Teacher Bharti Expose: हरियाणा से आता था ‘जाली’ लिफाफा और मिल जाती थी मास्टरी! बुद्धाराम ने खोला 1 करोड़ के फर्जीवाड़े का ‘रूट-मैप’

राजस्थान में सरकारी मास्टर बनने की चाह रखने वाले युवाओं की आंखों में धूल झोंककर फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट बेचने वाले रैकेट पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की जांच में रोज नए और सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। थर्ड ग्रेड अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में खेल कोटे से सरकारी नौकरी दिलाने के मामले में गिरफ्तार किए गए टोगोबार खेल संघ के पूर्व सचिव बुद्धाराम टांक ने एसओजी की रिमांड पूछताछ में बड़ा सच उगला है। बुद्धाराम ने कबूल किया है कि उसने और उसके गिरोह ने करीब 30 अभ्यर्थियों से 1 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि लेकर जाली खेल प्रमाण पत्र जारी किए थे। यह पूरा सिंडिकेट हरियाणा की एक शातिर गैंग के साथ सांठगांठ कर चलाया जा रहा था।

एसओजी की अब तक की सघन तफ्तीश में सामने आया है कि आरोपी ने केवल थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती में ही नहीं, बल्कि सेकंड ग्रेड अध्यापक भर्ती सहित अन्य कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अनुचित लाभ दिलाने के लिए इसी तरह ‘बैकडेट’ (पुरानी तारीख के) राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रमाण पत्र बांटे थे। इस पूरे नेटवर्क की जांच में एक बड़ा तकनीकी पेच सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एसओजी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय (बीकानेर) की ओर से प्रमाण पत्रों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) के लिए असली खेल संघ को जो आधिकारिक ई-मेल भेजा जाता था, उसकी गोपनीय जानकारी बुद्धाराम के इस जाली गिरोह तक कैसे पहुंच जाती थी।

मिलती-जुलती आईडी से भेजते थे फर्जी वेरिफिकेशन

जांच में खुलासा हुआ है कि शातिर आरोपी असली खेल संघ के नाम से हूबहू मिलती-जुलती एक फर्जी ई-मेल आईडी बना लेते थे और शिक्षा निदेशालय द्वारा भेजे गए वेरिफिकेशन मेल का आधिकारिक जवाब उसी जाली आईडी से भेज देते थे। अब एसओजी के अधिकारी इस गंभीर बिंदु की जांच कर रहे हैं कि निदेशालय के वेरिफिकेशन मेल की जानकारी बदमाशों को कैसे लीक होती थी और निदेशालय द्वारा भेजे गए मेल का असली खेल संघ की तरफ से कभी खंडन या जवाब क्यों नहीं दिया गया। माना जा रहा है कि इस खेल में निदेशालय या संघ के भीतर के किसी विभीषण की मिलीभगत है। एसओजी जल्द ही खेल संघ के वर्तमान पदाधिकारियों और संबंधित विभागीय कर्मचारियों को पूछताछ के लिए तलब करेगी।

स्टे लेकर बच रहा था आरोपी, SOG ने कसा शिकंजा

आपको बता दें कि बुद्धाराम टांक के फर्जीवाड़े के खिलाफ पूर्व में अभ्यर्थी रेखा ने जोधपुर जिले के पीपाड़ पुलिस थाने में फर्जी दस्तावेज देने और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन शातिर आरोपी ने कानूनी दांवपेच चलकर उस केस में अपनी गिरफ्तारी पर कोर्ट से स्टे (स्थगनादेश) प्राप्त कर लिया था। इसके बाद जब इसी प्रकृति का एक विस्तृत मामला जयपुर एसओजी मुख्यालय में दर्ज हुआ, तो एसओजी की विशेष टीम ने स्टे की परवाह किए बिना उसे धर दबोचा। गौरतलब है कि एसओजी इस पूरे महाघोटाले के मास्टरमाइंड बिमलेंदु कुमार झा और उसके मुख्य सहयोगी कमल सिंह सहित 20 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। रिमांड अवधि खत्म होने पर आरोपी बुद्धाराम टांक को शनिवार को दोबारा न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।


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