बीकानेर। मरुधरा में अवैध वित्तीय तंत्र, हवाला नेटवर्क और संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे कड़े प्रशासनिक और विधिक अभियान के तहत बीकानेर जिला पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। जिले के श्रीडूंगरगढ़ थाना पुलिस ने शनिवार तड़के रात्रि गश्त के दौरान एक हाई-प्रोफाइल विधिक कार्रवाई को अंजाम देते हुए करीब ₹64.87 लाख (लगभग 65 लाख) रुपये के कूटरचित नकली नोट और ₹13,000 की असली भारतीय मुद्रा बरामद की है।
पुलिस ने मौके से बिना नंबर की एक संदिग्ध एसयूवी (SUV) कार को जब्त करते हुए दो शातिर आरोपियों को विधिक रूप से गिरफ्तार किया है। प्राथमिक विधिक पूछताछ में सामने आया है कि इन जाली नोटों के जरिए बाजार में बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन और निर्दोष व्यापारियों के साथ ठगी की एक सुनियोजित और खौफनाक साजिश रची जा रही थी। इस बड़ी बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियों और विधिक विंग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस पूरे रैकेट के तार अंतर-जिला हवाला ऑपरेटरों से जुड़े होने की विधिक आशंका जताई गई है।
गड्डियों का सांख्यिकीय ऑडिट: कैसे रचा गया था बारूद जैसा वित्तीय जाल?
श्रीडूंगरगढ़ पुलिस के विधिक और तकनीकी अनुसंधान में आरोपियों द्वारा ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कूट रचित पैटर्न का जो सांख्यिकीय वर्गीकरण सामने आया है, उसका विधिक विवरण नीचे तालिका में स्पष्ट किया गया है:
| बरामदगी एवं विधिक बिंदु (Seizure Matrix) | पुलिस द्वारा दर्ज सांख्यिकीय विवरण (Statistical Data) |
| कुल बरामद नकली नोट (Fake Currency) | ₹64,87,000 (लगभग 65 लाख रुपये) |
| बरामद असली भारतीय मुद्रा (Real Cash) | ₹13,000 (तेरह हजार रुपये) |
| नोटों का विधिक मूल्यवर्ग (Denomination) | 500-500 रुपये के कूट रचित नोट |
| फर्जीवाड़े का तकनीकी तरीका (Modus Operandi) | गड्डियों के सबसे ऊपर और नीचे असली नोट लगाए गए थे, जबकि बीच में कोरे सफेद कागज काटकर ठूंसे गए थे। |
| प्रयुक्त अवैध वाहन (Seized Vehicle) | बिना नंबर की सफेद रंग की एसयूवी कार |
घूमचक्कर सर्किल पर तड़के 4 बजे बिछाया गया विधिक जाल
इस पूरी क्रोनोलॉजी का खुलासा करते हुए सर्किल ऑफिसर (CO) निकेत पारीक और थानाधिकारी कश्यप सिंह ने बताया कि शनिवार तड़के करीब चार बजे पुलिस की एक विशेष विधिक टीम घूमचक्कर सर्किल और कालू रोड पर सघन नाकाबंदी और रात्रि गश्त पर तैनात थी। इसी दौरान बीकानेर की ओर से अत्यधिक तेज गति से आ रही एक बिना नंबर की संदिग्ध एसयूवी कार को रुकने का विधिक इशारा किया गया। पुलिस को देखकर कार चालक ने भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद जाप्ते ने घेराबंदी कर वाहन को रोक लिया।
वाहन की सघन विधिक तलाशी लेने पर उसके गुप्त केबिनों में संदिग्ध नोटों की भारी-भरकम खेप (गड्डियां) बरामद हुई। विधिक साक्ष्य जुटाने के लिए जब मौके पर ही नोटों का तकनीकी सत्यापन (Verification) किया गया, तो कूट रचित खेल पूरी तरह बेनकाब हो गया। इसके बाद कार में सवार दोनों युवकों को हिरासत में लेकर विधिक रूप से थाने लाया गया।
जैतासर और धोलिया के दो आरोपी गिरफ्तार, मुख्य सरगना की विधिक तलाश जारी
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और करेंसी कूटकरण से जुड़ी विभिन्न गैर-जमानती विधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी शिनाख्त इस प्रकार हुई है:
- ओमप्रकाश पुत्र विजयपाल नैण (निवासी: जैतासर)
- महेंद्र उर्फ मनोज पुत्र सीताराम गोदारा (निवासी: धोलिया)
थानाधिकारी कश्यप सिंह के अनुसार, ये दोनों आरोपी महज मोहरे हैं जिन्हें बाजार में जाली मुद्रा को खपाने (Circulate) की विधिक जिम्मेदारी दी गई थी। इस पूरे संगठित गिरोह का मुख्य योजनाकार और मुख्य सरगना (Main Kingpin) अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी विधिक लोकेशन ट्रेस करने के लिए पुलिस की विशेष साइबर विंग और क्यूआरटी (QRT) टीमें लगातार विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
अंतर-जिला हवाला नेटवर्क से संबंध होने की आशंका; एएसआई सुरेश कुमार की रही मुख्य भूमिका
इस पूरी बड़ी विधिक सफलता को अंजाम देने में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) सुरेश कुमार की मुख्य और उल्लेखनीय भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अनुसार, इस विशेष टीम में एएसआई गजेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल लेखराम व इन्द्रचंद, कांस्टेबल नरेंद्र सिंह, अशरफ, महेश, गोपी, रामनिवास (डीआर) तथा रविन्द्र सिंह शामिल थे, जिन्हें इस उत्कृष्ट कार्य के लिए विधिक रूप से पुरस्कृत किया जाएगा।
प्रारंभिक खुफिया इनपुट से संकेत मिले हैं कि इस गिरोह के तार जोधपुर, नागौर और जयपुर के कतिपय हवाला कारोबारियों से जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसी अब इस बात का सांख्यिकीय और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही है कि ये कूट रचित नोट किस प्रिंटिंग प्रेस या सीमा पार के नेटवर्क से लाए गए थे और इन्हें किस विधिक अधिकारी या व्यापारी तक डिलीवर किया जाना था।