राजस्थान में व्यावसायिक वाहनों की सुरक्षा और निगरानी से जुड़े वीएलटीडी (VLTD) फर्जीवाड़े मामले में परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है। विभागीय जांच में यह बात सामने आई है कि कई अधिकृत कंपनियों ने बिना वाहनों में डिवाइस लगाए ही ऑनलाइन इंस्टॉलेशन प्रमाण पत्र जारी कर दिए, जिसके बूते हजारों वाहनों के नेशनल परमिट भी आसानी से बन गए।
3,876 वाहनों के लिए जारी हुए फर्जी सर्टिफिकेट्स
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि कुल 3,876 वाहनों के मामले में बिना उपकरण फिट किए ही फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र बांटे गए। इस बड़ी लापरवाही और सुरक्षा से खिलवाड़ को देखते हुए परिवहन विभाग ने संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही वाहन मालिकों से अपील की गई है कि वे केवल सत्यापित और अधिकृत वेंडर्स से ही अपने वाहनों में वीएलटीडी लगवाएं।
9 कंपनियां ब्लॉक और सूची से बाहर
जांच के दौरान जिन कंपनियों ने 100 से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने जैसी गंभीर अनियमितताएं बरती हैं, उनमें से 9 कंपनियों को वीएलटीडी पोर्टल से ऑफबोर्ड (ब्लॉक) कर दिया गया है। इन कंपनियों (एक्ट-1, बुल, इंटे 4जी, लोक्ट-14ए, पीएसडीएन, रोडआरपीए, टी-नाउ-टीएन, ट्रैक्सिना व डब्ल्यूटेक्स) को अधिकृत सेवा प्रदाताओं की सूची से भी हटा दिया गया है, जिससे अब ये नए उपकरण नहीं लगा सकेंगी।
