राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव: सिर्फ 42 दिन शेष, हाईकोर्ट की समयसीमा पूरी करना बड़ी चुनौती

जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर समय तेजी से निकलता जा रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव हर हाल में कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इस समयसीमा को पूरा करने के लिrajasthan-panchayat-nikay-elections-2026-42-days-left-high-court-deadlineए अब केवल 42 दिन ही शेष बचे हैं, जबकि चुनावी प्रक्रिया के कई अहम चरण अभी शुरू होने बाकी हैं।

चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः 40 से 45 दिन का समय लगता है। ऐसे में यदि अगले कुछ दिनों में चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया, तो हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना राज्य निर्वाचन आयोग के लिए मुश्किल हो सकता है।

हाईकोर्ट ने क्यों तय की 31 जुलाई की डेडलाइन?

राजस्थान में कई पंचायतों और स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी चुनाव नहीं कराए गए थे। इस मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार की चुनाव टालने की मांग को खारिज कर दिया और स्पष्ट निर्देश दिया कि 31 जुलाई 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाए।

सरकार ने कोर्ट में भीषण गर्मी, मानसून, ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट में देरी और कर्मचारियों की कमी जैसे कारणों का हवाला देकर अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।

अब तक क्या-क्या काम हुए?

चुनाव से पहले होने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में वार्ड परिसीमन और मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन शामिल है। राज्य सरकार के अनुसार, 20 जून तक परिसीमन और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने का काम पूरा कर लिया गया है।

हालांकि, अभी भी कई महत्वपूर्ण चरण बाकी हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • चुनाव कार्यक्रम और अधिसूचना जारी करना
  • उम्मीदवारों से नामांकन पत्र लेना
  • नामांकन पत्रों की जांच
  • नाम वापसी की प्रक्रिया
  • चुनाव चिह्न आवंटन
  • प्रचार अवधि
  • मतदान कर्मियों की नियुक्ति और प्रशिक्षण
  • मतदान केंद्रों की तैयारी
  • सुरक्षा व्यवस्था
  • मतदान और मतगणना

विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी चरणों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है।

ओबीसी आरक्षण भी रहा बड़ा मुद्दा

पंचायत और निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से अटका हुआ था। हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग को 20 जून तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे, ताकि आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जा सके।

आरक्षण का अंतिम स्वरूप तय होने के बाद ही सीटों का निर्धारण और चुनाव कार्यक्रम जारी किया जा सकता है। यही वजह है कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया अब समय के खिलाफ दौड़ बन गई है।

कर्मचारियों और संसाधनों की चुनौती

सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया था कि पंचायत और निकाय चुनावों के लिए राज्यभर में 68 हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाने हैं। इनके संचालन के लिए लगभग 3.4 लाख कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इतनी बड़ी संख्या में कार्मिकों की तैनाती, प्रशिक्षण और व्यवस्थाओं को कम समय में पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

क्या समय पर हो पाएंगे चुनाव?

राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और मतदाताओं की नजर अब राज्य निर्वाचन आयोग की अगली घोषणा पर टिकी हुई है। यदि जल्द चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं होता है, तो आयोग को अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करनी पड़ सकती है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य निर्वाचन आयोग 31 जुलाई की समयसीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी कर पाएगा या फिर सरकार और आयोग को अदालत से अतिरिक्त समय की मांग करनी पड़ेगी। आने वाले कुछ दिन राजस्थान की स्थानीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।


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