आखिर संयम लोढ़ा ही क्यों? लॉरेंस गैंग के टारगेट की गुत्थी में 3 बड़े एंगल, नेपाल से राजस्थान तक साजिश के तार

जयपुर। राजस्थान की सियासत से जुड़े एक बड़े चेहरे को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने की साजिश ने गैंगस्टर नेटवर्क की उस कड़ी को सामने ला दिया है, जो विदेश से शुरू होकर नेपाल के रास्ते राजस्थान तक पहुंचती दिखाई दे रही है। पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा को निशाना बनाए जाने की कथित साजिश में राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स और जोधपुर पुलिस ने दो कथित शूटर जसकरण सिंह और राजिंदर उर्फ बिल्ला को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच के मुताबिक दोनों आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड है और वे पंजाब में हत्या के मामलों में वांछित बताए गए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों नेपाल से राजस्थान पहुंचे थे और सिरोही में लोढ़ा के फार्महाउस के आसपास कई दिनों तक रेकी की गई। आरोपियों के मोबाइल फोन से कथित तौर पर संयम लोढ़ा की तस्वीरें मिलने की बात भी सामने आई है।

अब जांच सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि वारदात कौन करने वाला था। असली सवाल यह है कि टारगेट कौन तय कर रहा था, आदेश कहां से आया और राजस्थान में इस साजिश के लिए जमीन पर नेटवर्क किसने तैयार किया?

पहला सवाल—संयम लोढ़ा ही क्यों?

क्या संयम लोढ़ा को सिर्फ व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण टारगेट किया गया, या फिर उनके राजनीतिक प्रभाव, कारोबारी गतिविधियों और स्थानीय नेटवर्क की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया? जांच एजेंसियां इस सवाल का जवाब तलाश रही हैं। फिलहाल किसी एक मकसद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तीन प्रमुख एंगल पर पड़ताल की जा रही है।

पहला एंगल—पुरानी रंजिश और स्थानीय विवाद

पूछताछ में सामने आए कथित बयानों के आधार पर जांच अधिकारी पुराने व्यक्तिगत और स्थानीय विवादों की कड़ियां जोड़ रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं किसी व्यक्ति या विरोधी पक्ष ने अपने विवाद को निपटाने के लिए गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल तो नहीं किया। यानी जांच का एक सिरा यह तलाश रहा है कि गैंग ने खुद टारगेट चुना या किसी ने गैंग तक पहुंचकर टारगेट उपलब्ध कराया।

दूसरा एंगल—रंगदारी, कारोबार और वर्चस्व

दूसरा एंगल कथित रंगदारी और कारोबारी विवाद से जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि सिरोही में राजनीतिक और कारोबारी प्रभाव रखने वाले किसी व्यक्ति को कथित तौर पर डराने या दबाव बनाने की कोशिश के पीछे आर्थिक मकसद तो नहीं था। अगर जांच में इस एंगल की पुष्टि होती है तो मामला सिर्फ हत्या की साजिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्थान में संगठित अपराध के रंगदारी नेटवर्क की एक बड़ी कड़ी सामने आ सकती है।

तीसरा एंगल—राजस्थान में नेटवर्क का दबदबा

तीसरा और सबसे बड़ा जांच एंगल गैंग के राजस्थान में नेटवर्क से जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या किसी बड़े सार्वजनिक चेहरे को टारगेट करके गैंग राजस्थान में अपना प्रभाव और भय कायम करना चाहता था। हालांकि यह फिलहाल जांच का एंगल है।

नेपाल से सिरोही तक—दो शूटरों का पूरा सफर जांच के घेरे में

गिरफ्तार किए गए कथित शूटर जसकरण सिंह और राजिंदर उर्फ बिल्ला अब जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। पुलिस के अनुसार दोनों पंजाब के आपराधिक मामलों में वांछित थे। नेपाल से राजस्थान आने के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर संपर्क बनाए और सिरोही पहुंचकर कथित तौर पर लोढ़ा की गतिविधियों की रेकी शुरू की। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने स्थानीय स्तर पर एक मोटरसाइकिल की व्यवस्था की थी। इसके बाद फार्महाउस के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी गई। मोबाइल में टारगेट की तस्वीरें और मौके की रेकी—इन दोनों कड़ियों को पुलिस बेहद अहम साक्ष्य के तौर पर देख रही है।

पहाड़ी से फार्महाउस पर नजर, लेकिन भीड़ ने बिगाड़ दिया प्लान?

जांच के मुताबिक कथित शूटरों ने फार्महाउस के आसपास ऐसी जगह से निगरानी की, जहां से आने-जाने वालों पर नजर रखी जा सके। लेकिन चुनावी गतिविधियों के चलते फार्महाउस पर समर्थकों और लोगों की आवाजाही बढ़ गई। कथित तौर पर इसी वजह से शूटरों को मौका नहीं मिला और वारदात को अंजाम देने की योजना बदलनी पड़ी। यही वह समय था जब पुलिस और एजीटीएफ की कार्रवाई ने कथित साजिश को वारदात में बदलने से पहले ही रोक दिया।

झाड़ियों में छिपे थे विदेशी हथियार

जांच की अगली कड़ी हथियारों तक पहुंची। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पाली-सिरोही हाईवे के पास झाड़ियों से विदेशी निर्मित पिस्टल और कारतूस बरामद किए। बरामद हथियारों में तुर्की निर्मित जिगाना 9 एमएम और ऑस्ट्रिया निर्मित ग्लॉक पिस्टल तथा बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस शामिल बताए गए हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि हथियार राजस्थान तक किस रास्ते पहुंचे और इन्हें उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क कौन था।

विदेश में बैठे कथित संचालक, जमीन पर स्थानीय मददगार

मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी विदेश में बैठे कथित गैंग नेटवर्क और राजस्थान में मौजूद स्थानीय मददगारों के बीच का संपर्क है। पुलिस जांच में कथित तौर पर आर्जू बिश्नोई और सुमित सन्नी के नाम सामने आए हैं। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों की भूमिका क्या थी और गिरफ्तार शूटरों से उनका संपर्क किस माध्यम से हुआ।

साथ ही यह भी जांच हो रही है कि—

  • किसने शूटरों को राजस्थान भेजा?
  • किसने रहने और आने-जाने की व्यवस्था की?
  • मोटरसाइकिल किसने उपलब्ध कराई?
  • हथियार किस नेटवर्क से आए?
  • और संयम लोढ़ा की गतिविधियों की जानकारी कौन उपलब्ध करा रहा था?

इन सवालों के जवाब मिलने पर कथित साजिश का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है।

जसकरण और राजिंदर—सिर्फ शूटर या बड़े नेटवर्क की कड़ी?

पुलिस के लिए गिरफ्तार दोनों आरोपी सिर्फ कथित शूटर नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का जरिया हैं। उनके मोबाइल फोन, संपर्कों, यात्रा विवरण, डिजिटल चैट, राजस्थान में ठहरने और स्थानीय संपर्कों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि दोनों आरोपियों ने राजस्थान आने से पहले और बाद में किन लोगों से संपर्क किया। जांच का फोकस अब शूटर से साजिशकर्ता और साजिशकर्ता से नेटवर्क संचालक तक पहुंचने पर है।

क्या लॉरेंस नेटवर्क राजस्थान में फिर बना रहा है जमीन?

राजस्थान में गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई के बावजूद इस मामले ने एक नया सवाल खड़ा किया है—क्या विदेश में बैठे गैंगस्टर स्थानीय मददगारों के जरिए फिर से राजस्थान में अपना नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं? इस मामले में पुलिस की जांच का दायरा इसी वजह से बढ़ गया है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि पूरी साजिश सीधे लॉरेंस बिश्नोई के आदेश पर हुई। इसके लिए जांच एजेंसियों को डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के साथ आरोपियों के कथित संपर्कों की पुष्टि करनी होगी।

सबसे बड़ा सवाल—टारगेट के पीछे कौन सा मकसद?

संयम लोढ़ा को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने की वजह अभी जांच का सबसे बड़ा रहस्य है।

  • क्या यह पुरानी रंजिश थी?
  • क्या इसके पीछे रंगदारी या कारोबारी विवाद था?
  • या फिर किसी बड़े चेहरे को निशाना बनाकर राजस्थान में गैंग का दबदबा कायम करने की कोशिश?

फिलहाल इन तीनों संभावनाओं की जांच चल रही है। लेकिन इतना जरूर है कि फार्महाउस की रेकी, नेपाल से आए कथित शूटर, मोबाइल में टारगेट की तस्वीरें और विदेशी हथियारों की बरामदगी ने इस मामले को राजस्थान के संगठित अपराध नेटवर्क की जांच का बड़ा केस बना दिया है। अब असली कहानी गिरफ्तार शूटरों से आगे शुरू होगी—किसने आदेश दिया, किसने हथियार दिए और किसने राजस्थान की जमीन पर इस कथित किलिंग प्लान को अंजाम तक पहुंचाने का नेटवर्क तैयार किया?

राजस्थान में बड़े टारगेट क्यों बनाए गए?

1. गैंगवार और बदला—राजू ठेहट मामला:- राजू ठेहट की दिसंबर 2022 में हत्या को लंबे समय से चली आ रही आनंदपाल–ठेहट गैंगवार की अगली कड़ी के रूप में देखा गया। हत्या की जिम्मेदारी रोहित गोदारा से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई और उसमें आनंदपाल सिंह तथा बलबीर बानूड़ा की हत्या का बदला लेने का दावा किया गया था। यानी इस मामले में पुरानी गैंगवार और बदले का एंगल प्रमुख था।

2. रंगदारी के रास्ते में आने वाला प्रभावशाली व्यक्ति—सुखदेव सिंह गोगामेड़ी: – गोगामेड़ी हत्याकांड में पुलिस जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया गया कि राजू ठेहट की हत्या के बाद लॉरेंस गैंग से जुड़े नेटवर्क ने शेखावाटी में व्यापारियों और प्रॉपर्टी कारोबारियों से रंगदारी मांगना शुरू किया। रिपोर्टों के अनुसार इनमें से कुछ कारोबारी गोगामेड़ी के करीबी थे और गोगामेड़ी उनके पक्ष में सामने आए थे। इस वजह से रंगदारी नेटवर्क के सामने चुनौती और गैंग के वर्चस्व का एंगल सामने आया।

3. गैंग का नाम और खौफ स्थापित करना: – गोगामेड़ी और ठेहट जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों की रिपोर्टिंग में विश्लेषकों ने इन्हें राजस्थान में संगठित अपराध के वर्चस्व की लड़ाई से भी जोड़ा है। यानी टारगेट केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि उसके माध्यम से गैंग की ताकत का संदेश देना भी संभावित मकसद माना गया।

4. बड़े नाम को निशाना बनाकर रंगदारी का दबाव: – अमेरिकी अभियोग से संबंधित हालिया रिपोर्टिंग में भी लॉरेंस सिंडिकेट पर प्रमुख कारोबारी, राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों को पहचानकर उनकी गतिविधियों और परिवार की जानकारी जुटाने तथा फिरौती/रंगदारी के लिए धमकाने के आरोपों का उल्लेख है। इससे एक पैटर्न सामने आता है जिसमें पहले निगरानी और जानकारी जुटाना, फिर धमकी और आर्थिक दबाव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


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