यह गिरोह राजधानी के बिंदायका थाना क्षेत्र में एक प्लॉट के भीतर फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो खुद को ‘एप्पल कस्टमर केयर’ या ‘टेक्निकल सपोर्ट’ कर्मचारी बताकर मुख्य रूप से अमेरिका (USA) और कनाडा के नागरिकों को ठगी का शिकार बनाते थे।
एप्पल कस्टमर सपोर्ट के नाम पर ऐसे बिछाते थे जाल यह साइबर गैंग बेहद शातिराना तरीके से विदेशियों को फंसाता था। आरोपी इंटरनेट आधारित तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों को एप्पल प्रोडक्ट्स या सेवाओं से जुड़े फर्जी मैसेज और SMS भेजते थे।
इन संदेशों में ग्राहकों को डराया जाता था कि उनके नाम पर 399, 499 या 699 अमेरिकी डॉलर (US Dollars) का कोई शुल्क स्वीकृत या प्रोसेस हो गया है। जब विदेशी नागरिक घबराकर दिए गए नंबरों पर संपर्क करते, तो ये जालसाज एप्पल कस्टमर सपोर्ट या टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बनकर उनसे बात करते और तकनीकी सहायता के बहाने उन्हें अपने ठगी के जाल में फंसा लेते थे।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई और बरामदगी पुलिस मुख्यालय की साइबर अपराध रोकथाम मुहिम के तहत जयपुर कमिश्नरेट के निर्देश पर साइबर क्राइम यूनिट (पुलिस मुख्यालय राजस्थान) और जयपुर पश्चिम पुलिस की संयुक्त टीम ने इस कॉल सेंटर पर छापा मारा। मौके से पुलिस ने भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- 13 लैपटॉप
- 24 मोबाइल फोन
- कई इंटरनेट राउटर, सिम कार्ड्स, चार्जर और एक्सटेंशन बोर्ड
गिरफ्तार किए गए 14 आरोपी पुलिस ने मौके से जिन 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनके खिलाफ बिंदायका थाने में भारतीय न्याय संहिता, आईटी एक्ट और टेलीकॉम एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण संख्या 237/2026 दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम हैं:

- गोविल निकुंज, वाहिद, रहीस, इरशाद, मोहम्मद इमरान हुसैन चौधरी, सोरम शर्मा, निशिश, मानस खटनीवार, अक्षय नारायण भाई पटेल, श्रेय भारद्वाज, गगन पाल, रिजम राजपूत, देव दलाल और दर्पण।
पुलिस अब जब्त किए गए लैपटॉप और मोबाइल्स की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कर रही है। कॉलिंग डेटा, चैट हिस्ट्री, विदेशी नंबरों से संपर्क और बैंकिंग लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच दल इस बात का भी पता लगा रहा है कि इस फर्जी कॉल सेंटर के तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट से तो नहीं जुड़े हैं और अब तक कितने विदेशी नागरिकों से कितने डॉलर की ठगी की जा चुकी है।