अजमेर: पॉलिसी रिन्यू कराने और मैच्योरिटी के नाम पर अजमेर के एक जाने-माने बिजनेसमैन से 6.50 लाख रुपए की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अजमेर की साइबर थाना पुलिस ने दिल्ली में दबिश देकर इस गिरोह के 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बेहद शातिर तरीके से फर्जी फर्म और किराए की दुकानों की आड़ में बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे।
ऐसे दिया था वारदात को अंजाम
साइबर थाना के हेड कॉन्स्टेबल महिपाल चारण ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बीती 23 जुलाई को आनासागर लिंक रोड निवासी बिजनेसमैन राजकुमार हेड़ा ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
- फर्जी कॉल: पीड़ित बिजनेसमैन की पॉलिसी मैच्योर होने के बाद आरोपियों ने उन्हें फोन किया और पॉलिसी रिन्यू करने का झांसा दिया।
- रुपए ट्रांसफर: ठगों ने अलग-अलग प्रक्रियाओं और तकनीकी बहानों का जाल बुनकर पीड़ित से कुल 6 लाख 50 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
- त्वरित कार्रवाई: ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान और सर्विलांस की मदद से दिल्ली के निम्नलिखित चार आरोपियों को दबोचा है:
- विकास कुमार (23) – पुत्र पूरण चंद (निवासी दिल्ली, 12वीं पास)
- सूर्यांश (23) – पुत्र नीरज वर्मा (निवासी दिल्ली, स्नातक)
- अमृतराज (30) – पुत्र ललितेश कुमार (निवासी दिल्ली, स्नातक)
- आसिफ (33) – पुत्र हसन अहमद (निवासी दिल्ली, 12वीं पास)
फर्जी फर्म और किराए की दुकान की आड़ में खेल
जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी सूर्यांश, अमृतराज और आसिफ मिलकर इस पूरी चेन को ऑपरेट कर रहे थे। उन्होंने एक साल पहले यह गिरोह बनाया था:
- दैनिक वेतन पर रिक्रूटमेंट: मुख्य आरोपी सूर्यांश ने विकास कुमार को 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से काम पर रखा था।
- फर्जी फर्म का गठन: विकास के नाम पर ‘आईजीएमएस’ (IGMS) नामक फर्म खुलवाई गई और कपड़े की एक दुकान किराए पर ली गई।
- कई बैंक खाते: इसी फर्म और विकास के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अलग-अलग बैंकों में 4 करंट अकाउंट और 6 सेविंग अकाउंट खुलवाए गए।
- मनी ट्रेल: व्यापारी से ठगे गए 4.30 लाख रुपए सबसे पहले इसी विकास कुमार के बैंक खातों में ट्रांसफर हुए थे, जिन्हें सूर्यांश तुरंत निकाल लेता था।
देशभर के कई मामलों से जुड़े हैं तार
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि ये शातिर ठग ऐसे लोगों की तलाश करते थे जिनके नाम पर आसानी से फर्म और बैंक खाते खुलवाए जा सकें। जब किसी बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन के कारण बैंक द्वारा खाता ब्लॉक कर दिया जाता था, तो ये गिरोह नया व्यक्ति तलाशकर उसके नाम से नए खाते तैयार कर लेते थे।
मुख्य आरोपी अपने हिस्से का 10 प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी रकम को आगे ट्रांसफर कर देते थे। इन आरोपियों के खातों से देश के अन्य हिस्सों में दर्ज कई अन्य साइबर ठगी के मामलों के लेन-देन के पुख्ता सुराग मिले हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और उनके अन्य साथियों की तलाश जारी है।