Expose Now विशेष पड़ताल: भीलवाड़ा यूआईटी में 300 करोड़ का भूखंड महाघोटाला, बाबुओं और भूमाफिया के गठजोड़ ने 950 बेशकीमती प्लॉटों पर खड़े किए फर्जी मालिक

-डबल लॉक तोड़कर बाहर निकाले गए रिकॉर्ड रजिस्टर, तिलकनगर, पटेलनगर सहित 5 कॉलोनियों का लैंड बैंक लीक, सेक्टर-8 गायब

-कागजों में ‘मोहन’ और ‘गुलाबी’ बने 9-9 करोड़ के भूखंडों के मालिक, धरातल पर खाली पड़ी जमीन

-घोटाले की कलई खोलने वाले IAS सचिव को किया APO, जांच कर रहे तहसीलदार का भी रातों-रात तबादला

जयपुर/भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा नगर विकास न्यास (UIT) के सुरक्षित माने जाने वाले डबल लॉक रिकॉर्ड रूम से प्रदेश का सबसे बड़ा भूखंड घोटाला सामने आया है। एक्सपोज नाउ की विशेष पड़ताल में खुलासा हुआ है कि यूआईटी के भ्रष्ट बाबुओं और अधिकारियों ने भूमाफियाओं के साथ मिलीभगत कर करीब 300 करोड़ रुपये के 950 बेशकीमती भूखंडों के फर्जी दस्तावेज और फर्जी मालिक खड़े कर दिए हैं। इस सुनियोजित फर्जीवाड़े में तिलकनगर, बापूनगर, पटेलनगर और पटेलनगर विस्तार सहित शहर की 5 प्रमुख कॉलोनियों के पूरे लैंड बैंक को ही लीक कर दिया गया। हालात यह हैं कि रिकॉर्ड से पटेलनगर का पूरा 8 नंबर सेक्टर ही गायब कर दिया गया है।

बाइंडिंग के बहाने डबल लॉक से रजिस्टर लीक, बैकडेट में हुईं फर्जी एंट्रियां:-

Expose Now की जांच में सामने आया कि यूआईटी का मूल रिकॉर्ड, जो न्यास के डबल लॉक में सुरक्षित रहना चाहिए था, उसे रजिस्टर बाइंडिंग कराने के बहाने बाहर ले जाया गया। बाबुओं ने भूमाफियाओं से साठगांठ कर प्रॉपर्टी रजिस्टरों में बैकडेट में मनगढ़ंत नामों की फर्जी एंट्रियां दर्ज कर दीं। इन एंट्रियों में न तो किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर हैं और न ही न्यास की आधिकारिक मुहर। मौके पर यह भूखंड खाली पड़े हैं, लेकिन कागजों में इन्हें आवंटित दिखाकर मूल फाइलों को गायब बताया गया और ‘डुप्लीकेट फाइल’ तैयार करवाकर फर्जी पट्टे व रजिस्ट्री उठाने का खेल खेला गया।

ग्राउंड रियलिटी: जिनके नाम करोड़ों के प्लॉट, धरातल पर उनका कोई वजूद नहीं, Expose Now की टीम जब फर्जी आवंटन सूची को लेकर मौके पर पहुंची, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई:

-मोहन के नाम 18 प्लॉट: पटेलनगर के सेक्टर 10 एल (42 से 51) और सेक्टर 10 जी (11 से 20) में मोहन नामक व्यक्ति के नाम पर 18 प्लॉट दर्ज मिले, जिनकी कुल बाजार कीमत करीब 9 करोड़ रुपये है। मौके पर पड़ताल करने पर पता चला कि इस नाम का कोई भी व्यक्ति वहां मौजूद नहीं है।

-गुलाबी, केलाराम व माया के नाम फर्जीवाड़ा: पटेलनगर के ‘एल’ सेक्टर में गुलाबी के नाम पर 15 प्लॉट (10 एल 23 से 37), केलाराम के नाम पर 9 प्लॉट और माया के नाम पर 12 प्लॉट दर्ज किए गए हैं। पूरा ‘एल’ सेक्टर ही ऐसे फर्जी नामों पर बांट दिया गया। पड़ताल में सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर प्लॉट दर्ज किए गए हैं, उनमें से कई व्यक्ति इस दुनिया में हैं ही नहीं।

ट्रांसपोर्ट नगर में 499 बीघा का खेल, 3126 फाइलें गायब:-

घोटाले की जड़ें ट्रांसपोर्ट नगर योजना तक फैली हुई हैं। 499 बीघा में से 288 बीघा जमीन अवाप्त की गई थी, जबकि 211 बीघा जमीन अवाप्त करना शेष था। प्रभावशाली लोगों की सस्ती जमीनों को अवाप्त दिखाकर, उसके बदले शहर की प्राइम लोकेशनों पर करोड़ों के बेशकीमती प्लॉट रेवड़ियों की तरह बांटे गए। इस पूरे अवार्ड घोटाले से जुड़ी डिस्पैच रजिस्टर समेत 3126 फाइलें रिकॉर्ड से गायब कर दी गईं।

सच्चाई उजागर करने वाले अफसरों पर गिरी गाज, मामला दबाने की कोशिश:-

जब यह महाघोटाला सामने आया, तो तत्कालीन सचिव व आईएएस ललित गोयल ने जांच करवाकर तत्काल प्रभाव से 319 संदिग्ध भूखंडों के आवंटन निरस्त करने के आदेश जारी किए। लेकिन इसके तुरंत बाद 29 अप्रैल को आदेश जारी हुए और महज चार दिन बाद 3 मई को आईएएस ललित गोयल को एपीओ (APO) कर दिया गया। मामले की परतें खोलने वाले तत्कालीन तहसीलदार दिनेश साहू का भी रातों-रात तबादला कर दिया गया। अफसरों के हटते ही फाइलों को दबा दिया गया और बचे हुए मामलों पर लीपापोती शुरू कर दी गई।

अधिकारियों के बयान:

“कुछ भूखंडों को नीलामी में रखा गया था। रिकॉर्ड जांचने पर पता चला कि उन पर पहले से ही किसी के नाम दर्ज हैं। शंका होने पर जब गहन जांच कराई गई, तो फर्जी एंट्रियों की पुष्टि हुई। इसके बाद हमने तत्काल 319 फर्जी भूखंडों को निरस्त किया था।”

— ललित गोयल, तत्कालीन सचिव व आईएएस, UIT भीलवाड़ा

“इन संदिग्ध प्लॉटों की न तो कोई मूल फाइल मौजूद है और न ही कोई आधिकारिक रिकॉर्ड। जेएलएन सहित सभी शाखाओं से रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन कुछ नहीं मिला। प्रॉपर्टी रजिस्टर में केवल संदिग्ध नामों की सीधी एंट्रियां पाई गईं।”

— दिनेश साहू, तत्कालीन तहसीलदार, UIT भीलवाड़ा

क्या 300 करोड़ के इस लैंड स्कैम पर होगी उच्चस्तरीय जांच?

भीलवाड़ा यूआईटी में सरकारी जमीनों की खुली लूट और रिकॉर्ड में की गई छेड़छाड़ ने पूरे प्रशासनिक महकमे की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि जब 319 फर्जी भूखंडों की पुष्टि हो चुकी थी, तो बाकी के 631 संदिग्ध भूखंडों की जांच किसके दबाव में ठंडे बस्ते में डाल दी गई? क्या महज अधिकारियों के तबादलों से 300 करोड़ के इस महाघोटाले पर पर्दा डाला जा सकेगा, या फिर सरकार इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ एसीबी (ACB) या एसओजी (SOG) से निष्पक्ष जांच कराकर भूमाफियाओं और भ्रष्ट बाबुओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजेगी?

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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