जयपुर: राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक सेवाओं में बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ RAS अधिकारी बलवंत सिंह लिग्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्मिक विभाग के शासन उप सचिव लेखराज सैनी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच (Contemplated) विचाराधीन है, जिसके चलते राजस्थान सिविल सेवा नियम, 1958 के तहत यह सख्त कदम उठाया गया है।

मलाईदार पदों पर रही तैनाती
बलवंत सिंह लिग्री का करियर हमेशा से चर्चाओं में रहा है। वे जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में उपायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे और निलंबन के समय राजस्थान स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RSBCL) में कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत थे। आबकारी और नगरीय विकास जैसे विभागों में तैनाती के दौरान उनके द्वारा लिए गए निर्णयों पर अब सवाल उठने लगे हैं।
मुख्यालय और सेवा शर्तें
निलंबन आदेश के साथ ही लिग्री का मुख्यालय जयपुर स्थित शासन सचिवालय में कार्मिक विभाग के शासन सचिव कार्यालय में निर्धारित किया गया है। उन्हें सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की सख्त मनाही है। इस अवधि के दौरान उन्हें केवल अर्द्धवेतन अवकाश के बराबर निर्वाह भत्ता ही देय होगा।
करौली प्रकरण से जुड़े गंभीर आरोप

निलंबित अधिकारी बलवंत सिंह लिग्री मूलतः करौली जिले के टोडाभीम इलाके के निवासी हैं। उन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- चिकित्सक प्रताड़ना प्रकरण: करौली में दलित महिला चिकित्सक मामले में आरोपी बाबू इमरान खान और तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. दिनेश चंद्र मीना को बचाने और उच्च अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप।
- आर्थिक अनियमितताएं: गबन के आरोपी ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. जगराम मीना को संरक्षण देने और नियम विरुद्ध पोस्टिंग दिलवाने के आरोप।
- भष्ट्राचार का आरोप: राजस्थान नर्सिंग काउंसिल के रजिस्टर के भष्ट्राचार के मामलें को भी दबाने का आरोप है।
जांच की आंच होगी तेज
सरकार ने नगरीय विकास विभाग (UDH) को निर्देशित किया है कि लिग्री के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के प्रस्ताव अविलम्ब कार्मिक विभाग को भेजे जाएं। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन एक बड़ी चार्जशीट तैयार कर रहा है। यदि SOG और ACB इस पूरे मामले की गहनता से जांच करती हैं, तो कई अन्य प्रशासनिक और चिकित्सा अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर हो सकती है।
