जयपुर। राजस्थान में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले करीब 20 दिनों से प्रदेशभर में पेनडाउन हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। कर्मचारियों ने 23 से 25 जून तक जयपुर कूच करने और मांगें नहीं माने जाने पर 6 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास का घेराव तथा 7 जुलाई को जलमहल के सामने ‘जल समाधि’ कार्यक्रम आयोजित करने की चेतावनी दी है।
पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन (राजस्थान) के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन को ‘स्वाभिमान बचाओ आंदोलन’ नाम दिया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों पर केवल आश्वासन दे रही है, जबकि अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
20 दिनों से ठप हैं ग्रामीण विकास के काम
आंदोलन के तहत ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक और अन्य मंत्रालयिक कर्मचारी कार्यालयों में उपस्थिति तो दर्ज करा रहे हैं, लेकिन किसी भी सरकारी फाइल का निस्तारण नहीं कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमाण पत्र जारी करने, विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग, प्रशासनिक अनुमोदन और अन्य दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कर्मचारियों ने राज्य सरकार द्वारा आयोजित ‘ग्रामीण सेवा शिविर-2026’ का भी बहिष्कार कर दिया है। इसके अलावा विभागीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य प्रशासनिक बैठकों में भी कर्मचारी शामिल नहीं हो रहे हैं, जिससे विभागीय कामकाज पर असर पड़ रहा है।

23 से 25 जून तक जयपुर कूच का कार्यक्रम
कर्मचारी संगठन ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित किया है।
- 23 जून: सभी जिलों के जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री और जिला कोषाध्यक्ष अपनी टीमों के साथ जयपुर पहुंचेंगे।
- 24 जून: प्रदेश कमेटी के सदस्य और जिला पदाधिकारी मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों को मांग पत्र सौंपेंगे। इसी दिन ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी भी जयपुर के लिए रवाना होंगे।
- 25 जून: ब्लॉक कार्यकारिणी के सदस्य सचिवालय और विभिन्न विभागों में जाकर सामूहिक रूप से अपनी मांगों का ज्ञापन देंगे।
क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन ने सरकार के सामने 8 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख मांगें शामिल हैं—
- उत्तराखंड मॉडल के आधार पर मंत्रालयिक कैडर का पुनर्गठन
- कैडर रिव्यू और नए पदों का सृजन
- पारदर्शी अंतर-जिला स्थानांतरण नीति लागू करना
- कनिष्ठ लिपिक पद का उन्नयन कर ‘पदेन सचिव’ या ‘पदेन कार्यक्रम अधिकारी’ का दर्जा देना
- हार्ड ड्यूटी भत्ता और अतिरिक्त पंचायत भत्ता लागू करना
- कार्यों का स्पष्ट और स्वतंत्र विभाजन सुनिश्चित करना
- लंबित वित्तीय लाभ और नोशनल बेनिफिट्स की स्वीकृति
- पदोन्नति के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना।
6 जुलाई को सीएम आवास घेराव, 7 जुलाई को ‘जल समाधि’ की चेतावनी
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि जयपुर कूच और वार्ता के बाद भी सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
कर्मचारियों ने 6 जुलाई को जयपुर में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान किया है। इसके अगले दिन 7 जुलाई को जलमहल के सामने ‘जल समाधि’ कार्यक्रम आयोजित करने की चेतावनी दी गई है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
राज्य में पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच पंचायतीराज कर्मचारियों का यह आंदोलन सरकार के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। ग्रामीण विकास योजनाओं के संचालन और प्रशासनिक कार्यों में इन कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में यदि आंदोलन लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं और विकास कार्यों पर पड़ सकता है।
अब सभी की निगाहें सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह आंदोलन बातचीत से समाप्त होगा या फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में बड़ा मुद्दा बनेगा।