जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय (University of Rajasthan) में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के तहत चल रही पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया (RUPA-2025) में एक बड़े फर्जीवाड़े और धांधली का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आरक्षण नियमों में कथित छेड़छाड़ और मनमानी के खिलाफ छात्र नेता नीरज खीचड़ के नेतृत्व में छात्रों ने पुरजोर आवाज उठाई। छात्रों के इस उग्र विरोध और लंबे संघर्ष के आगे आखिरकार विश्वविद्यालय प्रशासन को झुकना पड़ा है।
पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के संयोजक (Convener) प्रोफेसर एस. के. गुप्ता (Prof. S. K. Gupta) ने एक आधिकारिक आदेश (पत्र संख्या: rupa/2025/89) जारी कर वर्तमान में चल रही इंटरव्यू प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक स्थगित (Kept on Hold) कर दिया है। प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों और केंद्रों के निदेशकों को आगामी संशोधित निर्देशों तक कोई भी नया इंटरव्यू न लेने या नोटिस जारी न करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

इस फर्जीवाड़े की परतें कैसे खुलीं और इसके पीछे क्या खेल चल रहा था, इसे लेकर ‘Expose Now‘ ने छात्र नेता नीरज खीचड़ से सीधा संवाद किया। इस विशेष बातचीत में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और धांधली का पूरा सच सामने आया है।
Expose Now: नीरज, आपको ऐसा क्यूँ लगा कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ी या धांधली चल रही है?
नीरज खीचड़ : मैडम, सबसे पहले इस चीज का पता इससे लगा कि जिन बच्चों ने ऑल इंडिया रैंक सेकंड या थर्ड प्राप्त की थी… जो जनरल के अलावा जैसे ओबीसी, एससी, एसटी के स्टूडेंट्स थे, तो उन बच्चों के उसी डिपार्टमेंट में 10-10 सीटें होने के बावजूद भी उनको इंटरव्यू के लिए कॉल नहीं किया गया। तो आप देखिए कि ऑल इंडिया रैंक सेकंड या थर्ड प्राप्त की है, 10 सीटें हैं उस डिपार्टमेंट के अन्दर, फिर भी उनका नाम नहीं आ रहा है।
इस चीज से यह पता लग रहा था कि यूनिवर्सिटी ने जिस डिपार्टमेंट में लगभग 100 सीटें थीं, उसके अंदर लगभग 80 स्टूडेंट्स अनरिजर्व्ड (Unreserved) कैटेगरी के ही इंटरव्यू के लिए कॉल किए। हालांकि होना ऐसा चाहिए कि अगर जैसे 100 सीटें हैं, तो 36 सीटें अनरिजर्व्ड की होंगी और जो नीचे की सीटें हैं वो रिजर्वेशन के हिसाब से हर कैटेगरी को बांटी जाएंगी। पर जो अनरिजर्व्ड की जो सीटें हैं, उसके अन्दर अगर कोई रिजर्व्ड कैटेगरी का बच्चा भी मेरिट से ऊपर जाएगा, तो उसको वो सीट दी जाएगी। तो इस चीज़ से पता लगा कि यूनिवर्सिटी के जो पीएचडी एडमिशन हो रहे हैं, उनके अंदर धांधली है और जो रिजर्वेशन है उसके साथ विश्वविद्यालय प्रशासन छेड़छाड़ कर रहा है।

Expose Now: जब आपने पहली बार यह मामला उठाया, तो विश्वविद्यालय प्रशासन का क्या रुख था?
नीरज खीचड़: देखिये, जब पहली बार स्टूडेंट्स का हमारे पास कॉल आया कि यूनिवर्सिटी के द्वारा फॉर्म कैंसिल किए गए थे, तो उस चीज से यह पता लगा। बच्चों ने बोला कि हमारी ऑल इंडिया रैंक इतनी है फिर भी हमारा फॉर्म कैंसिल हो गया। तो इस चीज से प्रशासन को अवगत कराया पर वो हमारी बातों को अनदेखा कर रहे थे, अनसुना कर रहे थे। वो बातों पर ध्यान नहीं दे रहे थे क्यूँकि उन्हें घोटाला करना था।
फिर हम पीएचडी एडमिशन के जो कन्वीनर हैं, एस. के. गुप्ता, उनके ऑफिस में गए और विरोध किया। और उन्होने ये बात स्पष्ट रूप से बोली कि आप पीएचडी एडमिशन की जो प्रोसेस है उसको होल्ड कीजिए और जो रिजर्वेशन के हिसाब से आप एडमिशन प्रोसेस को स्टार्ट कीजिए।
Expose Now: जब आप लोग कन्वीनर के पास गए, तो उनकी तरफ से क्या जवाब मिला?
नीरज खीचड़़: बिल्कुल, उनका जवाब यही था कि जो यूनिवर्सिटी जो प्रोसेस है… जैसे सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश था कि आप किसी भी बच्चे के एडमिशन से पहले उसकी कैटेगरी और उसकी जो पर्सनल डिटेल्स हैं वो किसी के सामने रखेंगे नहीं। इसके हिसाब से यूनिवर्सिटी ने क्या किया कि जो बच्चे पीएचडी में प्रवेश लेने वाले थे, उनको सिर्फ उनके फॉर्म नंबर के हिसाब से इंटरव्यू कॉल किया गया।
Expose Now: यानी सिर्फ फॉर्म नंबर के आधार पर ही इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया?
नीरज खीचड़़: जी, जो फॉर्म नंबर होते हैं, उनके हिसाब से उनको इंटरव्यू कॉल किया गया। उन्होंने हवाला दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने मना किया है कि एडमिशन प्रोसेस के अन्दर जब तक एडमिशन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाए, किसी भी स्टूडेंट की जो कैटेगरी है और उसकी जो पर्सनल डिटेल्स हैं वो शेयर नहीं करनी हैं। तो इसके हिसाब से फिर जो अदर कैटेगरी के बच्चे थे, जैसे ओबीसी, एससी, एसटी, एमबीसी, ईडब्लूएस के जो बच्चे थे, जिन्होंने ऑल इंडिया सिक्स्थ-सेवंथ (6th-7th) रैंक किसी सब्जेक्ट में हासिल की थी, उन बच्चों को उसमें इंटरव्यू कॉल नहीं आया। उसी से पता लगा कि रिजर्वेशन के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन ने खिलवाड़ किया है।
Expose Now: तो क्या प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में अपनी मनमानी की?
नीरज खीचड़़: बिल्कुल मनमानी की गई। और इस प्रोसेस के अन्दर जैसे बच्चों के फॉर्म के अन्दर कुछ करेक्शन (Correction) थे, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने करेक्शन के लिए उनको टाइम नहीं दिया।
Expose Now: क्या छात्रों को जानबूझकर आनन-फानन में बाहर निकाला गया?
नीरज खीचड़: बिल्कुल आनन-फानन में और जल्दबाजी के अन्दर यह एडमिशन प्रोसेस वो पूरी करना चाहते थे। जब बच्चे प्रशासन का दरवाजा खटखटाते थे तो वहाँ उन्हें कोई नहीं मिलता था।

Expose Now आपको क्या लगता है, इसके पीछे अपनों को फायदा पहुँचाने का खेल था या कोई बड़ा आर्थिक लाभ?
नीरज खीचड़़: बिल्कुल देखिये मैडम, बिल्कुल आर्थिक फायदा था इसके अन्दर। जो फीस है, ऐसा कोई भी विश्वविद्यालय नहीं है जिसकी पीएचडी एडमिशन की फीस लगभग 3500 से ज्यादा हो। और आप ये मानिए कि पूरे विश्वविद्यालय के अन्दर 100 एडमिशन होने हैं, उसके अंदर से सीधा-सीधा 80 बच्चों का अनरिजर्व्ड में एडमिशन होना एक बहुत बड़ी गड़बड़ी थी।
जिसके ऊपर आज विश्वविद्यालय प्रशासन ने रोक लगाई है। जब मेरे द्वारा एडमिशन कमिटी के सामने प्रदर्शन किया गया तो उन्होंने सभी चीजों पर माफी मांगी कि जिन बच्चों का रिजर्वेशन है, उनको रिजर्वेशन दीजिए। कुछ ऐसे डिपार्टमेंट थे जिनके अन्दर बच्चों ने जिस सब्जेक्ट के अन्दर अप्लाई किया, उस सब्जेक्ट के अन्दर दूसरे सब्जेक्ट के बच्चों को एडमिशन देने की कोशिश की जा रही थी, उस पर होल्ड कराया गया। और जिन बच्चों के फॉर्म में करेक्शन थे, जिन्होंने फॉर्म गलत तरीके से भर दिया था, जो मेरिट लिस्ट में फर्स्ट रैंक, सेकेंड रैंक पर आ रहे थे, उन बच्चों के लिए करेक्शन के लिए दोबारा पोर्टल open किए जाएंगे।
Expose Now: आज रोक लगने के बाद अब आगे की क्या प्रक्रिया रहने वाली है?
नीरज खीचड़़: देखिये, लगभग 200 से 300 स्टूडेंट्स ऐसे थे मैडम जिन्होंने करेक्शन के लिए बोला कि जब हमने ई-मित्र (e-Mitra) से फॉर्म भरा तो हमारा गलत फॉर्म अपलोड हो गया, कोई डॉक्यूमेंट गलत अपलोड हो गया। उन बच्चों के लिए करेक्शन दोबारा ओपन करेंगे। और उसके अलावा जो स्टूडेंट्स का रिजर्वेशन है, दोबारा रिजर्वेशन के हिसाब से सीटें बांटी जाएंगी और फिर से दोबारा इंटरव्यू कॉल के लिए अलग सूची जारी की जाएगी।
Expose Now: क्या इसके लिए प्रशासन ने कोई निश्चित तारीख तय की है?
नीरज खीचड़़: नहीं, बिल्कुल लगभग इस हफ्ते के अन्दर, 5 से 6 दिन का विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय दिया है कि 5 से 6 दिन के अन्दर रिजर्वेशन के हिसाब से दोबारा इंटरव्यू कॉल किया जाएगा।