- कई फर्जी नाम और पहचान: आरोपी जयपुर के ब्रह्मपुरी निवासी अरुण शर्मा है, जो अरुण शर्मा उर्फ आलू, दातार सिंह स्पेशल वाला, सुनील शर्मा, इंजीनियर सुनील मीणा और विजय शर्मा जैसे कई नामों से लोगों को ठगता था।
- जेल से सीखा ठगी का तरीका: थानाधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि आरोपी को अलग-अलग थानों की पुलिस अब तक 6 बार गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जेल में रहते हुए उसने पुलिस की कार्यप्रणाली, अधिकारियों के बात करने के तरीके और कार्रवाई की प्रक्रिया को बारीकी से समझ लिया था। बाहर आकर वह खुद को सीएसटी (CST) या डीएसटी (DST) का सदस्य बताकर लोगों को डराने लगा।
- सटोरियों को बनाता था निशाना: आरोपी मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाता था जो सट्टे या अन्य अवैध गतिविधियों में लिप्त थे। पीड़ित बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत करने से बचते थे, जिसका फायदा उठाकर वह बंधी और वसूली करता था।
- छात्रों के साथ भी धोखाधड़ी: आरोपी सिर्फ फर्जी पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि खुद को आरटीयू (RTU) का प्रोफेसर, नर्सिंग ऑफिसर और इंजीनियर बताकर फेसबुक पर फर्जी आईडी के जरिए छात्रों को नौकरी दिलाने और परीक्षा में नंबर बढ़वाने का झांसा देकर ठगी करता था।
- पत्नी के खाते में मंगवाता था रकम: शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ठगी के पैसे अपने खाते में न मंगवाकर अपनी पत्नी मोनिका शर्मा के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाता था। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है।
- दर्ज मामलों का खुलासा: पूछताछ के दौरान आरोपी ने जयपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक वारदातों को अंजाम देने की बात कबूल की है। मुहाना थाने में दर्ज मामलों में ललित गहलोत की शिकायत पर 2.50 लाख और 1.50 लाख रुपये की ठगी, पुलिसकर्मी बनकर 1.21 लाख, जीएसटी स्टाफ बनकर 90 हजार, तथा आरटीयू में नंबर बढ़ाने के नाम पर 62 हजार और 34 हजार रुपये ठगने का खुलासा हुआ है।
इस पूरी कार्रवाई में थाना स्पेशल के कर्मी ओम डोबर, कानसिंह और दामोदर सारण की भूमिका अहम रही। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच कर रही है।