जयपुर/नई दिल्ली। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यमुना जल परियोजना को गति देने के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में राजस्थान के हिस्से के यमुना जल को राज्य तक पहुंचाने और परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बैठक के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में यमुना जल समझौते को धरातल पर उतारने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि परियोजना से जुड़े विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर सकारात्मक सहमति बनी है।
शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
यमुना जल परियोजना का सबसे बड़ा लाभ राजस्थान के जल संकटग्रस्त शेखावाटी क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। झुंझुनूं, सीकर, चूरू सहित आसपास के क्षेत्रों में वर्षों से पेयजल और सिंचाई जल की समस्या बनी हुई है। परियोजना के पूरा होने के बाद इन इलाकों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना जल उपलब्ध होने से न केवल पेयजल संकट कम होगा बल्कि कृषि क्षेत्र को भी नई ऊर्जा मिलेगी। इससे किसानों की सिंचाई पर निर्भरता भूजल स्रोतों पर कम होगी और क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
2024 में हुआ था ऐतिहासिक समझौता
यमुना जल परियोजना को लेकर फरवरी 2024 में राजस्थान और हरियाणा के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। दोनों राज्यों ने राजस्थान के हिस्से के यमुना जल को हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचाने के लिए संयुक्त रूप से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने पर सहमति जताई थी। यह समझौता केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मौजूदगी में हुआ था।
इस समझौते को दो दशक से अधिक समय से लंबित मुद्दे के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था। केंद्र सरकार ने भी इसे राजस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया था।
संयुक्त टास्क फोर्स करेगी काम
योजना के क्रियान्वयन के लिए राजस्थान और हरियाणा के अधिकारियों की संयुक्त टास्क फोर्स गठित करने पर भी सहमति बनी है। यह टास्क फोर्स डीपीआर, तकनीकी अध्ययन, जल वितरण व्यवस्था और परियोजना के विभिन्न चरणों की निगरानी करेगी।
सरकार का उद्देश्य है कि परियोजना से जुड़े सभी तकनीकी और प्रशासनिक अवरोधों को जल्द दूर कर निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। इसके लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय बनाया जा रहा है।
किशाऊ बांध परियोजना पर भी हुई चर्चा
बैठक में यमुना नदी बेसिन से जुड़ी किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना पर भी चर्चा हुई। यह परियोजना यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ाने और विभिन्न राज्यों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल ही में इससे जुड़े राज्यों के बीच सहमति बनाने की दिशा में भी प्रगति हुई है।
राजस्थान सरकार मिशन मोड में कर रही काम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहले भी कई बार कह चुके हैं कि राज्य सरकार यमुना जल परियोजना को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है। सरकार ने यमुना बेसिन विकास परियोजना के तहत वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और परियोजना को गति देने के लिए कई प्रशासनिक फैसले लिए हैं।
यदि परियोजना समय पर पूरी होती है तो यह राजस्थान के उत्तर-पूर्वी जिलों के लिए जल प्रबंधन के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है। लंबे समय से यमुना जल का इंतजार कर रहे शेखावाटी क्षेत्र के लाखों लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।