राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में विदेशी फंडिंग के जरिए धर्म परिवर्तन और सांस्कृतिक मान्यताओं को प्रभावित करने के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जयपुर जोनल ऑफिस ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA), 1999 के तहत 19 सितंबर 2026 को जैसलमेर में दो प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया है कि बेल्जियम की एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) से बिना विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) की मंजूरी के लगभग 5.10 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग प्राप्त की गई थी। इस रकम को शिक्षा, संस्कृति और पारिवारिक भरण-पोषण के नाम पर मंगाकर समाज के कमजोर वर्गों के धर्मांतरण व धर्म-प्रचार गतिविधियों में खपाया जा रहा था।
बेल्जियम की संस्था Amar ASBL और 14 साल का खेल
- संस्था का संचालन: जांच एजेंसी के अनुसार, यह फंडिंग मुख्य रूप से बेल्जियम के ब्रुसेल्स में वर्ष 2011 में स्थापित संस्था ‘Amar ASBL’ से भेजी जा रही थी। इसे बेल्जियम के दो नागरिक—जोस गोफिनेट (Jose Goffinet) और उनका बेटा सालियन गोफिनेट (Salian Goffinet) संचालित करते हैं।
- बिना रजिस्ट्रेशन 15 साल से सक्रिय: संस्था का पूरा कार्यक्षेत्र सिर्फ जैसलमेर में केंद्रित था, लेकिन भारत में इसका कोई ट्रस्ट या एनजीओ पंजीकृत (रजिस्टर्ड) नहीं कराया गया था।
- स्थानीय मोहरे: पिछले 14-15 वर्षों से जैसलमेर निवासी देऊ राम और उसका सहयोगी ज्ञान चंद इस पूरे नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर चला रहे थे।


फर्जी मकसद बताकर मंगाई गई रकम
जांच में सामने आया कि विदेशी मुद्रा हासिल करने के लिए बैंकों में गलत ‘पर्पस कोड’ (Purpose Codes) दर्ज कराए गए थे:
- अनिवासी भारतीयों (NRI) द्वारा परिवार के भरण-पोषण और बचत (Family Maintenance)।
- शैक्षणिक सेवाएं और सांस्कृतिक एवं मनोरंजक गतिविधियां।
- कमीशन एजेंट सेवाएं और कर्मचारियों का वेतन।
वास्तविकता में विदेशी संस्था को ऐसी कोई सेवा प्रदान नहीं की गई थी। इसके बजाय गरीब तबके के बच्चों को शिक्षा दिलाने की आड़ में उनके परिवारों की धार्मिक मान्यताओं को बदलने और धर्मांतरण की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए इसका उपयोग किया गया।
2.60 करोड़ रुपये की नकद निकासी, बैंक ने रोका तो बदला पैंतरा
- नकद निकासी और कोई हिसाब नहीं: देऊ राम ने 5.10 करोड़ रुपये में से करीब 2.60 करोड़ रुपये नकद (कैश) निकाल लिए। इस विदेशी रकम की आमद और खर्च का कोई वैध वित्तीय रिकॉर्ड या बहीखाता नहीं रखा गया था।
- वार्षिक दौरे और धार्मिक सभाएं: बेल्जियम के दोनों नागरिक हर साल 2 से 3 सप्ताह के लिए जैसलमेर आते थे, बच्चों के परिजनों से मिलते थे और धार्मिक सभाओं का आयोजन करते थे।
- दूसरे खातों का इस्तेमाल: हाल ही में जब बैंकों ने बिना FCRA अनुमति के देऊ राम और ज्ञान चंद के खातों में विदेशी रेमिटेंस स्वीकार करने से मना कर दिया, तो उन्होंने अपने अन्य करीबियों और परिचितों के निजी बैंक खातों के जरिए पैसा मंगाना शुरू कर दिया।
रेड में क्या मिला?
ईडी की टीम ने 19 सितंबर को जैसलमेर के दो परिसरों पर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों, स्थानीय मददगारों और फंडिंग से प्रभावित हुए परिवारों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।