उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के उच्च शिक्षा विभाग के शर्मनाक हालात!
-कृषि प्रधान मरुधरा में उच्च शिक्षा का ‘बंजर’ मॉडल: 611 प्राध्यापकों में से 608 पद खाली, 47 कॉलेजों में तैनात हैं महज 3 शिक्षक!
-दफ्तरों पर ताले जैसी नौबत: 799 अशैक्षणिक पदों में से 782 खाली, गेस्ट फैकल्टी के थोथे सहारे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़
-उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा की कार्यशैली कटघरे में, कागजी दावों और वाहवाही के पीछे दम तोड़ती सरकारी कृषि शिक्षा
जयपुर। मरुधरा की जिस पावन माटी में पसीना बहाकर किसान देश का पेट भरता है, जहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ही खेती-किसानी और पशुपालन है, उसी कृषि प्रधान राजस्थान में भावी पीढ़ी के सपनों को सरकारी तंत्र ने बेरहमी से कुचल दिया है। जब प्रदेश के विभिन्न जिलों में 47 राजकीय कृषि महाविद्यालय खोलने की घोषणा हुई थी, तब खेत-खलिहानों में पसीना बहाते अन्नदाताओं और उनके होनहार संतानों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उम्मीद बंधी थी कि अब किसान का बेटा-बेटी अपने ही जिले में आधुनिक कृषि तकनीक, मृदा विज्ञान और उन्नत खेती का ककहरा सीखकर कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ बनेगा। लेकिन ‘एक्सपोज़ नाउ’ के इस बड़े खुलासे ने साबित कर दिया है कि वह उम्मीद सिर्फ एक सरकारी छलावा थी। हकीकत यह है कि इन 47 कृषि महाविद्यालयों को सरकारी तंत्र और उच्च शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही ने ‘अनाथालय’ बनाकर छोड़ दिया है।
‘Expose Now’ का सबसे बड़ा खुलासा, 98.5% खाली पदों पर सांसें गिन रहा पूरा तंत्र:-
‘Expose Now’ की विशेष पड़ताल में उच्च शिक्षा विभाग के दावों का जो सच सामने आया है, उसने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में ला खड़ा किया है। हमारी पड़ताल में हासिल हुए आधिकारिक दस्तावेजों ने साबित कर दिया है कि राजस्थान में कृषि उच्च शिक्षा सिर्फ कागज़ों और राजनीतिक नारों पर चलाई जा रही है। ज़मीनी हकीकत यह है कि 47 महाविद्यालयों में स्वीकृत कुल 1410 पदों में से 1390 पद खाली पड़े हैं।
-फैकल्टी का टोटा (शैक्षणिक स्टाफ): 47 कॉलेजों के लिए स्वीकृत 611 शिक्षकों में से 608 पद खाली हैं, पूरे प्रदेश में महज 3 नियमित शिक्षक तैनात हैं! 44 कॉलेज तो ऐसे हैं जहां एक भी नियमित प्राध्यापक नहीं है।
-दफ्तरों और लैब्स में सन्नाटा (अशैक्षणिक स्टाफ): प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और दफ्तर संभालने वाले 799 पदों में से 782 पद रिक्त हैं, केवल 17 कर्मचारियों के भरोसे 47 कॉलेजों का पूरा प्रशासनिक ढांचा ढोया जा रहा है।
‘Expose Now’ का यह इन्वेस्टिगेशन साफ बयां करता है कि जिन संस्थानों को आधुनिक कृषि क्रांति की प्रयोगशाला बनना था, उन्हें सरकारी उपेक्षा ने महज़ औपचारिक डिग्री बांटने वाला ‘खंडहर’ बना दिया है।
प्रदेश के सभी 47 राजकीय कृषि महाविद्यालयों में प्रत्येक कॉलेज के लिए 13 शैक्षणिक और 17 अशैक्षणिक पद स्वीकृत हैं (कुल 30 पद प्रति कॉलेज)। नीचे सभी 47 महाविद्यालयों का कॉलेज-वार विवरण:
प्रदेश के सभी 47 राजकीय कृषि महाविद्यालयों का कॉलेज-वार विवरण
| क्र.सं. | महाविद्यालय का नाम | कार्यरत शैक्षणिक पद | रिक्त शैक्षणिक पद | कार्यरत अशैक्षणिक पद | रिक्त अशैक्षणिक पद |
| 1 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, केकड़ी | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 2 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, माचाड़ी-रैणी | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 3 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, बोरवट | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 4 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, शाहबाद | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 5 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, बारां | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 6 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, गुड़ामालानी | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 7 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, बाड़मेर | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 8 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, भरतपुर | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 9 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, फूलियाकलां | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 10 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, पीपलूंद-जहाजपुर | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 11 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, मांडलगढ़ | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 12 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, गंगापुर | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 13 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, रावतभाटा-बेगूं | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 14 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, बस्सी | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 15 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, तारानगर | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 16 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, चूरू | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 17 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, दौसा | 1 | 12 | 0 | 17 |
| 18 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, खेड़ला बुजुर्ग-महवा | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 19 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, बालाहेड़ा-महवा | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 20 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, नांवा | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 21 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, डीडवाना | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 22 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, सीकरी | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 23 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, कुम्हेर | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 24 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, कामां | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 25 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, धौलपुर | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 26 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, नोहर | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 27 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, जोगीवाला-भादरा | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 28 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, मौजमाबाद-दूदू | 1 | 12 | 1 | 16 |
| 29 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, जमवारामगढ़ | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 30 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, गोगुन्दा | 1 | 12 | 0 | 17 |
| 31 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, पोकरण | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 32 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, केश्वाना-सायला | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 33 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, चिड़ावा | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 34 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, ओसियां | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 35 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, टोडाभीम | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 36 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, हिण्डौन | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 37 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, करौली | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 38 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, तिजारा | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 39 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, मुण्डावर | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 40 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, प्रतापगढ़ | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 41 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, राजसमंद | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 42 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, सवाई माधोपुर | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 43 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, गंगापुर सिटी | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 44 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, बहरावण्डा खुर्द-खण्डार | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 45 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, बहरावण्डा-सिकराय | 0 | 13 | 1 | 16 |
| 46 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, सिरोही | 0 | 13 | 0 | 17 |
| 47 | राजकीय कृषि महाविद्यालय, खैरवाड़ा | 0 | 13 | 0 | 17 |
बिना लैब, बिना शिक्षक—कैसी डिग्री? कैसा भविष्य?
कृषि कोई साधारण किताबी विषय नहीं है। यह प्रैक्टिकल, लैब रिसर्च, फील्ड टेस्टिंग, पैथोलॉजी और उन्नत बीजों के तकनीकी विश्लेषण की विधा है। मुण्डावर कॉलेज की ही बानगी देख लीजिए—प्राचार्य से लेकर सह-आचार्य, सहायक आचार्य, लैब असिस्टेंट और फार्म मैनेजर तक के सभी 16 पद खाली हैं।
सवाल यह उठता है कि जब क्लासरूम में प्रोफेसर नहीं होंगे, लैब में प्रैक्टिकल कराने वाला असिस्टेंट नहीं होगा, और फील्ड पर मार्गदर्शन देने वाला कोई विशेषज्ञ नहीं होगा, तो क्या सिर्फ गेस्ट फैकल्टी और कागजी योजनाओं के सहारे राजस्थान के युवा कृषि वैज्ञानिक बनेंगे? यह सीधे तौर पर उन लाखों किसानों के बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ और आपराधिक लापरवाही है, जो डॉक्टर-इंजीनियर बनने की बजाय अपनी माटी को संवारने का सपना लेकर इन कॉलेजों में दाखिला लेते हैं।
कटघरे में उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा, महकमे की ऐसी दुर्गति पर चुप्पी क्यों?
प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग की कमान उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा के हाथों में है। सरकार युवाओं को रोजगार देने और शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकती। लेकिन ‘Expose Now’ सीधे मंत्री महोदय की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है:
-कागजी फीते काटकर वाहवाही लूटना कब बंद होगा? जब 47 कॉलेजों के लिए न तो स्थायी प्रोफेसरों की भर्ती की गई और न ही लैब का बुनियादी ढांचा तैयार किया गया, तो फिर इन कॉलेजों के बोर्ड लगाकर लाखों छात्रों को धोखे में क्यों रखा गया?
-विद्या संबल योजना का थोथा सहारा कब तक? सरकार विधानसभा में जवाब देती है कि ‘विद्या संबल योजना’ के जरिए काम चलाया जा रहा है। क्या अस्थाई और अल्प मानदेय वाली व्यवस्था से रिसर्च और उच्च कृषि वैज्ञानिक तैयार हो सकते हैं?
-उच्च शिक्षा मंत्री की प्राथमिकताओं में छात्र हैं या सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी? इतने बड़े पैमाने पर पदों का रिक्त होना उच्च शिक्षा विभाग के लचर प्रबंधन और मंत्री महोदय की प्रशासनिक अक्षमता की गवाही दे रहा है। क्या उपमुख्यमंत्री को अपने ही महकमे की इस बदहाली की सुध नहीं है?
अन्नदाता व भावी कृषि वैज्ञानिकों के सपनों का ‘सरकारी कत्ल’:-
राजस्थान का किसान भीषण सूखे, पानी की कमी और प्राकृतिक आपदाओं से जूझता हुआ अपने बच्चों को इसलिए उच्च शिक्षा दिलाना चाहता है ताकि वे आधुनिक तकनीक से प्रदेश की बंजर भूमि को सोना बना सकें। लेकिन सचिवालय के वातानुकूलित कमरों में बैठे नीति-नियंताओं और उच्च शिक्षा विभाग की अनदेखी ने इन 47 कृषि महाविद्यालयों को सिर्फ ‘खंडहर’ बनाकर छोड़ दिया है। क्या उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा इस ऐतिहासिक बदहाली की नैतिक जिम्मेदारी लेंगे? या फिर राजस्थान के होनहार युवा इसी तरह बिना शिक्षकों के खोखली डिग्रियां बटोरने को मजबूर रहेंगे?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now