-प्रतिस्पर्धा खत्म कर चहेतों को फायदा पहुँचाने का खेल, बाजार कीमत से 38 लाख महंगे दाम पर खरीदे जा रहे हैं वाहन
-विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर खोली इकलौती वित्तीय बोली, अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने तलब की पूरी रिपोर्ट
-जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई पर डाका, 60 लाख की गाड़ी के लिए सरकार चुकाएगी 98.73 लाख
नागौर/जयपुर। स्वायत्त शासन विभाग (DLB) में एक बार फिर भ्रष्टाचार और नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों को फायदा पहुँचाने का बड़ा ‘गडबड़झाला’ सामने आया है। स्थानीय निकायों में सीवर लाइनों की सफाई के लिए 100 सीवर सफाई वाहनों की खरीद की प्रक्रिया में खुलेआम धांधली की बू आ रही है। विभाग ने 99 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम टेंडर में प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह समाप्त करते हुए एक ‘सिंगल बिडर’ की वित्तीय बोली को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे कार्यआदेश (Work Order) देने की भी पूरी तैयारी कर ली है।
नियमों को ठेंगा, सिंगल बिडर होने के बावजूद क्यों खोली गई वित्तीय बोली:-
नियमों के मुताबिक, जब भी किसी बड़े सरकारी टेंडर में केवल एक ही कंपनी भाग लेती है, तो बाजार में सही प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उस टेंडर की शर्तों की पुनः समीक्षा की जाती है और नया टेंडर (Re-tender) जारी किया जाता है। लेकिन इस मामले में विभाग ने गत 27 मार्च को ऑनलाइन निविदाएं आमंत्रित की थीं, जिसकी अनुमानित लागत 98.96 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। टेंडर में सिर्फ एक ही कंपनी के आने के बावजूद, विभाग के आला अधिकारियों ने री-टेंडर करने के बजाय रहस्यमयी तरीके से उसी इकलौती कंपनी की वित्तीय बोली खोल दी। उस सिंगल बिडर ने 98.73 करोड़ रुपये की बोली प्रस्तुत की है और विभाग अब औपचारिक नेगोशिएशन (मोलभाव) का ड्रामा कर उसे कार्यआदेश जारी करने जा रहा है।
कीमत का बड़ा खेल, प्रति वाहन 35 से 38 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान:-
‘Expose Now’ की पड़ताल और बाजार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन सीवर सफाई वाहनों की वास्तविक बाजार कीमत (Market Price) महज 60 से 65 लाख रुपये प्रति वाहन है। लेकिन स्वायत्त शासन विभाग इस सिंगल बिडर कंपनी से करीब 98.73 लाख रुपये प्रति वाहन की दर से खरीद करने की तैयारी में है। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार प्रति वाहन 35 से 38 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने जा रही है। 100 वाहनों की इस खरीद में सीधे तौर पर जनता के टैक्स के करीब 35 से 38 करोड़ रुपये का खुलेआम चूना लगाने की बिसात बिछाई जा चुकी है।
मुख्यमंत्री की चौखट पर पहुँचा मामला, विभाग के दावों में झोल:-
इस महाघोटाले की भनक लगते ही मामला अब मुख्यमंत्री के संज्ञान में आ गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस पूरी टेंडर प्रक्रिया पर सख्त रुख अपनाते हुए विभाग से इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। दूसरी ओर, जब इस गड़बड़ी को लेकर स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले में अपनी सफाई देते कह रहे हैं कि “यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है। कुछ लोग अपने हित के लिए गलत तरीके से प्रचारित कर रहे हैं। अभी तक कोई कार्यआदेश जारी नहीं किया गया है, बल्कि अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर होना है।” अधिकारी भले ही इसे पारदर्शिता का नाम दे रहे हों, लेकिन सवाल यह उठता है कि री-टेंडर कराने के बजाय आखिर किस दबाव या लालच में सिंगल बिडर की वित्तीय बोली खोली गई? ‘Expose Now’ इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है और जनता की गाढ़ी कमाई की लूट को बेनकाब करता रहेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now