जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) में एमए समाजशास्त्र (Sociology) द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान एक बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई। परीक्षा हॉल में छात्रों को प्रश्नपत्र की जगह उत्तर कुंजी (Answer Key) बांट दी गई। करीब 120 छात्रों के विरोध के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और अब इसे 27 जून को दोबारा कराने का फैसला लिया गया है। इस पूरी प्रशासनिक लापरवाही के पीछे किसकी जिम्मेदारी है और छात्र राजनीति इस पर क्या कहती है?
इसे समझने के लिए ‘Expose Now’ की एडिटर राखी सिंह ने NSUI और ABVP के छात्र नेताओं से सीधी बात की। सबसे पहले पढ़िए मामले पर क्या रुख है NSUI का, NSUI कार्यकर्ता वियोना जाट से EXPOSE NOW की EXCLUSIVE बातचीत
इस पूरी चर्चा के मुख्य अंश:
भाग 1: प्रशासन की लापरवाही और NSUI के आरोप
Expose Now: यूनिवर्सिटी का एग्जाम तो लिखित होता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रही ओएमआर (OMR) शीट का इस एग्जाम से क्या संबंध है?
वियोना जाट : जी बिल्कुल नहीं है। जो ओएमआर शीट दिखाई जा रही है, उसमें ओनली डिटेल्स फिल की जा रही हैं। जो आप वीडियो देख रहे हैं वो उसका फ्रंट पेपर है, जिसके नेक्स्ट सारे पेपर ब्लैंक हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय के एग्जाम्स थे जिनकी टाइमिंग शाम 3 से 6 बजे की थी। स्टूडेंट्स ने अपनी पर्सनल डिटेल्स फिल करीं, उसके बाद उनको क्वेश्चन पेपर डिस्ट्रीब्यूट किए गए। यहाँ पर स्टूडेंट ये पाते हैं कि क्वेश्चन पेपर की जगह उन्हें आंसर शीट (उत्तर पुस्तिका) मिली है।

Expose Now: सेमेस्टर टू में करीब 120 बच्चे थे। पेपर अलग-अलग सीरीज में बनता है, तो फिर 1 लिफाफे में पेपर और दूसरे में आंसर-की वाली यह गड़बड़ कैसे हुई?
वियोना जाट : जब हम देर रात प्रोटेस्ट पर बैठे थे, तो प्रशासन के नुमाइंदों से हमारा फर्स्ट क्वेश्चन यही था कि 120 क्वेश्चन पेपर हैं, तो 120 आपने आंसर शीट किस बेस पर छापी हैं? फैकल्टी को जो आंसर-की प्रोवाइड करवाई जाती है, वो एक बेसिक पेपर होता है। इससे ये जाहिर होता है कि राजस्थान विश्वविद्यालय में आंसर प्रिंटेड हो के आ रहे हैं। यहाँ इलिटरेट टीचर बैठे हैं जो फर्जीवाड़े, जुगाड़ से और आरएसएस के नुमाइंदे बनकर बैठे हैं। न वो बच्चों को पढ़ाने में सक्षम हैं, न पेपर देने में, न आंसर चेक करने में। इसी वजह से हर सेमेस्टर में 90% बच्चों की बैक आती है।
Expose Now: आप सीधे-सीधे RSS पर आरोप क्यों लगा रही हैं?
वियोना जाट: ऐसा क्यूँकि मैम, इस विश्वविद्यालय में जितनी भी बड़ी कुर्सी पर लोग बैठे हैं, वो अपने आका को राजी करने के लिए छात्रों को पढ़ाना और उनकी आवाज सुनना भूल चुके हैं। हम जब अपनी शिकायत लेकर गए, तो एडमिन ब्लॉक साढ़े 6 बजे बंद होता है, लेकिन हमारे पहुँचने से पहले ही उन्होंने लॉक कर दिया क्यूंकि उनके पास कोई जवाब ही नहीं है। एग्जामिनेशन कंट्रोलर राकेश राव सर पीछे वाले गेट से भागे हैं और गार्ड को ऑर्डर दिया कि स्टूडेंट आ रहे हैं, लॉक लगा दो।
Expose Now): वीसी (VC) अल्पना कटेजा का इस पर क्या रुख है? यूनिवर्सिटी ने तो आनन-फानन में 27 तारीख को दोबारा पेपर तय कर दिया है।
वियोना जाट: अल्पना जी आका को खुश करने और भ्रष्टाचार में लिप्त हो रखी हैं। उन्होंने एक भी छात्र की समस्या न कभी सुनी है, न समाधान किया है। उनके ऑफिस के बाहर 500 स्टूडेंट बैठे हों, उन्होंने कभी बाहर आकर बात करना उचित नहीं समझा। ये जो आनन-फानन में फैसला लिया गया है, ये सिर्फ बात को दबाने के लिए है ताकि बात बाहर न आये। अगर 1 हफ्ते में दोषियों पर एक्शन नहीं लिया गया, तो छात्र शक्ति वापस प्रशासन के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी।
भाग 2:
एक तरफ NSUI RU एडमिनिस्ट्रेशन को गंभीर आरोपों के साथ घेर रही है, वहीं ABVP NSUI पर ही सवाल खड़े कर रही है। अब पढ़िए ABVP के राष्ट्रीय संयोजक भारत भूषण यादव से EXPOSE NOW की EXCLUSIVE बातचीत..

Expose Now: भारत जी, प्रशासन की इतनी बड़ी गलती और छात्रों के आक्रोश पर राजस्थान यूनिवर्सिटी का क्या रुख होना चाहिए?
भारत यादव : देखिए, इसमें क्या होता है कि एग्जामिनर की तरफ से प्रिंट होने के लिए प्रेस के पास पेपर जाता है और उसके साथ आंसर-की (Answer Key) भी जाती है। तो गड़बड़ ये हुई है कि जिस लिफाफे में प्रश्न पत्र जाना था और जिसमें उत्तर पुस्तिका जानी थी, दोनों एक्सचेंज हो गए। जहाँ उत्तर पुस्तिका छपनी थी उसकी जगह पेपर छप गए और पेपर की जगह उत्तर पुस्तिका आ गई। पूरा प्रशासन ऊपर से नीचे तक सोया हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। हम मांग कर रहे हैं कि मामला ‘ग्रीवांस कमिटी’ में जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
Expose Now: यूनिवर्सिटी ने 27 को दोबारा पेपर कराने का फैसला तो ले लिया, लेकिन क्या कंट्रोलर या किसी अन्य ने इसकी जिम्मेदारी ली है?
भारत यादव: पेपर दोबारा कराना तो पड़ेगा ही, लेकिन गड़बड़ करने वालों पर कार्रवाई कब होगी? हमारी फीस का पैसा दोबारा लगेगा, पेपर दोबारा प्रिंट होगा तो यूनिवर्सिटी में हमारे पैसे का कितना नुकसान होगा। आज हम फिर ज्ञापन देंगे और प्रोटेस्ट कर रहे हैं। कमिटी से जांच करवा कर प्रशासन को दोषियों पर कार्रवाई करनी ही पड़ेगी।
Expose Now: NSUI का आरोप है कि प्रशासन में बैठे लोग आरएसएस (RSS) के इशारे पर काम कर रहे हैं और उन्हें छात्रों के भविष्य से मतलब नहीं है। इस पर आप क्या कहेंगे?
भारत यादव: देखिए, कुलपति मैडम अल्पना कटेजा की नियुक्ति अशोक गहलोत की सरकार के समय की हुई है। अब ये इतने बड़े मूर्ख लोग हैं कि अपनी कांग्रेस के लोगो को ही आरएसएस का बोलते हैं। विश्वविद्यालय में पिछले कई सालों से टीचिंग की भर्तियां ही नहीं हुईं, तो लोग कहाँ से आयेंगे? और आरएसएस का कार्यकर्ता होना कोई गुनाह थोड़ी है। संविधान ने सबको अपने विचार पर काम करने का अधिकार दिया है। देश में प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक संघ की विचारधारा पर काम कर रहे हैं।
Expose Now: यानी सरकार कोई भी हो, नियुक्त व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभानी चाहिए?
भारत यादव: बिल्कुल। आप पिछली सरकार में देखिए, कुलपतियों के कितने भ्रष्टाचार के मामले सामने आए। वर्तमान राज्यपाल जी ने कितनों की नियुक्ति निरस्त की। वो सब अशोक गहलोत सरकार के समय लगे हुए थे। अगर अल्पना कटेजा मैडम संघ की हैं, तो अशोक गहलोत भी संघ के दलाल हुए जो इनकी नियुक्ति करके गए? राजस्थान में कांग्रेस राज में 20 में से 18 पेपर आउट हुए, तब इन्होंने (NSUI) कितने आंदोलन किए थे? अब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं है तो ये नैरेटिव फैलाने और युवाओं को भड़काने का काम कर रहे हैं।
Expose Now : क्या आपने वीसी से मुलाकात की? आगे आपकी क्या रणनीति है?
भारत यादव: आज हमारी मुलाकात और बातचीत हुई है। उन्होंने कहा है कि इस पर पक्का कार्रवाई की जाएगी। हमारी स्पष्ट मांग है कि मामला ग्रीवांस कमिटी में जाए। अगर वो दोषियों पर कार्रवाई नहीं करेंगे, तो हम फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे।
इस पूरी बातचीत से एक बात साफ है कि गलती चाहे जिस भी स्तर पर हुई हो, यह राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। हालांकि 27 जून को परीक्षा दोबारा कराने की तिथि दे दी गई है, लेकिन छात्रों के समय और संसाधनों की बर्बादी की जवाबदेही तय होना अभी बाकी है। वहीं, छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा अब पूरी तरह से ‘NSUI बनाम ABVP’ की वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है।
‘Expose Now’ ने राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। इस कारण हमें उनका पक्ष जानने का मौका नहीं मिला। ‘Expose Now’ आगे भी इस पर आगे भी नजर बनाए रखेगा।