जयपुर/बीकानेर। बीकानेर के पूगल क्षेत्र में हरित ऊर्जा (सोलर एनर्जी) की नींव फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की जमीन पर रखी जा रही है। भू-माफिया और राजस्व तंत्र के गठजोड़ ने मिलकर 50 साल पुराने रिकॉर्ड्स में सेंध लगाई और करीब 2010 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि निजी खातों में दर्ज कर सोलर कंपनियों को बेच दी। इस पूरे फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को 40 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का सीधा नुकसान हुआ है। इस खेल में केंद्र सरकार के उपक्रम मैसर्स एसजेवीएन (सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड) ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, मैसर्स अवाड़ा आरजे बीकानेर प्राइवेट लिमिटेड, महाराष्ट्र इंडिया और जयपुर की एमआरएस बिल्ड विजन प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने फर्जी पट्टों और नामांतरण के आधार पर करोड़ों रुपये का निवेश कर डाला।
50 साल पुराने पट्टों से चला महाघोटाला:-
Expose Now के पास मौजूद दस्तावेजी साक्ष्यों के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा मार्च 2014 से फरवरी 2024 के बीच अंजाम दिया गया। भू-माफियाओं ने करणीसर भाटियान, बांदरेवाला और दीनसर गांवों में साल 1970 से 1976 के फर्जी आवंटन पत्र तैयार किए। गैर-काश्तकारों और मृत व्यक्तियों के कथित वारिसों के नाम पर 31 फर्जी जमाबंदियां खोली गईं। रातों-रात नामांतरण (म्यूटेशन) दर्ज कर उपनिवेशन नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। जमीन निजी होते ही इसे भारी मुनाफे में सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए कंपनियों को बेच दिया गया या लंबी लीज पर दे दिया गया।

SDM से पटवारी तक ACB के रडार पर, अराजीराज करने की तैयारी:-
करोड़ों के इस खेल में राजस्व तंत्र के कई आला अधिकारी और कर्मचारी जांच के घेरे में हैं। तत्कालीन एसडीएम सीता शर्मा व मनोज खेमदा, तहसीलदार रामेश्वर गढ़वाल व आदित्या, नायब तहसीलदार राजेश शर्मा व महेंद्र सिंह मुवाल समेत कई कानूनगो और पटवारियों के खिलाफ पुलिस व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में जांच चल रही है। प्रशासन अब इन जमीनों को पुन: ‘अराजीराज’ (सरकारी) घोषित करने की तैयारी कर रहा है। यदि आवंटन रद्द होते हैं, तो सोलर कंपनियों को भारी वित्तीय और ढांचागत नुकसान झेलना पड़ेगा।
प्रशासनिक कदम, जमाबंदियों पर रोक का नोट चस्पा:-
घोटाला सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित जमाबंदियों पर विशेष नोट अंकित कर दिया है, जिससे भविष्य में इनकी खरीद-फरोख्त रोकी जा सके।
“मामला संज्ञान में आते ही उक्त संपूर्ण भूमि की जमाबंदी पर नोट अंकित कर दिया गया है ताकि आगे बेचान न हो सके। न्यायालय में इनके साक्ष्य के रूप में उपयोग पर रोक लगाई गई है और प्रकरण के त्वरित निस्तारण के प्रयास जारी हैं।”
— निशांत जैन, जिला कलेक्टर, बीकानेर