Big Expose: JJM के 1284 करोड़ के टेंडर में बड़ा खेल, PHED अधिकारियों की ‘मेहरबानी’ से सरकार को अरबों का नुकसान, JWIL-SPML को 11.97% ज्यादा रेट पर वर्क ऑर्डर जारी, GVPR की वित्तीय बिड खुलती तो बचते सरकार के 211 करोड़!

-सूत्रों का बड़ा खुलासा— PHED द्वारा साजिशन बाहर की गई कंपनी GVPR की दरें स्वीकृत L-1 कंपनी से करीब 211 करोड़ कम!

-PHED के मुख्य अभियंता (स्पेशल प्रोजेक्ट) और उनकी टीम ने मेहरबानी दिखाते हुए JWIL-SPML को 1438 करोड़ से अधिक पर थमाया काम!

-हाईकोर्ट डीबी का स्टे: एकलपीठ ने दिए थे GVPR की वित्तीय बिड खोलने के आदेश, लेकिन ठेका बचाने के लिए JWIL-SPML पहुंची हाईकोर्ट खंडपीठ!

-कमीशन का ‘सिंडिकेट’: क्या 211 करोड़ के इस वित्तीय नुकसान के पीछे छुपा है अधिकारियों और पसंदीदा कंपनी के बीच का ‘मोटा कमीशन’?

जयपुर। राजस्थान जल जीवन मिशन (JJM) के तहत धौलपुर के 1284 करोड़ के चंबल-धौलपुर पैकेज-1ए (NIT No- 10/2023-24) में अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज भ्रष्टाचार का एंगल सामने आया है। ‘Expose Now’ के खोजी अध्ययन और गोपनीय सूत्रों से मिली जानकारी में यह कड़वी सच्चाई उजागर हुई है कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के आला अधिकारियों और JWIL-SPML कंपनी के गठजोड़ ने राज्य व केंद्र सरकार के खजाने को 211 करोड़ से अधिक का सीधा चूना लगाने का ताना-बाना बुना है!

211 करोड़ का गणित, आखिर किसे और क्यों पहुँचाया गया फायदा?

PHED की बिड इवैल्यूएशन कमेटी (BEC) ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान GVPR Engineers Ltd. को “क्रेडिट लिमिट” की तकनीकी शर्त का मनगढ़ंत हवाला देकर टेंडर से बाहर (Non-Responsive) का रास्ता दिखाया था। इसके बाद PHED ने JWIL-SPML की वित्तीय बिड खोलकर उसे 11.97% अधिक (Tender Premium) दरों पर 1438.03 करोड़ का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया।

अंदरखाने का सबसे बड़ा खुलासा:-

हमारे गोपनीय और उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, PHED द्वारा साजिश के तहत टेंडर से बाहर फेंकी गई कंपनी GVPR की दरें, JWIL-SPML की स्वीकृत दरों से करीब 211 करोड़ कम हैं! यदि PHED निष्पक्ष होकर GVPR की वित्तीय बिड खोलती, तो एल-1 (L-1) होने के कारण यह टेंडर न्यूनतम दरों पर GVPR को मिलता। इससे न केवल टेंडर निष्पक्ष होता, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के 211 करोड़ सीधे-सीधे बचते!

हाईकोर्ट का फैसला और PHED का ‘डर’:-

जब GVPR ने इस पक्षपात के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो एकलपीठ (Single Bench) ने 17 जुलाई, 2026 को PHED के पक्षपातपूर्ण रवैये पर तमाचा जड़ते हुए आदेश दिया था कि GVPR की वित्तीय बिड खोली जाए। अदालत के इस आदेश से PHED के अधिकारियों और JWIL-SPML के बीच हड़कंप मच गया। उन्हें साफ दिखा कि बिड खुलते ही 211 करोड़ के ‘कमीशन के खेल’ का भंडाफोड़ हो जाएगा। इसी डर के मारे JWIL-SPML तुरंत डिवीजन बेंच (DB) में अपील करने पहुंच गई, जहां 28 जुलाई, 2026 को हाईकोर्ट खंडपीठ ने एकलपीठ के निर्णय के क्रियान्वयन पर अंतरिम स्टे (Stay) लगा दिया है। अब इस मामले की अंतिम सुनवाई 11 अगस्त, 2026 को होनी तय हुई है।

सवालों के घेरे में ‘मुख्य अभियंता (विशेष प्रोजेक्ट)’ और उनकी टीम:-

‘Expose Now’ सीधे तौर पर PHED के मुख्य अभियंता (स्पेशल प्रोजेक्ट), बिड इवैल्यूएशन कमेटी (BEC) के सदस्यों और परियोजना से जुड़े आला अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए निम्नलिखित तीखे सवाल पूछता है:

-211 करोड़ का नुकसान क्यों स्वीकार किया?: जब BSR-2021 की दरों से 11.97% अधिक प्रीमियम पर JWIL-SPML को काम दिया जा रहा था, तो विभाग ने प्रतिस्पर्धी दरें प्राप्त करने के लिए GVPR को मौका देने के बजाय उसे बाहर करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई?

-टेंडर में JWIL-SPML की कमियों पर ‘आंखें मूंद’, GVPR पर कड़ा रुख क्यों?: JWIL Infra Ltd. की बिडिंग कैपेसिटी और लंबित देनदारियों पर उठी शिकायतों के बावजूद उन्हें क्लीन चिट देकर पात्र माना गया, जबकि दूसरी तरफ GVPR को मामूली तकनीकी पेंच फंसाकर टेंडर से ही बेदखल कर दिया गया। यह ‘दोगुना पैमाना’ किस बात का संकेत है?

-किसकी जेब में गया 211 करोड़ का यह ‘मोटा मुनाफा’?: 11.97% की भारी-भरकम बढ़ी हुई दरों पर टेंडर पास करके किस-किस अधिकारी ने करोड़ों रुपये का ‘कट-मनी’ और ‘कमीशन’ अपनी जेब में भरा?

पाइपलाइन बिछाने की जल्दबाजी का सच:-

स्टे की आड़ में कंपनी द्वारा आनन-फानन में 52 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का दावा किया गया है। क्या यह जल्दबाजी इसलिए की गई ताकि कोर्ट में ‘Equity’ (समता) का सहारा लेकर इस 211 करोड़ के डाके पर हमेशा के लिए कानूनी मुहर लगवाई जा सके?

जनता का पैसा, अफसरों की की मौज! :-

जल जीवन मिशन का मूल मकसद ग्रामीण इलाकों में हर घर तक पीने का पानी पहुँचाना है। लेकिन PHED मुख्यालय में बैठे भ्रष्ट तंत्र और मुख्य अभियंता (विशेष प्रोजेक्ट) की टीम ने इसे ‘कमाई का जरिया’ बना लिया है। 211 करोड़ की जो राशि राज्य के विकास और जनहित में खर्च हो सकती थी, उसे एक चहेती कंपनी की झोली में डालकर जनता के खून-पसीने की कमाई की खुलेआम लुटा दिया गया।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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